चीनी-भारतीय सैनिक लौट रहे ?

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)*********************************************** सैनिक गए नहीं थे,पर वापिस लौट रहे हैं। कभी-कभी बहुत सी चीज़ों में रहस्य छुपा रहता है,जैसे किसी से पूछो-आपने झूठ बोलना बंद कर दिया ? इसका उत्तर क्या हो सकता है ? ऐसी ही स्थिति भारत और चीन की है। यानी दोनों देशों में युद्ध नहीं हुआ, यानी कोई किसी की सीमा … Read more

देवभूमि को सुरक्षित रखना जरूरत

प्रियंका सौरभहिसार(हरियाणा) ************************************ उत्तराखंड हिमालय देवभूमि के रूप में उभरा है और हिंदू तीर्थयात्रा के केन्द्र के रुप में विकसित हुआ है,मगर प्राकृतिक आपदाएं इसको विनाशक बना रही है। पिछले एक दशक में हाल की पारिस्थितिक नाजुकताओं को देखते हुए लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ धरोहर स्थलों को सुरक्षित रखने के लिए दीर्घकालिक संकट प्रतिक्रिया … Read more

शीर्षक और आभार सूची अब दिखेंगे फ़िल्म की ही भाषा में

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)**************************************************** सफलता……… जब भी मैं कोई फिल्म देखता हूँ तो मुझे यह देख कर अत्यंत क्षोभ होता है कि फिल्म हिंदी की हो या किसी अन्य भारतीय भाषा की,फिल्म का नाम और कलाकारों के नाम आदि विवरण केवल अंग्रेजी में ही होता था। हिंदी में यह प्रवृत्ति सर्वाधिक है। जो आदमी मराठी,हिंदी … Read more

निजता कानून से मिलेगी बात छिपाने की आजादी

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* पिछले तीन-चार सौ साल से दुनिया में एक बड़ी लड़ाई चल रही है। उसका नाम है,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता। ब्रिटेन,यूरोप,अमेरिका और भारत-जैसे कई देशों में तो यह नागरिकों को उपलब्ध हो गई है लेकिन आज भी चीन,रूस और कुछ अफ्रीकी और अरब देशों में इसके लिए लड़ाइयाँ जारी हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता क्या … Read more

‘मुक्तिबोध’ का काव्य संसार और आलोचना के मापदण्ड

डॉ. दयानंद तिवारीमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ कार्लमार्क्स की साम्यवादी विचारधारा ही मार्क्सवादी विचारधारा कहलाई। वे एक वैज्ञानिक समाजवादी विचारक थे। वे यथार्थ पर आधारित समाजवादी विचारक के रूप में जाने जाते हैं। सामाजिक राजनीतिक दर्शन में मार्क्सवाद उत्पादन के साधनों पर सामाजिक स्वामित्व द्वारा वर्गविहीन समाज की स्थापना के संकल्प की साम्यवादी विचारधारा है। मूलतः मार्क्सवाद उन … Read more

सामाजिक चुनौतियों का सामना किए बिना उत्थान संभव नहीं

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* ‘राह पथरीली बहुत थी,फिर भी हम चलते रहेमन में मंज़िल के लिए,अरमां सदा पलते रहे।’सामाजिक समस्याओं के अध्ययन में सामाजिक विचारकों का ध्यान सहज रूप से इसलिए आकर्षित होता है,क्योंकि सामाजिक समस्याएँ सामाजिक जीवन का अविभाज्य अंग हैं। मानव समाज न तो कभी सामाजिक समस्याओं से पूर्ण मुक्त रहा है,न … Read more

यह ऋतु मस्तानी

सुखवीन कंधारीनवीं मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************** ‘बसंत पंचमी’ को हिंदी के प्रसिद्ध कविवर ‘सेनापति’ की इन पंक्तियों के साथ सांझा करना चाहती हूँ-‘चहकि चकोर उठे,करि-करि जोर उठे।टेर उठी सारिका,विनोद उपजावने।चटकि गुलाब उठे,लटकि सरोज पूंज।खटकि भराल रितुराज सुनि आवे॥’भारत एक महान देश है। इसकी प्राकृतिक शोभा निराली है। पूरे संसार में छः ऋतुओं की सुंदरता संसार के किसी … Read more

हर कर्तव्य का बोध होना आवश्यक

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ********************************************** बोध होना अति उत्तम है,परंतु बोध क्या होना चाहिए ? वह सृष्टि की संरचनाकर्ता अर्थात ईश्वर के उपरांत सभ्य समाज को गहनता से विचार करते हुए अज्ञानियों को विस्तारपूर्वक समझाना चाहिए।विशेषकर माँ-बाप को अपनी संतान के प्रति जागरूक होने का बोध होना चाहिए। माँ की ममता और बाप … Read more

समृद्धि और प्रेम का प्रतीक ‘वसंत पंचमी’

डॉ.अर्चना मिश्रा शुक्लाकानपुर (उत्तरप्रदेश)************************* वसंत पंचमी स्पर्धा विशेष ….. उल्लास के पर्व वसंत पंचमी की परम्परा, इसके लालित्य एवं मनमोहक,उत्साहपूर्ण वातावरण का चित्रण तुलसी कृत ‘रामचरित मानस’ की चौपाई में देखिए-‘नौमी तिथि मधुमास पुनीता।सकल पुच्छ अभिजित हरिप्रीता॥मध्य दिवस अति सीत न घामा।पावन काल लोक विश्रामा॥सीतल मंद सुरभि बह बाऊ।बन कुसुमित गिरिगन मनिआरा॥’भगवान राम का जन्म … Read more

ज्ञान की देवी सरस्वती माता

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *************************************** वसंत पंचमी स्पर्धा विशेष ….. ‘वसंत पंचमी’ सरस्वती जी के अवतरण का दिवस है। सरस्वती माँ विद्या-बुद्धि एवं वाक् प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की अधिष्ठात्री देवी भी हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है कि,प्रणो देवी सरस्वती परम चेतना … Read more