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कुनबा

बाबूलाल शर्मा
सिकंदरा(राजस्थान)
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कुुनबा-
बातें बीती वक्त भी,प्रेम प्रीत प्राचीन।
था कुनबा सब साथ थे,एकल अर्वाचीन।
एकल अर्वाचीन,हुए परिवारी सारे।
कुनबे अब इतिहास,पराये पितर हमारे।
शर्मा बाबू लाल,घात प्रतिघात चलाते।
रोते बूढ़े आज,सोच कुनबे की बातें।

पीहर-
पालन प्रीति परम्परा,पीहर प्रिय परिवार।
प्रेम पत्रिका पा पगे,प्रियतम पथ पतवार।
प्रियतम पथ पतवार,प्राण प्यारे परदेशी।
परिपालन परिवार,प्रथा पालूँ परिवेशी।
प्रकटे परिजन प्यार,पालते प्रण पंचानन।
परमेश्वर प्रतिपाल,पृथा पीहर पथ पालन!

पनघट-
झीलें बापी कूप सर,सरिताओं के घाट!
आतुर नयन निहारते,पनिहारी की बाट!
पनिहारी की बाट,मिलें कुछ बातें करते!
रीत प्रीत मनुहार,शिकायत मन की धरते!
कहे लाल कविराय,स्रोत जल बचे न गीले!
कचरा पटके लोग,भरे पनघट सब झीलें!

सैनिक-
सैनिक रक्षक देश के,हैं जैसे भगवान!
रखें तिरंगा मान को,मरे शहादत शान!
मरे शहादत शान,चाह बस कफन तिरंगा!
भारत रहे अखण्ड,बहे जल यमुना गंगा!
कहे लाल कविराय,प्राण दे जनहित दैनिक!
मात भारती पूत,नमन है तुमको सैनिक!

कोयल-
कोयल काली कंठिनी,कागा कीर कमान!
कुरजाँ,केकी कामिनी,करे कंठ कलगान!
करे कंठ कलगान,किसान कपोत उड़ाते!
कोयल का मधु गान,तदपि सब काग बुलाते!
कहे लाल कविराय,भली अलि लगती कोपल!
चाहे दु:ख में काग,खुशी मन भाए कोयल!

अम्बर-
अवनी अम्बर कब मिले,आन अमर अहसास!
धरती अब ये आकुला,आषाढ़ी बस आस!
आषाढ़ी बस आस,करें खेती तो कैसे!
महँगाई की मार,कहाँ से लाएंँ पैसे!
कहे लाल कविराय,सूखती भू की धमनी!
अम्बर करे निहाल,हरित तब होगी अवनी!

विनती-
विधना विपदा वारि वन,वायु वंश वारीश!
वृक्ष वटी वसुधा वचन,विनती वर वागीश!
विनती वर वागीश,वरुण वन वन्य विहारी!
वृहद विप्लवी विघ्न,विनय वंदन व्यवहारी!
वंदउँ विमल विकास,वाद विज्ञानी विजना!
वरदायी विश्वास,वरण वर विनती विधना!

भावुक-
भावे भजनी भावना,भोर भास भगवान!
भले भलाई भाग्य भल,भावुक भाव भवान!
भावुक भाव भवान,भजूँ भोले भण्डारी!
भरे भाव भिनसार,भाष भाषा भ्रमहारी!
भय भागे भयभीत,भ्रमित भँवरा भरमावे!
भगवन्ती भरतार,भगवती भोला भावे!

अनुपम-
अनुपम संस्कृति है यहाँ,अनुपम अपना देश!
विविध धर्म अरु जातियाँ,रहे संग परिवेश!
रहे संग परिवेश,भिन्न जलवायु प्रदेशी!
बोली विविध प्रकार,चाह बस हिन्द स्वदेशी!
कहे लाल कविराय,त्याग मय धरती निरुपम!
रीत प्रीत व्यवहार,तिरंगा भारत अनुपम!

धड़कन-
धड़कन भारतवर्ष की,दिल्ली कहें सुजान!
हृदय देश का है यही,संसद शासन शान!
संसद शासन शान,राजधानी यह दिल्ली!
राज तंत्र से अद्य,रही शासन की किल्ली!
शर्मा बाबू लाल,सदा सत्ता मय थिरकन!
दिल्ली अपनी शान,रहेगी दिल की धड़कन!

परिचय : बाबूलाल शर्मा का साहित्यिक उपनाम-बौहरा हैl आपकी जन्मतिथि-१ मई १९६९ तथा जन्म स्थान-सिकन्दरा (दौसा) हैl वर्तमान में सिकन्दरा में ही आपका आशियाना हैl राजस्थान राज्य के सिकन्दरा शहर से रिश्ता रखने वाले श्री शर्मा की शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-अध्यापन(राजकीय सेवा) का हैl सामाजिक क्षेत्र में आप `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान एवं सामाजिक सुधार के लिए सक्रिय रहते हैंl लेखन विधा में कविता,कहानी तथा उपन्यास लिखते हैंl शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र में आपको पुरस्कृत किया गया हैl आपकी नजर में लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः हैl