पर्यावरण संकट:सबसे बड़ी चुनौती

डॉ. स्वयंभू शलभ रक्सौल (बिहार) ****************************************************** ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग में झुलसकर करीब ५० करोड़ निरीह जानवरों की मौत हो चुकी है। इनमें स्तनधारी पशु, पक्षी और रेंगने वाले जीव सभी शामिल हैं। इनकी कितनी ही प्रजातियां अब समाप्त हो जाएंगी। तस्वीरें दिल को दहला देती हैं,दर्जनों लोग भी मारे गए हैं। कुआला … Read more

परीक्षा:उम्मीदवार की या जनता की

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** जनतन्त्र जनतामय होता है। जनता के बीच से जनता द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि जननायक,जननेता,जनसेवक या ऐसे ही बहुतेरे विशेषणों से सुशोभित होता है। ग्राम पंचायत से संसद तक निर्वाचन की प्रक्रिया ही आधारभूत है। संविधान द्वारा निर्धारित मौलिक अर्हताओं को पूरा करके किसी भी एक पद के लिए दर्जनों उम्मीदवार … Read more

विश्व-हिंदीःनौकरानी है अब भी

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** आज ‘विश्व हिंदी दिवस’ है लेकिन क्या हिंदी को हम विश्व भाषा कह सकते हैं ? हाँ,यदि खुद को खुश करना चाहें या अपने मुँह मियां मिट्ठू बनना चाहें तो जरुर कह सकते हैं,क्योंकि यह दुनिया के लगभग पौने दो सौ विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है (इनमें भारत के भी … Read more

आधुनिक मानव के आदर्श प्रतिनिधि

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** स्वामी विवेकानन्द जयन्ती (१२ जनवरी)विशेष……………. स्वामी विवेकानन्द (जन्म-१२ जनवरी १८६३:मृत्यु- ४ जुलाई १९०२) वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् १८९३ में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। … Read more

हे भारत! जागो!

डॉ. प्रभु चौधरी उज्जैन(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* १२ जनवरी स्वामी विवेकानंद जयंती विशेष………….. कुछ लोग कह सकते हैं कि अब तो वेदान्त का यह ज्ञान सम्पूर्ण विश्व के सभी लोगों को पहले ही उपलब्ध हो चुका है। तो अब,भारत की भूमिका किस प्रकार की है ? संक्षेप में कहा जाए तो कोई पूछ सकता है,-“क्या भारत की … Read more

`मन की बात`:सीधी सच्ची बात

डॉ.एम.एल.गुप्ता ‘आदित्य’  मुम्बई (महाराष्ट्र) ********************************************************** नव-वर्ष और विश्व हिंदी दिवस……… `मन की बात` अपनों से न कहूँ तो किससे कहूँ ? शायद कुछ लोग मेरी बात से सहमत न हों,मुझसे रुष्ट हो जाएँ,भला-बुरा कहें। हो सकता है कि वे ही सही हों,पर मैं तो अपने मन की ही कह सकता हूँ। जो देखता हूँ,जो देख … Read more

उम्मीदों का गणतंत्र और झांकियों तक फैलता सियासत का जहर…

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** बीते साल की एक ‘उपलब्धि’ यह भी मान लें कि देश में सियासत का जहर अब झांकियों तक फैल गया है। इस बार २६ जनवरी की गणतंत्र दिवस परेड में ३ राज्यों की झांकियों को खारिज करने का मामला राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। ये झांकियां किन कारणों से खारिज … Read more

नया साल हर बुराई को मिटा जाए

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** जाने वाला साल हर बुराई को मिटा जाए,हर जख्म को हटा जाए,जाने वाले साल तुमको विदाई,आने वाले साल तुमको बधाई। नव वर्ष २०२० की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं और मंगलकामनाएं। आने वाला वर्ष नई उमंग,नए उत्साह और नए विश्वास की आशाओं के साथ नई सोच के साथ आए तथा प्रगति के … Read more

स्वस्थ रहने का संकल्प लें

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई इंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** सभी को पता है कि संकल्प लेने का मौसम आ गया है। प्रतिवर्ष नए वर्ष के आगमन पर हम सभी कोई ना कोई संकल्प लेते हैं। कोई नियमित रहने का संकल्प लेता है,कोई प्रतिदिन किताब पढ़ने का संकल्प लेता है,कोई प्रातः जल्दी उठने का संकल्प लेता है,कोई व्यसन को छोड़ने का … Read more

अंधेरों के बीच उजालों की खोज हो

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* एक वर्ष का विदा होना सिर्फ कैलेन्डर का बदल जाना भर नहीं है। छोटा ही सही,लेकिन यह हमारे जीवन का एक अहम पड़ाव तो होता ही है,जो हमें थोड़ा ठहरकर अपने बीते दिनों के आकलन और आने वाले दिनों की तैयारी का अवसर देता है। एक व्यक्ति की तरह एक समाज,एक … Read more