नाक में दम करती मंहगाई

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* मँहगाई यदि इसी तरह बढ़ती रही तो देश में अराजकता भी फैल सकती है। ताजा सरकारी आँकड़ों के मुताबिक इस समय थोक चीजों के दाम में १५.०८ प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई है। इतनी मँहगाई ३१ साल बाद बढ़ी है। इन तीन दशकों में मँहगाई जब थोड़ी-सी भी बढ़ती दिखाई देती थी … Read more

मोटापा कम करने का सही उपाय

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** जागरूकता… आयुर्वेद में ऐसे कई उपाय हैं, जो वजन कम करने के मामले में सभी लोगों के लिए सामान रूप से काम करते हैं। वजन बढ़ना आजकल की सबसे बड़ी समस्या बन गया है। बढ़ता मोटापा न केवल आपकी सुंदरता को कम करता है, बल्कि मधुमेह और उच्च तनाव जैसी गंभीर बीमारियों का … Read more

रामायण:स्त्री पात्र और उद्देश्य

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** कैकेयी…रामायण का एक ऐसा पात्र, जिससे सभी नफरत करते हैं। कोई अपनी पुत्री का नाम कैकेयी नाम पर नहीं रखना चाहता। कैकेयी…जो बेहद बुद्धिमान थी…युद्ध कला में निपुण थी…राम को अपने पुत्र से अधिक प्यार करती थी। राम में उसकी जान बसती थी। फिर ऐसा क्या हुआ कि उसने राज्याभिषेक वाले दिन … Read more

कुशल राष्ट्र शिल्पी थे वीर सावरकर

ललित गर्गदिल्ली ************************************** जयंती २८ मई विशेष…. अखण्ड भारत का स्वप्न देखने एवं उसे आकार देने वालों में प्रखर राष्ट्रवादी नेता विनायक दामोदर सावरकर का योगदान अनूठा एवं अविस्मरणीय है। आज नया भारत बनाने, भारत को नए सन्दर्भों के साथ संगठित करने, राष्ट्रीय एकता को बल देने की चर्चाओं के बीच भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के … Read more

जो आज घटित, वही कल का इतिहास और भविष्य भी

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* कहते हैं कि यदि शीर्षक प्रिय हो तो रचना का मुकुट बन जाता है, वह रचना के सारे रस को अपने में समेट मणि-सी चमक से अपनी ओर खींच लेता है। ‘मन का मौसम’ रचनाकारों की अलग-अलग पैनी दृष्टि से गुज़रते हुए रीतिकालीन कवि विद्यापति की बिहारी की सतसई बन श्रृंगाकिक … Read more

भारत का टटपूंजिया विपक्ष, निंदा के अलावा कुछ नहीं

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* राहुल गांधी ने लंदन जाकर भारत की राजनीति, सरकार, संघवाद, विदेश मंत्रालय आदि के बारे में जो बातें कहीं, वे नई नहीं हैं लेकिन सवाल यह है कि उन्हें विदेशों में जाकर क्या यह सब बोलना चाहिए ? भारत में रहते हुए वे सरकार की निंदा करें, यह बात तो समझ में … Read more

जल-संकट:व्यापक हित में विवेक से निर्णय आवश्यक

ललित गर्गदिल्ली ************************************** पिछले कई दिनों से गंभीर जल संकट से दिल्ली की जनता परेशान है। पानी की कमी से जूझ रहे लोग बूंद-बूंद पानी इकट्ठा कर रहे हैं और अपने पानी के डिब्बों को जंजीर से बांधकर रख रहे हैं। यह चिंताजनक इसलिए है कि अगर ऐसे ही हालात बने रहे तो यह संकट … Read more

बात कीजिए, संवाद साधिए

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** निरंतर संवाद एक मनोवैज्ञानिक चिकित्सा के समान है, जो लोगों को अकेलेपन और नैराश्य से दूर रखता है। संवाद मानसिक संबल प्रदान करने के साथ-साथ सुरक्षा भी प्रदान करता है। इससे समाज में होने वाली कई दु:खद घटनाओं को रोका जा सकता है।कुछ समय पहले सामाजिक संचार माध्यम पर एक चल-चित्र … Read more

कांग्रेस:बहुसंख्यक मतदाता को फिर जोड़ने की असल चुनौती

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के ‘नवसंकल्प चिंतन शिविर’ में दल के बुनियादी मसलों और चुनौतियों से निपटने को लेकर ठोस निष्कर्ष भले न निकला हो, लेकिन यह संदेश देने की कोशिश जरूर की है कि कांग्रेस जिन अंतर्विरोधों से गुजर रही है, उन्हें गंभीरता से लेने का वक्त आ … Read more

समकालीन सद्भावना और मानवता में फंसा लेखक

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* आज का विषय बेहद ही रोचकता से भरपूर है। गोष्ठी में जब महोदया ने कहा, -“सद्भावना युक्त भावना से अपने विचार बिन्दु प्रेषित कीजिए। हमें सद्भावना और मानवता का जागरण के लिए ही साहित्य सेवा में कार्य करना है। प्रेम और खुशी को बाटँना है।”लेखक होने के नाते स्वयं को किसी … Read more