साझेदार बनिए,मतदान अवश्य कीजिए

डॉ. स्वयंभू शलभ रक्सौल (बिहार) ****************************************************** लोकसभा चुनाव का अगला चरण आ रहा है…इसलिए मतदान अवश्य कीजिये…बेहतर और मजबूत लोकतंत्र के निर्माण के लिए..अपने क्षेत्र और देश के सर्वांगीण विकास के लिए…उस सपने को साकार करने के लिए,जिसे आपने वर्षों से संजोया है। चुनिए…मजबूत संकल्प शक्ति रखनेवाले उम्मीदवार को, , जो संसद में आपकी आवाज … Read more

लोकतंत्र में भी बेबसी

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** विषय कुछ भी हो मगर कहना वही है जो शक्तिशाली ने कहना है और होना भी वही है जो सत्ता पक्ष चाहता है। जैसे भ्रष्टाचार रोको,अर्थात राहुल गांधी या केजरीवाल इत्यादि को रोको। भले ही सैनिक तेज बहादुर यादव इसी झांसे में अपनी नौकरी एवं इकलौता बच्चा … Read more

प्रधान सेवक का अहं विकास में बाधक

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** एक जमाना था जब कुआँ और तालाब चोरी हो जाते थे,तथा बाँध भी ग़ुम जाते थे और उनकी जाँच होने पर सही होती थी पर वर्तमान में हमारे प्रधान सेवक ने कहा कि गढ्ढे भरने का काम किया है तो इसका अर्थ दो प्रकार का है-जैसे प्रधान सेवक ने इतना काम … Read more

वास्तविक मुद्दों को गुमराह कर `आरोप-प्रत्यारोप` की राजनीति

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहाँ सभी वर्गों,जातियों एवं सम्प्रदायों से जुड़े लोगों को अपनी बात कहने और अपना पक्ष रखने की स्पष्ट रूप से स्वतंत्रता है,लेकिन अगर हम भारत देश की वर्तमान राजनीति की बात करते हैं तो दिलो-दिमाग में बहुत ही नकरात्मक छवि सामने आती … Read more

राजनीति का धर्म या धर्म की राजनीति

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** धर्म का कार्य है लोगों को सदाचारी और प्रेममय बनाना और राजनीति का उद्देश्य है लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उनके हित में काम करनाl जब धर्म और राजनीति साथ-साथ नहीं चलते,तब हमें भ्रष्ट राजनीतिज्ञ और कपटी धार्मिक नेता मिलते हैंl एक धार्मिक व्यक्ति,जो सदाचारी और स्नेही है,अवश्य … Read more

काजल की कोठरी में उम्मीद की किरण

डाॅ.देवेन्द्र जोशी  उज्जैन(मध्यप्रदेश) ******************************************************************** १७वीं लोकसभा के आम चुनाव में जहां नेताओं द्वारा एक-दूसरे के प्रति बदजुबानी,कटु व्यवहार और चरित्र हनन की एक से बढ़कर एक खबरें आए दिन मीडिया की सुर्खी बन रही है जिन्हें लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार के बाद चुनाव आयोग का स्वतः संज्ञान जागा और योगी आदित्यनाथ,मायावती,आजम शेख और … Read more

जरूरत है राजनीतिक परिष्कार की

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* इन आम चुनावों में बड़े विरोधाभास दिख रहे हैं। एक बड़ा विरोधाभास है राजनीतिक घोषणाओं एवं आश्वासनों में,जो तमाम अंधेरों के बीच चांद उगाने की कोशिशें कर रहा है। इन सबके बीच आप और हम उन चार अंधों को मिले हाथी की तरह हैं,जो अपने मापदंडों के साथ अपना-अपना सच परखने … Read more

लोकतंत्र में मतदाता की भूमिका

शम्भूप्रसाद भट्ट `स्नेहिल’ पौड़ी(उत्तराखंड) ************************************************************** कहते हैं कि “लोकतंत्रीय शासन व्यवस्था अंतर्गत मतदाता देश का भाग्य विधाता होता है।” मतदाता के मत की शक्ति का आंकलन तब अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है,जब किसी प्रत्याशी को एक-एक मत की प्राप्ति या अप्राप्ति के कारण जीत या हार का सामना करना पड़ता है। इसलिए,कहा जा सकता है … Read more

चुनाव सुधार हेतु नया `सूरज` आवश्यक

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* लोकसभा चुनाव २०१९ की सरगर्मियां उग्र से उग्र होती जा रही है,राष्ट्र में आज ईमानदारी एवं निष्पक्षता हर क्षेत्र में अपेक्षित हैl चूँकि,अनेक गलत बातों की जड़ चुनाव है इसलिए वहां इसकी शुरूआत इस समय सर्वाधिक अपेक्षित है। बीते कुछ महीनों में चुनाव सुधार को लेकर देशभर में तमाम तरह की … Read more

हिंसक सत्ता की नाकामी

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** महावीर जयंती के अवसर पर हार्वर्ड कैनेडी स्कूल की एक रपट दुनिया के आंदोलनों पर छपी है। यह खोजपूर्ण रपट इस मुद्दे पर छपी है कि पिछले १०० वर्षों में कितने हिंसक आंदोलन सफल हुए हैं और कितने अहिंसक ? इसके मुताबिक ३६ प्रतिशत हिंसक आंदोलन सफल हुए हैं जबकि … Read more