उपवन है खिला
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आया सावन मास शुभ, रिमझिम वृष्टि फुहार।हरितिम उपवन है खिला, सुरभित बहे बयार॥ महका उपवन फूल से, खिलते चारु गुलाब।मधुर मिलन विरही युगल, कशिश दिली बेताब॥ खिलती है यौवन कली, पावस ऋतु बरसात।डोला झूले झुलनियाँ, फँसे प्रणय जज़्बात॥ भीगे तन-मन यौवना, रग-रग पुलकित देह।कज़री गाती प्रियतमा, अभिलाषी प्रिय नेह॥ … Read more