धूप और बारिश

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** आज धूप से तपी हुई धरती का कण-कण प्यासा। इस धरती का हर प्राणी भी आज तपन का मारा। हरी घास,दूब,वनस्पति,विटप लताएं सहती। ‘बादल काका आ जाओ’ अब तड़प-तड़प कर कहती॥ चातक पक्षी व्योम निहारे यही विनय अब करता। ‘इंद्र देव अब कृपा करो हर जीव प्रार्थना करता। उमड़-घुमड़ कर … Read more

स्त्री

प्रज्ञा गौतम ‘वर्तिका’ कोटा(राजस्थान) ********************************************* स्त्री… स्त्री-गर्भ से प्रस्फुटित वह अंकुर, जो पुष्पित-पल्लवित हो उठता है बिना सींचे भी, गमक उठता है घर-भर पोसती है वह आँचल की छांव तले पीढ़ियों को, बिना जमाए अपनी जड़ें किसी धरती पर। स्त्री… स्नेह की रेशमी डोर, रेशा-रेशा बिखर कर तिरती रहती है, जाने कितने रिश्तों में जाने … Read more

किताबों की शवयात्रा

डॉ.शैल चन्द्रा धमतरी(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** कई वर्षों के बाद आज मैं अपने शहर आई हुई थी। इस शहर में मेँ जन्मी,पली बढ़ी और विवाह के पश्चात दूसरे शहर चली गई। आज अपने शहर में आकर मुझे बड़ा सुकून महसूस हो रहा था। मुझे शोध के लिए कुछ किताबों की आवश्यकता थी,अतः आज सदर बाजार आई हुई … Read more

सर्दी

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** सर्द भरा मौसम यहाँ,शीतल तन मन होय। आग भरोसे दिन कटे,रात बिताये सोय॥ सभी काँपते हैं यहाँ,सभी तापते आग। जलता हुआ अलाव है,मिल के गाते राग॥ शरद सुहानी है ऋतु,सुबह-शाम की धूप। लगते सुन्दर आसमां,मौसम सौम्य स्वरूप॥ सर्दी बड़ी सुहावनी,मन को भाती शीत। बैठ मजे लो उष्णता,गर्म चाय … Read more

दुनिया तो पराई है

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** न तेरी है न मेरी है ये दुनिया तो पराई है, यूँ ही कहता नहीं हूँ मैं सभी को आजमाई है, किसी लालच में रिश्ते ढो रहे हैं लोग ये सारे- बिता कर उम्र केवल एक मुट्ठी राख पाई हैl परिचय-वकील कुशवाहा का साहित्यिक उपनाम आकाश महेशपुरी है। इनकी … Read more

गंगा की दुर्दशा

दीपक शर्मा जौनपुर(उत्तर प्रदेश) ************************************************* हे हिमतरंगिणी भगवती गंगे निर्मल नवल तरंगें, मैंने देखा था तुम्हें निकलते हुए हिमालय की गोद से अति चंचल, मधुर शीतल, धँवल चाँदनी-सी सुंदर। भगीरथ के दुर्गम पथ पर लहराती चली जा रही थी, पर क्या पता था कि मंजिल तक पहुँचते-पहुँचते, तू इतनी शिथिल और मलिन हो जाएगी। हे … Read more

बाल विवाह अभिशाप

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** बाल विवाह है अपराध, लड़की के लिए अभिशाप। बोझ न समझो बेटी को, पढ़ने दो,आगे बढ़ने दो। कम उम्र में करनी शादी, उसके जीवन की बर्बादी। बाल विवाह कुप्रथा है, इसे नहीं अपनाओ तुम। होने दो विकास उसका, जीने की आजादी दो। न दो बिटिया को सजा, उसका जीवन सँवारो … Read more

भारतीय संस्कृति में नव चेतना फूंकने वाले युगदृष्टा थे टैगोर

राजेश पुरोहित झालावाड़(राजस्थान) **************************************************** रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती विशेष-७ मई………… कलकत्ता ब्रिटिश भारत में ७ मई १८६१ को देवेन्द्रनाथ टैगोर व माता शारदा देवी के घर जन्में रवीन्द्रनाथ टैगोर देश के सुप्रसिद्ध लेखक,कवि,नाटककार,संगीतकार एवं चित्रकार थे। वे बांग्ला व अंग्रेजी भाषा के जानकार थे। उनके साहित्यिक आंदोलन को आधुनिकतावाद की संज्ञा दी गई। साहित्य के क्षेत्र … Read more

हमारा तुम्हारा जभी सामना हो

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** (रचनाशिल्प:१२२ १२२ १२२ १२२) हमारा तुम्हारा जभी सामना हो, बढ़े प्यार दिल में,निरंतर घना हो। सबेरे उठें हम,सुनें बात दिल की, रहे जग सुखी नित,यही प्रार्थना हो। जिधर आँख डालें,सुमन बस खिला हो, चमन हर दिशा में,महक से सना हो। हसीं चांदनी हो,निशा भी जवां हो, कटे प्यार में … Read more

वृतिका

कपिल कुमार जैन  भीलवाड़ा(राजस्थान) ***************************************************************** आज शाम को द्वार पे विदा कर के, ज्यों ही रात्रि के आरम्भ में मैं चांद के आगोश में समाया, थकान से बोझिल पलकों ने मुझे मेरी ‘वृतिका’ से मिलवाया, ख़्वाब में आई एक मूरत कुछ जानी कुछ अनजानी-सी, कुछ सकुचाई फिर धीरे से मुस्कुराई, आप कौन ? इस सवाल … Read more