जी चाहता है

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** सहे जुल्म जिसने सदियों से अब तक, उनको उबारो,यह जी चाहता है। करते रहे आदिशक्ति की पूजा मगर मातृशक्ति कुंठित रही है। हुआ नहीं मान भूलकर भी, नारी आज भी व्याकुल विवश हो रही है। तड़पती तिरस्कृत है आज ममता, उसे अपनाने को जी चाहता है। दुर्गा लक्ष्मी अहिल्या सीता, … Read more

नारी तेरी अमर कहानी

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** जो समझो तो कविता हो, बूझो तो अमर कहानी हो। नारी तुम त्याग समर्पण, करती बलिदान जवानी हो। नारी!तुम श्रद्धा समर्पण जीवन, सृष्टि जीवन गढ़ती कहानी हो। आँचल में दूध आँखों में पानी, सृष्टि जीवन की तुम कहानी हो। नारी! तुम अब नहीं रही अबला, समानता युग की तुम … Read more

तू ही तू

सुषमा दुबे इंदौर(मध्यप्रदेश) ****************************************************** धीर है तू सत्य है तू खौलता उफान है, तू अर्चना आराधना तू भक्ति का वरदान है। प्रचंड तू अखंड भी तू ही शक्तिमान है, भैरवी कानुप्रिय तू विश्व का गुणगान है। रौद्र रूप रच सके तू ऐसा एक तूफान है, तू गंगा-सी पवित्र है समुद्र-सी विशाल है। तू रागिनी तू … Read more

ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति

प्रणिता राकेश सेठिया ‘परी’ रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************************************* ईश्वर ने बनाई ये विराट सृष्टि, जीवंत किया फिर ये संसार। सोचा-समझा फिर महसूस किया, कहाँ है इसमें निस्वार्थ प्यार…? अपने पाक उन्नत विचारों से बनाई, एक विशाल-सी हसीन क्यारी। निर्मित हो उठी एक मूरत और, फिर नाम रखा उसका नारी। जिस लय से कार्यरत है दिनभर, प्रकृति की … Read more

कन्हैया

रीता अरोड़ा ‘जय हिन्द हाथरसी’ दिल्ली(भारत) ************************************************************ श्याम ऐसे बसो मेरे मन में, कोई ढूँढ सके ना तुझे हममें। श्याम ऐसे बसो…॥ जैसे समुन्दर में मोती होते हैं, पर नज़र किसी को ना आते हैं। श्याम ऐसे बसो…॥ जैसे श्याम बसे मेरे मन में, पर नजर ना आते जन-जन में। श्याम ऐसे बसो…॥ जैसे दिलों … Read more

नारी

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* नारी प्रथम गुरु है सृष्टि उससे शुरू है, सृष्टा की आद्या सृष्टि है स्त्री का मान कीजिए। नारी देवी का है रूप नारी के हैं नाना रूप, वात्सल्य का सागर है इसे मान दीजिए। नारी जगत जननी नारी संताप हरणी, नारी सहनशीला है उसे मान दीजिये। नारी शक्ति नारी भक्ति … Read more

दार्शनिकता

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** दार्शनिक की दार्शनिकता से,दैत्य सारे जल रहे, गले ना उनकी दाल तो वे,इधर-उधर उछल रहे। दार्शनिक के दर्शन का,वे सामना ना कर सके, खड़ा होना तो दूर है,वे कदम ना आगे कर सके। जंगल में भी मंगल करे,दार्शनिक का यही काम है, बाधा चाहे कितनी रहें,वह चलता सदा अविराम है। … Read more

जब ज़मीर शरमाया मेरा

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ********************************************************************* कोई दो कदम तो साथ रहे मेरे भी, इस उम्मीद में खोजता रहा वह चेहरा। संग चलने को मेरे जो तैयार हुआ, वह फकत साथ था साया ही मेरा। रात को दस्तक दी,सपने में जिसने, दिन में वही शख्स था भुलाया मेरा। छोड़ के दामन मेरा,दूर हुआ मुझसे, वह था … Read more

सरस्वती वंदना

दीपेश पालीवाल ‘गूगल’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************** जय हो माँ शारदे माँ मेरी शारदे, हर ले मन के तिमिर को,मुझे ज्ञान दे…। कामना मेरी इतनी सी है मेरी माँ, सत्य को लिखकर सत्य पर चलता रहूँ। न मैं धन चाहूँ न और चाह भी नाम की, लेखनी हो मेरी राष्ट्र सम्मान की। जय हो माँ…॥ बन्ध … Read more

आँचल

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** रिपुता का चलता नहीं, उस पर कोई दाँव। माँ जिसके सिर पर करे, नित आँचल की छाँव॥ हो आँचल की रोशनी, बिन बाती बिन तेल। कवि के उर से फूटती, नव रचना की बेल॥ माँ देना आँचल सदा, मिले सदा ही जीत। नई कलम से मैं लिखूं, नये-नवेले गीत॥ माँ … Read more