किसानों के फायदे का कानून,पर विचार जरुरी

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************** किसानों से संबंधित ३ कानूनों के बनने से केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत बादल इतनी नाराज हुईं कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया। वे अकाली दल की सदस्य हैं और पंजाब से सांसद हैं। पंजाब किसानों का गढ़ है। देश में सबसे ज्यादा फसल वहीं उगती है। कुछ पंजाबी किसान संगठनों ने इन) कानूनों को … Read more

मास्साब

अंशु प्रजापतिपौड़ी गढ़वाल(उत्तराखण्ड)********************************************************* आज फ़िर वैसी ही ओलावृष्टि है,वही असमय की वर्षा,परंतु आज मन उतना प्रफुल्लित नहीं है। १ माह से अधिक हुआ,मैंने पिता जी को खो दिया है। ऐसे में दो शब्द मेरे मस्तिष्क में रह-रहकर गूंज रहे हैं राम-राम सा…lयही प्रथम परिचय था मेरा उनसे। आज से लगभग १७ वर्ष पूर्व जब मेरी … Read more

हिंदी के बढ़ते चरण

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************************* हिंदी का यशगान हो,हिंदी का सम्मान। हिंदी का गुणगान हो,हिंदी का उत्थानll१४ सितम्बर १९४९ को संविधान सभा ने एकमत से हिंदी को राजभाषा का दर्जा देने का निर्णय लिया और सन १९५० में सविधान के अनुच्छेद ३४३ (१) द्वारा हिंदी की देवनागरी लिपि को राजभाषा का दर्जा दिया गयाl हिंदी … Read more

विश्व शान्ति दिवस-बढ़ते कदम

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)******************************************************** विश्व शांति दिवस स्पर्धा विशेष…… विश्व शान्ति दिवस या अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति दिवस संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्देशानुसार हर वर्ष मनाया जाता है। भारत एक संघर्ष-निवारक,शान्तिप्रिय देश है। सर्वकल्याण की भावना इसके कार्य-कलापों में निहित है।ऊँ सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:। सर्वे भद्राणि पयन्तु मा कचित्दु:खभाग भवेद्llअर्थात्,-“सभी सुखी हों,सभी … Read more

विश्व शांति की स्थापना में चरित्र निर्माण की महती भूमिका

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)********************************************************* विश्व शांति दिवस स्पर्धा विशेष……        कोलकाता की पावन भूमि पर जन्मे बांग्ला भाषा के विश्वविख्यात कवि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने एक ऐसे विश्व की कल्पना की थी,जहाँ मनुष्य का मस्तिष्क भयमुक्त हो और सर सदैव ऊँचा रहे। उनकी सुप्रसिद्ध पुस्तक `गीतांजलि` की यह प्रथम रचना है, वे लिखते हैं-`व्हेयर द माइंड इज … Read more

नई शिक्षा नीति के चक्रव्यूह में हिन्दी

प्रो. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल)****************************************** चकित हूँ यह देखकर कि,राष्ट्रीय शिक्षा नीति-२०२० में संघ की राजभाषा या राष्ट्रभाषा का कहीं कोई जिक्र तक नहीं है। पिछली सरकारों द्वारा हिन्दी की लगातार की जा रही उपेक्षा के बावजूद २०११ की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार आज भी देश की ५३ करोड़ आबादी हिन्दी भाषी है,दूसरी ओर अंग्रेजी बोलने … Read more

हिंदी दिवस:अंग्रेजी मिटाओ नहीं,सिर्फ हटाओ

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************** भारत सरकार को हिंदी दिवस मनाते-मनाते ७० साल हो गए लेकिन कोई हमें बताए कि सरकारी काम-काज या जन-जीवन में हिंदी क्या एक कदम भी आगे बढ़ी ? इसका मूल कारण यह है कि हमारे नेता नौकरशाहों के नौकर हैं। वे दावा करते हैं कि वे जनता के नौकर हैं। चुनावों के … Read more

हिन्दी जन-जन की भाषा,पर राष्ट्रभाषा कब ?

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’बहादुरगढ़(हरियाणा)********************************************************* हिंदी दिवस विशेष….. हम भारतवासी ‘हिंदी दिवस’ एक औपचारिकता के रूप में कब तक मनाते रहेंगे ? कब हिंदी इस आडम्बर से मुक्त होगी। कब राजभाषा से राष्ट्रभाषा बनेगी,जन-जन की भाषा घर-घर तक कब घर करेगी। हिंदी के प्रति आम लोगों में जनचेतना जागृत करने के लिए सरल सुबोध हिंदी में विशाल … Read more

उजला किरदार

अरशद रसूलबदायूं (उत्तरप्रदेश)**************************************************** डॉ. अमीन का नाम बस्ती में बेहद अदबो- एहतराम के साथ लिया जाता है। २ साल पहले ही तो डॉ. साहब ने कस्बे में आकर क्लीनिक खोला था। उनके यहां दिनभर अच्छी बातें होती रहती थीं। नौजवानों को भलाई की बातें भी बताया करते थे। कस्बे में गमी-खुशी,कुछ भी हो डॉ. साहब … Read more

धीरे-धीरे भारतीयता भी छीन रही अंग्रेजी

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)********************************************************* हिंदी दिवस विशेष….. नई शिक्षा प्रणाली ने मातृभाषा की आशाएँ जगा दी हैं। उसे महसूस होने लगा है कि अच्छा समय आ रहा है। शताब्दियों से निराश और कुंठित मातृभाषा अपने बच्चों को दोराहे पर खड़ा देख कर प्रतीक्षा कर रही है कि वे सही रास्ते पर कदम रखें। उनके सामने दो रास्ते … Read more