गीत खुशी के गाएंगे

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** रचनाशिल्प:मात्रा भार-३०- यति-१६,१४-पदांत-२२२…. गीत खुशी के गाएंगे हम,मिलकर साथ निभाएंगे।जन-मन को अभिनंदन करके,सबको साथ मिलाएंगे॥ आज खुशी के अवसर पर सब,मिलजुल कर के गाएंगे।एक-दूसरे का सुख-दु:ख हम,आपस कहते जाएंगे॥बाँटेंगे यह प्रेम परस्पर,खुशी के फूल खिलाएंगे।जन-मन को अभिनंदन करके,सबको साथ मिलाएंगे॥ गीत खुशी के गाएंगे हम,मिलकर साथ निभाएंगे।जन-मन को अभिनंदन करके,सबको साथ … Read more

‘जीवनदात्री’ कहलाती है सिर्फ़ स्त्री…

डॉ. आशा मिश्रा ‘आस’मुंबई (महाराष्ट्र)******************************************* स्त्री तुम महान हो,सब गुणों की खान होमाँ की ममता हो,बेटी की निश्छलता होपत्नी का प्यार हो,बहन का दुलार होमुसीबत में बलवान हो,होंठों की मुस्कान होईश्वर का वरदान हो,स्त्री तुम महान हो। जीवन का आधार हो,देती नया मुक़ाम होघर का अभिमान हो,सुख की ठंडी छाँव होअन्नपूर्णा का रूप हो,दुर्गा-काली का … Read more

मीरा की भक्ति

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *************************************** थी दीवानी श्याम की,मीरा जिसका नाम।जो युग-युग को बन गई,हियकर अरु अभिराम॥ पिया हलाहल,पर अमर,पाया इक वरदान।श्रद्धा से तो मिल गई,जीवन को नव आन॥ लोक लाज को तज हुई,मीरा भक्तिन रूप।खिली हृदय पावन-मधुर,मीठी-मोहक धूप॥ मीरा खोई श्याम में,श्याम बने मनमीत।नहीं हरा पाया उसे,मीरा पाई जीत॥ इकतारा लेकर सजी,मीरा मंदिर ख़ूब।नाची,गाई,मस्त … Read more

कुछ टूट रहा है परिवारों में

तारा प्रजापत ‘प्रीत’रातानाड़ा(राजस्थान) ****************************************** बंट रहे हैं आजकल रिश्तेस्वार्थ की दीवारों में,ऐसा लगता है जैसे कि-शायदकुछ टूट रहा है परिवारों में। नहीं रहा वो अपनापनरिश्तों में रहती अनबन,झांक रही हैं संवेदनहीनताघर में आई दरारों में,लगता है ऐसा जैसे कि-शायदकुछ टूट रहा है परिवारों में। कड़ी मेहनत से घर बनायाप्यार से फिर इसे सजाया,ईंट-ईंट बंट गईबच्चों के … Read more

बचपन फिर से जी लेते हैं

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* बचपन की तरह दोस्त,आज बारिश में भीगते हैंपानी से भरी गलियों में,दौड़ लगा बाजी जीतते हैं।तू जहाज़ बना मैं नाव,कौन दूर तलक जाता हैचल आज कुछ करें हम,पानी में तैरा कर देखते हैं।अंजुरी में पानी भरकर,इक-दूजे को गुदगुदाते हैंहाथों में हाथ डाल कर,गलियाँ नाप कर आते हैं।तेरा अँखियों से ही … Read more

बन विधाता बैठा हर आदमी

आचार्य गोपाल जी ‘आजाद अकेला बरबीघा वाले’शेखपुरा(बिहार)********************************************* ‘आजाद’ आज ऐसा क्यों हो गया है आदमी,दूर अपनों से भला क्यों हो गया है आदमी। चाहतें अपनी अपना बनाने के खातिर यहां,अपनों को ही हर वक्त छलता रहा क्यों आदमी। रंग गिरगिट सम सदा बदलता रहा है आदमी,बन रहा खु़द-ब-खु़द ही भला हर हमेशा आदमी। झूठे वादे … Read more

अभिनय की पूरी संस्था थे दिलीप कुमार-प्रो. खरे

मंडला(मप्र)। दिलीप कुमार अभिनय सम्राट थे,अभिनय की पूरी संस्था थे। आने वाले अनेक अभिनेताओं ने उन्हें अपना आदर्श मानकर अपना करियर प्रारम्भ किया,और दिलीप साब से बहुत कुछ सीखा।यह बात मंडला(मध्यप्रदेश) के सुपरिचित कवि,लेखक प्रो.शरद नारायण खरे ने वक्ता के रूप में कही। अवसर रहा दिवंगत महान कलाकार दिलीप कुमार को आदरांजली देने का। युवा … Read more

माता रानी

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)******************************************* माता रानी अंबिके,कर देना शुभ काज।आए तेरे द्वार पर,रखना सबकी लाज॥रखना सबकी लाज,शरण में आज तिहारे।देखो हाहाकार,मचा है देश हमारे॥कहे ‘विनायक’ राज,करें क्या समझ न आता।तुमसे हैं अब आस,बचा लो जग को माता॥ कहना मेरा मान लो,हे जगजननी मात।जोत जलाऊँ आपकी,नव दिन अरु नवरात॥नव दिन अरु नवरात,करूँ सेवा मैं माता।तुम … Read more

विप्लवी

गोपाल चन्द्र मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)******************************************* ‘विप्लव’ नाम से जन्म हुआ मेरा-वियतनाम या बांग्लादेश से नहीं,जनम लिया है़ बन्दूक की नाल से-या जलंत शवों की चिता के बीच से,अत्याचार के जख्म से जल रहे हैं-जल रहे मेरे मन के अंतर्मन रह-रह,सिर्फ खून और खून-आर्तनाद या क्रन्दन,माँ की कोख में मृत सन्तानमैं हुआ निःसंग,लुप्त हुए जीवन से गुलशन।मेरा … Read more

करो प्रतिज्ञा-भ्रष्टाचार मिटायेंगे

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** नव विहान के नव प्रकाश से,नव संसार बनायेंगे।करो प्रतिज्ञा सारे जग से,भ्रष्टाचार मिटायेंगे॥ देखो जिधर,उधर ही,भ्रष्टाचार दिखाई देता है।देश,प्रदेश,विश्व में,अत्याचार दिखाई देता है॥रिश्तों-नातों में केवल,व्यापार दिखाई देता है।झूठ,कपट,छल,छद्म-युक्त,व्यवहार दिखाई देता है॥ क्या ऐसे ही हम ईश्वर के,राजकुमार कहायेंगे ?करो प्रतिज्ञा सारे जग से,भ्रष्टाचार मिटाएंगे…॥ अहंकार,आलस,विलास,हमको ही छलता जाता है।पड़ी मुफ्तखोरी की लत,पुरूषार्थ … Read more