जीवन, शरीर और ब्रम्हाण्ड

कपिल देव अग्रवालबड़ौदा (गुजरात)************************************* उपस्थित प्रबुद्धजनों के भीतर की चेतना को मेरा नमन। युवावस्था में ही कुछ अतीन्द्रिय अनुभवों ने मेरी रूचि को आध्यात्म की ओर मोड़ दिया, जो आज तक कायम है। आध्यात्म जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया और इसे मैंने जाना व अनुभव किया। इसलिए आज आध्यात्म के प्रचारक की तरह … Read more

लोकसभा:नयी उम्मीदों को पंख

ललित गर्ग दिल्ली************************************** अठारहवीं लोकसभा का पहला सत्र शुरू चुका है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विपक्ष इस बार अपनी बढ़ी हुई शक्ति का अहसास कराते हुए आक्रामक होने से नहीं चूकेगा। यही वजह है कि, विपक्ष ने परीक्षा में गड़बड़ी, अग्निवीर व कार्यवाहक अध्यक्ष जैसे मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख दिखाने की रणनीति बनाई … Read more

मुझे ही कहना होगा-‘अहं ब्रह्मास्मि’

डॉ. मीना श्रीवास्तवठाणे (महाराष्ट्र)******************************************* कोहं से सोहं तक-भाग २… हिन्दू धर्म में इस प्रथम रुदन को बहुत अद्भुत माना गया है। अर्थात इसका कारण है, उसके चारों ओर छाया हुआ अध्यात्म का तेजोमण्डल! अब इस अद्भुत संकल्पना को जानने का प्रयत्न करेंगे।नवजात शिशु अपने रुदन द्वारा एक मूलभूत प्रश्न पूछता रहता है- ‘कोहं’ अर्थात “मैं … Read more

आत्मा और परमात्मा का मिलन ‘योग’ फायदेकारी

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** ‘योग’ का अर्थ आत्मा और परमात्मा का मिलन है। जीव का ब्रह्म से मिलन है। योग कई प्रकार के होते हैं। अष्टांग योग में कसरत, ध्यान, साधना, समाधि आदि कई क्रियाऍं शामिल हैं। 🔹ध्यान क्यों आवश्यक है ?-ध्यान क्यों आवश्यक है ?, इसे अपने संस्मरण द्वारा ही बताना चाहूँगी। अगस्त १९९५ में … Read more

एक यात्रा अनंत की ओर

डॉ. मीना श्रीवास्तवठाणे (महाराष्ट्र)******************************************* कोहं से सोहं तक… आइए, ईश्वर की खोज में ‘नेति-नेति’ करने का प्रयास करें। मैं कोई दार्शनिक नहीं, पर ईश्वर के अस्तित्व को हमेशा ही स्वीकारा है। उसे ढूँढा कभी एक अनाम शक्ति के स्वरूप में, तो कभी किसी सुन्दर मूर्ति में, परन्तु सोचती रही-कहाँ है वह ईश्वर, मंदिरों में, सुन्दर … Read more

पिता:प्रेरणा, प्रकाश और पुत्र के व्यक्तित्व की सुघड़ता

ललित गर्ग दिल्ली************************************** उनकी साँसों से मेरी खुशियाँ (पिता दिवस विशेष)… पिता एक ऐसा शब्द, जिसके बिना किसी के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक ऐसा पवित्र रिश्ता, जिसकी तुलना किसी और से नहीं हो सकती। बचपन में जब कोई बच्चा चलना सीखता है, तो सबसे पहले अपने पिता की उंगली थामता … Read more

योग करता निरोग

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (२१ जून) विशेष… “जो अपनाता योग को, रहता सदा निरोग।जीवन का आनंद ले, पाता जी-भर भोग॥”योग का उद्देश्य हमारे जीवन का समग्र विकास करना है। या इसे ऐसे कह सकते हैं कि, जीवन का सर्वांगीण विकास करना। सर्वांगीण विकास से तात्पर्य यहाँ शारीरिक, मानसिक, नैतिक, आध्यात्मिक व सामाजिक … Read more

ताकत व विश्वास का रिश्ता ‘पिता’

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ उनकी साँसों से मेरी खुशियाँ (पिता दिवस विशेष)… संघर्षों की आंधियों में हौंसलों की दीवार है पिता। जब हम हार जाते हैं, फिर कोई रास्ता नहीं दिखाई देता, तो ऐसे समय में मेरे लिए मेरे कन्धों पर जो हाथ होता है, वह पिता जी का ही होता है। वह गुस्से … Read more

वृद्धों की उपेक्षा सृसंस्कृत परिवार परम्परा पर काला दाग

ललित गर्ग दिल्ली************************************** विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस (१५ जून) विशेष… देश ही नहीं, दुनिया में वृद्धों के साथ दुर्व्यवहार, प्रताड़ना, हिंसा बढ़ती जा रही है, जो जीवन को नरक बनाए हुए है। बच्चे अपने माता-पिता के साथ बिल्कुल नहीं रहना चाहते। यही पीड़ा वृद्धजन को पल-पल की घुटन, तनाव एवं उपेक्षा से निकलकर वृद्धाश्रम … Read more

छायादार वृक्ष लगाने की प्रतिज्ञा करें, तभी जीवन सुखमयी

श्रीमती देवंती देवीधनबाद (झारखंड)******************************************* सब ‘धरा’ रह जाएगा (पर्यावरण दिवस विशेष)… श्री गुरुदेव का कहना है कि, माता-पिता तो जन्म देते हैं, पालन- पोषण करते हैं, और सभी जानते हैं कि भात, रोटी, दूध, मलाई, घी, शक्कर, नमक, जल, मेवा, मिष्ठान, फल खाकर बड़े हो गए, लेकिन इस पालन-पोषण के भीतर एक और भी अद्भुत … Read more