काज यह विद्वानों का
संदीप धीमान चमोली (उत्तराखंड)********************************** एक बाह्य,एक भीतरद्वंद यहां इंसानों का,भीतर से जो दो करेकाज वह विद्वानों का। संत संतुष्टि हो द्रष्टिगतयुद्ध लड़े हो व्यक्तिगत,अंतर्मन द्वंद हो भारी‘मैं’ से ‘मैं’ तक उत्थानों का। मुख मण्डल हो गोचरविजय पताका ले चला,ललाट ले आभा शोभितनाश कर अभिमानों का। ले मौन चित्त,हो गौन खुदअंतर्मन को करता शुद्ध,तर्क वितर्क खुद से … Read more