चेतना को विकसित करने की प्रक्रिया ‘योग’

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)********************************************* २१ जून विश्व योग दिवस विशेष…. जिस भी जीव को शरीर मिला है,उसको स्वस्थ्य बनाने के लिए कुछ न कुछ शारीरिक मानसिक क्रियाएं करना पड़ती हैं और क्रियाहीन जीवन मृत हो जाता है। सब जानवर,पशु-पक्षी अपनी विशेष क्रियाएं करते हैं,यह उनमें नैसर्गिक गुण होता है। मानव में मन विशेष होने और बहुत चंचल … Read more

प्रेम

नमिता घोषबिलासपुर (छत्तीसगढ़)**************************************** विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. प्रेम क्या है ? महज एक रिश्ता स्त्री पुरुष का या व्यापक अर्थों में एक जीव का दूसरे जीव से। एक स्वाभाविक अभिव्यक्ति,फिर चाहे वह मनुष्य का हो या प्राणी जगत के किसी भी प्राणी मात्र से हो।अरस्तु जैसे दार्शनिक ने कहा-मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है,उसी सामाजिकता … Read more

अलौकिक स्नेह

दिपाली अरुण गुंडमुंबई(महाराष्ट्र)***************************** विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. ‘ प्रेम,सौहार्द्र ’ यह भावना ही अपने- आपमें मनुष्य को खुश तथा उल्लासित करने वाली है। मनुष्य का मनुष्य से अपनेपन का संबंध तो हम समझ सकते हैं। कुछ लोग मनुष्य के साथ-साथ अपने इर्द-गिर्द रहने वाले प्राणियों से भी सहानुभूति-प्रेम का रिश्ता जोड़ते हैं। आइए,इस कहानी … Read more

वीरता,दृढ़ता का दूजा नाम ‘झाँसी की रानी’

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस विशेष…. रानी लक्ष्मीबाई (जन्म-१९ नवम्बर १८२८, मृत्यु-१८ जून १८५८) मराठा शासित झाँसी राज्य की रानी और १८५७ की राज्य क्रान्ति की द्वितीय शहीद वीरांगना थीं। उन्होंने सिर्फ २९ वर्ष की उम्र में अंग्रेज साम्राज्य की सेना से युद्ध किया और वीरगति को प्राप्त हुईं। बताया जाता है कि ये सिर … Read more

समझ नहीं आता… सोच को क्या हो गया!

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** एक तरफ हम कहते हैं कि लड़कियों को पढ़ाओ,और पढ़ाना भी चाहिए क्योंकि एक लड़की को पढ़ाने का मतलब है,पूरे परिवार को पढ़ाना, मगर जो हालात बने हुए हैं,वो देखते हुए हर माँ-बाप बुरी तरह से डर के साए में जीता है। जब तक बिटिया घर न आ जाए,दिल अनगिनत आशंकाओं से … Read more

भयावह है कोरोना की युगांतकारी जीवनशैली

ललित गर्गदिल्ली ************************************** ‘कोरोना’ महामारी की दूसरी लहर ने भारी तबाही मचाई,अधिकांश परिवारों को संक्रमित किया,लम्बे समय तक जीवन ठहरा रहा,अनेक बंदिशों के बीच लोग घरों में कैद रहे,अब देश के अनेक भागों में जनजीवन फिर से चलने लगा है। कोरोना विषाणु के कारण आत्मकेन्द्रित सत्ताओं एवं जीवनशैली के उदय होने की स्थितियों को आकार … Read more

कोरोनाःऊटपटांग सर्वेक्षण से भारत की बदनामी

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* ‘न्यूयार्क टाइम्स’ अखबार ऐसी बेसिर-पैर की खबर छाप सकता है,इसका विश्वास नहीं होता। उसमें १२ विशेषज्ञों के हवाले से यह छापा गया है कि भारत में पिछले सालभर में ‘कोरोना’ से लगभग ४२ लाख लोगों की मौत हुई है और ७० करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित या बीमार हुए हैं। क्या भारत … Read more

समय का सदुपयोग करें

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** ‘समय का सदुपयोग’ नामक इस शब्द से तात्पर्य है-समय की महत्ता को समझते हुए अपने जीवन के हर क्षेत्र में समय का कुशलता पूर्वक प्रयोग करना।समय एक ऐसी चीज है,जो किसी भी स्थिति में अपने निरंतरता में बाध्यता नहीं आने देती है। यह हर पल चलती ही रहती है। हम मानव के जीवन … Read more

आरक्षण:व्यवस्था में परिवर्तन आवश्यक

रोहित मिश्रप्रयागराज(उत्तरप्रदेश)*********************************** क्या आरक्षण का लाभ सभी वंचितों को मिल रहा है ? इसका जवाब होगा-नहीं,तो इसके लिए अनारक्षित वर्ग जिम्मेदार है ? वो क्यों होगा ? उसका आरक्षण से क्या लेना-देना है ?आरक्षण के निर्माण का उद्देश्य वंचित, शोषित, पिछड़े वर्ग को मुख्यधारा में लाना था,पर आज आरक्षित वर्ग के समुदाय के लोग अज्ञानता … Read more

‘मैं तो राम बनूँगा…’

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** यादों का झरोखा….. कितना प्यारा लगता है ना अपना बचपन याद करना। वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी…धागे से बाँधकर कागज़ की नाव को तैराना…पहलदूज खेलना,रस्सी कूदना, गिट्टे और स्टापू खेलना,छुपम-छुपाई,लंगड़ी टांग…।जिस दिन इकन्नी मिल जाती थी,उस दिन तो हम अपने-आपको शहंशाह समझते थे। उस इकन्नी में एक सप्ताह तक … Read more