हिन्दी से हिंग्लिश का सफर

सत्यजीत कुमार द्विवेदी************************************ मैं मानता हूँ कि भारत विविधताओं और अनेकता में एकता की कसौटी पर खरा उतरता है, लेकिन हम कई अन्य देशों को देखें, जहां पर एक राष्ट्र एक भाषा को परिमार्जित होते हुए देखा जाता है, जबकि वहां भी कई भाषाएं और बोलियां विद्यमान है, साथ ही वो देश अपनी भाषा के … Read more

अनमोल सीख

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)********************************************* जीना जैसे पिता…. मेरे पिताजी बहुत ही स्वाभिमानी, वलिष्ठ, निडर व साहसी थे। ऐसा सुना था कि, एक बार युवावस्था में दोस्तों के बीच आपसी चर्चा के दौरान किसी ने रात भर अकेले में श्मशान में बिताने की चुनौती दी, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार ही नहीं किया, बल्कि उसी अमावस्या वाली … Read more

जीवित पशुओं का आयात-निर्यात सरकार का घोर निंदनीय कुकृत्य

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* हमारा देश भारत एक हिंसक देश है, जहाँ दिन-रात खून-खराबा होना आम बात है और आजकल यहाँ पर खून की नदियाँ भी बहने लगी है। यहाँ प्रेम, शांति, भाई-चारा का कोई स्थान नहीं है। सरकार दुहमुँही है, जिसको दोगली भी कहते हैं। वह हमारा दूध-घी छीनकर अपना कोष भरती है। सरकार चार्वाक सिद्धांतों … Read more

परोपकार

डोली शाहहैलाकंदी (असम)************************************** सोनिया आज अपने बेटे के साथ एक मनोचिकित्सक के पास पहुंची। उसका परिचय लेते हुए डॉक्टर साहब ने जांच शुरू ही की थी कि वह कहने लगी-“सर मेरी जिंदगी बिल्कुल बेकार हो चुकी है, सबका बोझ बन चुकी हूँ। मुझे पैसे की तो कोई कमी नहीं, मगर मुझसे खुशियाँ कोसों दूर है। … Read more

बंगाल में भाषाई ध्रुवीकरण:जातिय संघर्ष की दस्तक तो नहीं ?

प्रो. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल )**************************** एक छोटी-सी चिंगारी को शोला बनते देर नहीं लगती, यदि समय रहते उसे बुझा न दिया जाए। ‘बांग्ला पक्खो’ जिस तरह ज़हर उगल रहा है, बंगाल के लिए शुभ संकेत नहीं है। आखिर मणिपुर में जातिय हिंसा यहाँ तक पहुँचेगी, किसी ने सोचा था क्या ?१५ मार्च २०२३ को पश्चिम … Read more

चुनावी रथ में सवार दलों की सत्ताकांक्षा

ललित गर्गदिल्ली************************************** आजादी के अमृतकाल के पहले लोकसभा चुनाव की आहट अब साफ-साफ सुनाई देे रही है। भारत के सभी राजनीतिक दल अब पूरी तरह चुनावी मुद्रा में आ गए हैं और इसी के अनुरूप बिछ रही चुनावी बिसात में अपनी गोटियाँ सजाने में लगे दिखाई पड़ने लगे हैं। २०२४ लोकसभा एवं इसी वर्ष होने … Read more

विश्व को मानव के रहने लायक बनाएँ

रत्ना बापुलीलखनऊ (उत्तरप्रदेश)***************************************** स्वच्छ जमीन स्वच्छ आसमान… खगोलीय दृष्टि से देखा जाए तो हमारा विश्व सौर मंडल की गतिविधि एवं आकर्षण से एक-दूसरे के साथ बँधा हुआ है, जिसे भूमंडल कहा जाता है।इस भूमंडल में जमीन एवं आसमान सभी समाहित है, और इसमें मानव जीवन का भी अपना एक महत्व है।स्वच्छता जिसकी आधारशिला है, बिना … Read more

सदा आईने और परछाई जैसे मित्र रखिए

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ मित्र दिवस (८ जून) विशेष… अक्सर कहा जाता है कि जिंदगी में एक दोस्त जरूर होना चाहिए जिससे आप अपनी मन की बात कह सकें, क्योंकि ऐसी बहुत-सी बातें होती हैं जिन्हें हम परिवार के साथ नहीं साझा कर पाते हैं। हमारे दोस्त हमें बिना जांचे बात सुनते हैं, समझते हैं … Read more

विश्‍व प्रेमी व्‍यक्‍तित्व के प्रतीक कवि कबीरदास

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** संत कबीर जयंती (४ जून) विशेष… संत कबीर दास भक्‍तिकाल के एकमात्र ऐसे कवि हैं, जिन्‍होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज सुधार के कार्यों में लगा दिया। कबीर कर्म प्रधान कवि थे, इसका उल्‍लेख उनकी रचनाओं में देखने को मिलता है। कबीर का संपूर्ण जीवन समाज कल्‍याण एवं समाज हित में उल्लेखनीय है। कबीर, … Read more

गंगा नदी की प्रासंगिकता

रत्ना बापुलीलखनऊ (उत्तरप्रदेश)***************************************** जनमानस का जीवन जल पर ही निर्भर है, अतः नदियों का महत्व सदियों से न केवल भारत में बल्कि पूरे संसार में है। इसलिए प्राचीन काल में लोग नदियों के किनारे ही अपना जीवन-यापन करते थे। हर सभ्यता का प्रमाण हमें नदियों की घाटी से ही मिलता है।नदियों की बात आती है … Read more