गिरता मानव-घटती संस्कृति

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** मानव ईश्वर की श्रेष्ठतम रचना है। सभी जीवों में मानव ही एकमात्र ऐसा जीव है जो सटीक बोल सकता है,जिसके पास बुद्धि है,संवेदना है,भविष्य की सोंच है,निरंतर प्रगतिशील है। यही एकमात्र ऐसा है जो समाज में एक निश्चित नियमों का पालन करते हुए जीवन व्यतीत करता है। प्राचीनकाल … Read more

निजी स्वार्थ

गुलाबचंद एन.पटेल गांधीनगर(गुजरात) ************************************************************************ हिमालय की ओर ऊपर एक बस ढलान पर जा रही थी,उसमें एक किसान अपनी पत्नी के साथ सफर कर रहा था। बस पर्वत पर आगे बढ़ रही थी। किसान ने कंडक्टर को विनती की, कि उसे बीच में अपने गांव के पास उतारा जाए। कंडक्टर ने आगे बढ़कर घंटी बजाई, किसान … Read more

जीवन-दर्शन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** दुनिया में होता बड़ा,शील धीर विवेक। परहित मृदुभाषी सदा,मौन प्रकृति हो नेक॥ तौल शील गुण त्याग सच,अपना नित आचार। अगर सफल गुरुता हुई, हुआ बड़ा आधार॥ ज्ञानवान अभिमान नर, कोप रौब आचार। दुराचार हो कटुवचन,लघुतर नर संसार॥ नहीं दोष दें अन्य को,याद करें निज कर्म। तौले तुला विवेक … Read more

माँ की पूजा

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’ पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़  ************************************************** मंदिर में तू पूजा करके,छप्पन भोग लगाये। घर की माँ भूखी बैठी है,उसको कौन खिलाये। कैसा तू नालायक है रे,बात समझ ना पाये। माँ को भूखा छोड़ यहाँ पर,दर्शन करने जाये॥ भूखी-प्यासी बैठी है माँ,दिनभर कुछ ना खाये। मांगे जब वह पानी तो फिर,क्यों उस पर झल्लाये॥ करे … Read more

रोजी-रोटी-मकान

आशुतोष कुमार झा’आशुतोष’  पटना(बिहार) **************************************************************************** खुद पे ऐतबार का, चंद सवालों का झमेला यहाँ, वक्त-वक्त का मेला रे। रोजी-रोटी-मकान, का यहाँ झमेला रे। भूख की जात नहीं, रोजी-रोटी की बात नहीं नंगे पांव चलते-चलते, छाले का झमेला रे। तन ढका नहीं, मन पढ़ा नहीं कह दिया नंगा रे, बात-बात का झमेला रे। सर्दी-गर्मी-बरसात, छत की … Read more

लम्हें

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** वो बीते लम्हें बहुत याद आते हैंl भूलना चाहते पर भूल न पाते हैं। उन बातों का दिल पर आज इतना असर- उन लम्हों को गीत-ग़ज़ल में गाते हैंl परिचय–मोहित जागेटिया का जन्म ६ अक्तूबर १९९१ में ,सिदडियास में हुआ हैl वर्तमान में आपका बसेरा गांव सिडियास (जिला भीलवाड़ा, राजस्थान) हैl … Read more

नयी सरकार की शुरुआत सही दिशा में

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* देश में नरेन्द्र मोदी सरकार की दूसरी पारी की विधिवत शुरुआत हो गई है। उन्होंने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ उनके मंत्रिमंडल के ५७ सदस्यों ने भी शपथ ली और उनको जिम्मेदारियों एवं दायित्वों से भी बांध दिया गया है। अमित शाह गृह मंत्रालय संभालेंगे तो राजनाथ … Read more

गर्मी में…

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- झुलस रहे हैं पौधे सारे झुलस रही हैं सभी लताएँ, सारे तन को जला रही हैं दक्षिण की ये गर्म हवाएँ, जल से अपनी प्यास बुझा ले… आ राही थोड़ा सुस्ता लेl जेष्ठ महीना तपती धूप सूख गये हैं सारे कूप, बालू रेत में चला ना जाए कैसे अपनी … Read more

लायल रहे

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** जाति मज़हब देखकर पागल रहे। सद्गुणों के जो नहीं कायल रहे। जो हमें भूला रहा हर दौर में, हम उसी के प्यार में पागल रहे। बूँद बरसी इक न मेरे खेत में, आसमां पेे गो बहुत बादल रहे। जो बुज़ुर्गों ने दिये थे कल मुझे, ज़िन्दगी भर … Read more

‘मातृ दिवस’ स्पर्धा में डॉ.सिंघल,नताशा गिरी एवं ओमप्रकाश क्षत्रिय बने विजेता

इंदौर। हिन्दीभाषा डॉट कॉम परिवार द्वारा आयोजित स्पर्धा ‘मातृ दिवस’ विशेष के परिणाम ३० मई को घोषित कर दिए गए हैं। सर्वश्री डॉ.शशि सिंघल,नताशा गिरी,शिवानन्द सिंह ‘सहयोगी’,निर्मल कुमार शर्मा,बोधनराम निषादराज और ओमप्रकाश क्षत्रिय इसमें अलग-अलग वर्ग में विजेता बने हैं। मंच की प्रचार प्रमुख सुश्री नमिता दुबे ने बताया कि,१२ मई २०१९ को ‘मातृ दिवस’ … Read more