अश्क

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* अश्क हैं बड़े अमूल्य, आंकें ना इनका मूल्य कहते हैं सब-कुछ व्यर्थ ना बहाइयेll करे ये दिल घायल, हो जाते सब कायल अश्क सिर्फ पानी नहीं अर्थ समझाइएll अंतर्मन का द्वंद् है, कवि का यह छंद है दिल तक ये जाता है इसको दिखाइएll सिंहासन हिल जाते, तूफानों से टकराते … Read more

वह सफाईवाली

सुरेश चन्द्र सर्वहारा कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** नई-नई ब्याहता वह सफाईवाली, घूँघट निकाले आई है करने सड़क की सफाई, सकुचाती शरमाती अपने में सिकुड़-सिकुड़ जाती, उठाती घरों से कचरा देख रही, वर्ग-भेद की गहरी खाई। कड़ी धूप में पड़ रही देह काली, सर्दी में हो उठी त्वचा रूखी-सूखी खुरदरी, बरसात में भीगकर चिपक गये हैं कपड़े तन … Read more

चाँद को जलाते हो

सलिल सरोज नौलागढ़ (बिहार) ******************************************************************** शाम ढले तुम छत पे क्यूँ आते हो, मुझे मालूम है चाँद को जलाते हो। तुमसे ही नहीं रौशन ये जहाँ सारा, मुस्कुराकर तुम उसे यह बताते हो। होंगे सितारे तुम्हारे हुस्न पर लट्टू, गिरा के दुपट्टा ये गुमाँ भी भुलाते हो। हुई पुरानी तुम्हारी अदाओं की तारीफें, रोककर सबकी … Read more

अब भी बचा लो जिंदगी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… मैं हूँ धरा संसार का, मुझमें समाहित सकल निर्झर सरित् पर्वत सप्त सागर, महदारण्य सें हूँ परिपूरित जीवन दातृ पालक सम्पोषिका, धरित्री ऊर्वरा शस्य श्यामला निज आँचल में समेटे चराचर, हूँ अनंत गह्वर दीर्घतर हूँ शान्ति ममता करुणापूरित, देव दानव मनुज इतरेतर भूतगण … Read more

हरियाली गुम हो चली

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… मौसम में है अब कहाँ,पहले जैसी बात। जाड़े में जाड़ा नहीं,गलत समय बरसात॥ मौसम तो बरसात का,किन्तु बरसते नैन। सूखी-सूखी ये धरा,पंछी भी बेचैनll आँखों में बादल नहीं,दिल के सूखे खेत। हरियाली गुम हो चली,दिखती केवल रेत॥ बादल के दल आ गये,ले दलदल का … Read more

हमारी धरणी

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… करोड़ों वर्षों पूर्व ब्रह्मांड उत्पन्न, गौरवशाली पल हमारी धरणी। सृष्टि का सुंदरतम् निर्माण, अदभुत हमारी है ये धरणी। विभिन्न लुभावने रूपों वाली, जीवनदीयिनी सदा है धऱणी। गर्भ में रखे अनमोल रत्न, जीविका देती है सदा धरणी। पालती जीव-जंतु,मानव को, पालनहार है हमारी धरणी। … Read more

श्री राम

दुर्गेश राव ‘विहंगम’  इंदौर(मध्यप्रदेश) ************************************************** जपो राम का नाम,न जीवन पुन: मिलेगा। भला करेंगे राम,पुष्प-सा प्राण खिलेगा। परम भक्त हनुमान,राम की गाथा गाते। मिलते प्रभु श्री राम,सुखी जीवन को पाते॥ परिचय-दुर्गेश राव का साहित्यिक उपनाम ‘विहंगम’ है।१९९३ में ५ जुलाई को मनासा (जिला नीमच, मध्यप्रदेश) के भाटखेड़ी बुजुर्ग में जन्मे दुर्गेश राव का वर्तमान निवास … Read more

कुछ तो कमी रहेगी

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ हर नामी में कुछ कमी तो रहेगी, आँखें थोड़ी-सी शर्माती रहेंगीl जिंदगी को आप कितना भी संवारिये, बिना हमारे कोई-न-कोई कमी तो रहेगीll खाली हाथ आप आये थे संसार में हज़ूर, खाली हाथ आप जायेंगे संसार से जरूरl संसार में रहकर,बातचीत न करके आप, कितनी चिल्लर संसार से बचाएंगे हजूरll कभी … Read more

तो क्या करूँ

निर्मल कुमार शर्मा  ‘निर्मल’ जयपुर (राजस्थान) ***************************************************** ये फ़ितरत में है मेरी,कि,अयाँ करता बयाँ हूँ मैं, अनानीयत,इसे समझे कोई,तो क्या करूँ फिर मैं। गालिब नहीं,ग़ाज़ी नहीं,ना गैर-मामूली हूँ मैं, इंसां हूँ,ना समझे कोई,तो क्या करूँ फिर मैं। करूँ पुरजोर और पुरजोश,बातें हक़ की सबके मैं, फ़क़त लस्सान,गर,समझे कोई,तो क्या करूँ फिर मैं। राहे-हक़ में ह़िफ़्ज़े मरातिब,रखता … Read more

मन भर सोना दान

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** मंदिर में करते बहुत,मन भर सोना दान। भूखा खातिर है नहीं, एक अदद पकवान।। भगवन तो खाते नहीं,उन्हें चढ़े पकवान। जिनको को रोटी चाहिए,उन्हें मिला अपमानll भगवन आदी हो गए,नित सुनने को शोर। मंदिर-मस्जिद है जहां,बजता भोंपू जोरll जो जग को नित चालते,देते हर सुख भोग। उनको मंदिर में … Read more