बहुत कानून, पर कहाँ सुकून ?
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)…. मजदूरों की ज़िंदगी, दीन-दुखी मजबूर।अविरत श्रमजीवी पथिक, मेहनतकश मजदूर॥ मजदूरों के वास्ते, बने बहुत कानून।किन्तु धरातल पर कहाँ, मिलते कहाँ सुकून॥ माटी में दिन ढल गया, तन पर छाया स्वेद।श्रम की रोटी सेककर, जीवन में बस खेद॥ नित … Read more