एकल उपयोगी प्लास्टिक: प्रतिबंध का पालन आवश्यक

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* सुनने में बेहद ही प्रिय, सामाजिक व राष्ट्रीय दृष्टि से उत्तम प्रयास है। पहले ‘अच्छा है, अच्छा है, गुणों से भरपूर है, जल्दी टूटता नहीं, हल्का होने के कारण इधर से उधर ले जाने में आसानी, बारिश में वस्तु भीगने नहीं देता, इससे वस्तुएं बनी कम खर्च व ऊर्जा से बनाने … Read more

जनभाषा के संघर्ष को समर्थन देना होगा

जनभाषा में न्याय… ◾डाॅ. करुणाशंकर उपाध्याय (मुंबई, महाराष्ट्र ) हिंदी और भारतीय भाषाओं में न्याय की मांग मनुष्यता का तकाजा है। इस देश में ८२ फीसदी लोग हिंदी और ९८ फीसदी से अधिक लोग भारतीय भाषाओं का प्रयोग करते हैं। यदि हमारे सभी उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय हिंदी और भारतीय भाषाओं में बहस की … Read more

‘नकारात्मकता’ नहीं, सकारात्मक बातों से प्रभावित हों

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** आज के समय में हर दूसरा व्यक्ति ना जाने कितनी बातों से परेशान है और परेशानियों के चलते नकारात्मक सोच का शिकार बन जाता है। हालत ऐसी है कि, यदि एक राह चलते हुए व्यक्ति से पूछ लिया जाए कि वो किसी बात से परेशान है तो वो अपनी बहुत-सी परेशानियाँ बताने लगेगा। … Read more

महाराष्ट्र के कुछ महासबक

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* महाराष्ट्र की राजनीति भारत के लिए कुछ महासबक दे रही है। सबसे पहला सबक तो यही है कि परिवारवाद की राजनीति पर जो पार्टी टिकी हुई है, वह खुद और भारतीय लोकतंत्र के लिए भी खतरा है। खुद के लिए वह खतरा है, यह उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने सिद्ध कर दिया … Read more

सिद्धान्तवादी ‘भारत रत्न’ गुलजारी लाल नन्दा

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** योजना, सिंचाई एवं उर्जा मन्त्रालय के अलावा गृहमंत्री, श्रम एवं रोजगार मन्त्री, फिर रेल मंत्री के अलावा २ बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे सिद्धान्तवादी, मितव्ययी ‘भारत रत्न’ गुलजारी लाल नन्दा को कुरुक्षेत्र को भारत के पर्यटन स्थल पर स्थापित करवाने के लिए हमेशा श्रद्धापूर्वक याद किया जाएगा। इनके अथक प्रयास से देश … Read more

न्यायतंत्र की भाषा और हिंदी

लीना मेहेंदलेपूना (महाराष्ट्र)******************************************** एक सशक्त न्यायिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है कि “न्याय केवल किया ही नहीं जाना चाहिए, परंतु न्याय होता हुआ दिखना भी चाहिए।” भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अनेक निर्णयों में इसका उल्लेख किया है कि, न्याय ‘पूर्ण’ हुआ यह तभी माना जा सकता है जब न्याय से प्रभावित व्यक्ति को … Read more

सम्मानपूर्ण जीवन का अवसर दें हर कल्याणी को

ललित गर्गदिल्ली ************************************** किसी भी समाज में वैवाहिक जीवन साथी विशेषतः पति की मृत्यु हो जाने के बाद पत्नी की हालत काफी चिंताजनक हो जाती हैं। एक शादीशुदा महिला ने जो सपने शादी से पहले अपनी आने वाली जिंदगी के लिए देखे होते हैं, वो सब टूट जाते हैं। यही नहीं, आज भी हमारा समाज … Read more

तन्हाई से उबारता है संगीत

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’अलवर(राजस्थान)*********************************************** संगीत की दुनिया भी एक अजीब दुनिया है। लोगों के दिल और दिमाग को तरोताजा करने वाली दुनिया। जो लोग अपने-आपको तन्हा महसूस करते हैं, उनको संगीत सुनना चाहिए। रास्ते में अकेला चलने वाले व्यक्ति का साथी संगीत ही होता है। वो गुनगुनाते हुए कब मंजिल पर पहुंच जाता है, पता ही … Read more

नशा निरोध की सख्त आवश्यकता

सुरेन्द्र सिंह राजपूत हमसफ़रदेवास (मध्यप्रदेश)****************************************** नशा निरोध की आवश्यकता बहुत ही समाज उपयोगी है। हमारे बुज़ुर्ग कहा करते हैं कि “नशा नाश की जड़ है” बात बिल्कुल सच्ची है। कोई भी व्यक्ति शुरू में शौक के तौर पर नशे का सेवन करता है, फिर वह धीरे-धीरे बढ़कर आदत बन जाता है। जब वह आदत बना कि … Read more

‘पिता’ जीवन-निर्माता भी

ललित गर्गदिल्ली ************************************** जून महीने के तीसरे रविवार को ‘अंतर्राष्ट्रीय पिता दिवस’ यानी फादर्स डे मनाया जाता है। पिता दिवस की शुरुआत बीसवीं सदी के प्रारंभ में पिताधर्म तथा पुरुषों द्वारा परवरिश का सम्मान करने के लिए मातृ-दिवस के पूरक उत्सव के रूप में हुई। यह हमारे पूर्वजों की स्मृति और उनके सम्मान में भी … Read more