हम मन से खारे नहीं

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’ रोहतक (हरियाणा) ******************************************************* यूँ तो सागर हैं हम पर मन से खारे नहीं, मौजों में ही जीते हैं हम किनारे नहीं… अपने दिल को जलाकर रोशनी देते हैं, तुम्हारे पथ में पड़े हैं पर अंगारे नहीं। क्यों सवाल करते कितना प्यार है तुमसे, कहना बनता नहीं बस इजहार है तुमसे… नाप-तौल कभी … Read more

भारतीय

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** युद्ध नहीं है धर्म हमारा, हम तो शांति पुजारी हैं। छेड़ा अगर किसी ने तो, नहीं छोड़ने वाले हैंll चिंगारी को छेड़ोगे तो, बन ज्वाला मिटा देंगे। यदि हम से टकराओगे तो, टुकड़े-टुकड़े कर डालेंगेll अरे दुष्ट! तेरी यह हरकत, कभी सफल नहीं होगी। तेरी सारी गीदड़ चालें, डर-डर कर … Read more

झूठे सपने हैं सब

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** कहने को अपने हैं सब। मगर झूठे सपने हैं सब। मन मंदिर है मेरा अपना, विरोधी घंटे बजने हैं सब। पापों का हो रहा है नाश, एक-एक कर घटने हैं सब। शत्रु तैयार खड़े हैं सामने, शब्द बान से कटने हैं सब। संगठित हो मगर जानता हूँं, … Read more

नम्रता

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** अहम भावना शून्यता, है नम्रता प्रतीक… कठिन काम भी नम्रता, कर देती है ठीक। निराभिमान और नम्रता, देती पोषक तत्व… कायरता है ये नहीं, ये प्रतीक पुरूषत्व। परदे में यदि नम्रता, के पीछे है स्वार्थ… वहां नम्रता कपट को, ही करती चरितार्थ। संयम व्रत साधन नियम, सतत प्रयत्न कलाप… किन्तु … Read more

नफरतों को हटा दीजिए

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** पेड़ हर मोड़ पर इक लगा दीजिए। कुछ धरा का प्रदूषण घटा दीजिये। और कुछ खूबसूरत बना दीजिए। नफरतों को वतन से हटा दीजिए। बस चुके हैं नगर नफरतों के बहुत, बस्तियाँ प्यार की अब बसा दीजिए। अन्नदाता हमारे हैं मुफलिस बहुत, अब किसानों को पूरा नफा … Read more

नियति से हारा नहीं हूँ…

अनुपम आलोक उन्नाव(उत्तरप्रदेश) ****************************************************************** जलधि-सा उन्मुक्त मैं ! पर- चित्त से खारा नहीं हूँl चातकों-सी साधना है- नियति से हारा नहीं हूँll पीर! पर्वत बन भले ही- व्योम से कर ले मिताईl वेदना उमडे़,घुमड़ कर- श्वाँस से कर ले सगाईl पर न मानूँगा,करुँगा, कर्म का मैं यज्ञ पल-पल, जिंदगी भी रुठ करके- चाहे कर ले … Read more

सागर

मानकदास मानिकपुरी ‘ मानक छत्तीसगढ़िया’  महासमुंद(छत्तीसगढ़)  *********************************************************************** विशालता का द्योतक है सागर,बाकी अब मैं क्या कहूं, सहनशीलता का प्रेरक है सागर,इससे ज्यादा क्या कहूं। ओ तड़पते नदियों को देता है जगह सीने के अंदर, कमजोरों का पोषक है सागर,इससे ज्यादा क्या कहूंll जीवन निर्माण का संरक्षक है सागर,और मैं क्या कहूं, तूफान-उफ़ान का भक्षक है … Read more

शीतला माँँ

हेमलता पालीवाल ‘हेमा’ उदयपुर (राजस्थान ) *************************************************** तन शीतल हो, मन भी शीतल हो। शीतलता हो चहुँओर, माता तुम शीतल हो। स्वच्छता का देती संदेश, यही तुमने धरा है भेष। गंदगी तन-मन की हटे, दूर हो सारे रोग-द्वेष। घर-घर में तुम पूजित हो, दूध-दही,जल अर्पित हो। पूजे सारी सुहागिन भोर में, आशीष-वर तुम देती हो। … Read more

था भरोसा मगर सब धुंआ हो गया…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** था भरोसा मगर सब धुंआ हो गया। नाम जिसका वफ़ा बेवफा हो गया। सिर्फ मतदान करके जरा सोचिए, फर्ज क्या आपका है अदा हो गया। जिंदगी में खुशी की तमन्ना रही, क्यूँ गमों का मगर सिलसिला हो गया। वो विधायक बना जबसे है साथियों, ऐसे मिलता है जैसे खुदा … Read more

माँ की ममता

शैलश्री आलूर ‘श्लेषा’  बेंगलूरु (कर्नाटक राज्य) ************************************************** वृद्धाश्रम में मौत की राह देखती बैठी एक माँ के हाथ बेटे का खत मिला। पत्र सुंदर था खत का विषय कुछ ऐसा है- माँ कल एक तारीख है पिताजी की पेन्शन के रूपए आए होंगे। आ रहा हूँ दो -तीन दिन मेें उन रूपयों को लेने, जानती … Read more