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मन की बात

पूनम दुबे
सरगुजा(छत्तीसगढ़) 
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इधर-उधर,
जाने किधर
है छोटा-सा,
मेरा जिगर
ढूंढ रही हूँ,
कैसा धुरंधर…l

खोजूं कैसे,
रहता है किधर
किन गलियों में,
किन राहों में
किसके पास,
किसने चुराया
किसकी बाँहों में,
किसने पाया
मेरा जिगर,
कैसा धुरंधर…l

आजा मेरे पास,
मेरी साँसें
तेरे संग,
मन महकता
तेरे तन से,
कैसे खोजूं
कैसे बुलाऊं !
मेरी नींदों में,
छुपने वाले
लोरी सुन,
सोने वाले
कुछ खट्ठी,
कुछ मीठी
कुछ बातें,
तेरी कलन्दर
आजा अब तो,
ओ रे धुरंधर…l

प्यार किया,
है तुझसे
धोखा मुझको,
देना न
तेरी दिलरूबा,
तो मैं ही हूँ
ओ रे मेरे प्यारे,
चुकंदरl
आ जाओ,
धुरंधर…ll

परिचय-श्रीमती पूनम दुबे का बसेरा अम्बिकापुर,सरगुजा(छत्तीसगढ़)में है। गहमर जिला गाजीपुर(उत्तरप्रदेश)में ३० जनवरी को जन्मीं और मूल निवास-अम्बिकापुर में हीं है। आपकी शिक्षा-स्नातकोत्तर और संगीत विशारद है। साहित्य में उपलब्धियाँ देखें तो-हिन्दी सागर सम्मान (सम्मान पत्र),श्रेष्ठ बुलबुल सम्मान,महामना नवोदित साहित्य सृजन रचनाकार सम्मान( सरगुजा),काव्य मित्र सम्मान (अम्बिकापुर ) प्रमुख है। इसके अतिरिक्त सम्मेलन-संगोष्ठी आदि में सक्रिय सहभागिता के लिए कई सम्मान-पत्र मिले हैं।