कुल पृष्ठ दर्शन : 328

दीया

डॉ.सरला सिंह
दिल्ली
***********************************************
माटी कहती मुझसे ही,
दीये सारे बनते हैं।
फैल रही जगमग ज्योति,
नाम दीये का होता है।
बोली धरती री माटी,
तू तो मुझसे ही है जन्मी।
जन्म दिया ने तुझको,
सब कहते बस माटी-माटी।
फैल रही जगमग ज्योति,
नाम दीये का होता है।

कहे कुम्हार अरी री दीया,
काहे तू इतराये इतना ।
तुझको तो गूँथ कर मैंने ही,
चॉक पे दिया दीप आकार।
फैल रही जगमग ज्योति,
नाम दीये का होता है।

बाती बोली-दीया कहाँ जलता,
जलती तो बस मैं हूँ।
कतरा-कतरा काट-काट कर,
जल-जल के उजाला करती हूँ।
फैल रही जगमग ज्योति,
नाम दीये का होता है।

घी बोला-मैं न होता तो,
बाती तू कैसे जलती ?
मैं खुद की आहुति देता हूँ,
तब बाती है तू जलती।
फैल रही जगमग ज्योति,
नाम दीये का होता है।

अग्नि कहती-मैं न होती तो,
कैसे फिर बाती जल पाती ?
फैल रही जगमग ज्योति,
नाम दीये का होता है।

फिर धरती समझाकर बोली,
मकसद तो बस उजियाला है।
अंधकार को दूर भगा दे,
पथिकों को बस राह दिखा दे।
काम सभी मिलकर करना,
नाम किसी का चाहे हो ले।
फैल रही जगमग ज्योति,
नाम दीये का होता है।

बाती तेरे एक त्याग से,
कितनों को पथ मिलता है।
तेरे अमर समर्पण से ,
कितनों का भाग्य संवरता है।
अंधकार को भगा दूर ,
दुनिया में उजाला करती है॥

परिचय-आप वर्तमान में वरिष्ठ अध्यापिका (हिन्दी) के तौर पर राजकीय उच्च मा.विद्यालय दिल्ली में कार्यरत हैं। डॉ.सरला सिंह का जन्म सुल्तानपुर (उ.प्र.) में ४अप्रैल को हुआ है पर कर्मस्थान दिल्ली स्थित मयूर विहार है। इलाहबाद बोर्ड से मैट्रिक और इंटर मीडिएट करने के बाद आपने बीए.,एमए.(हिन्दी-इलाहाबाद विवि), बीएड (पूर्वांचल विवि, उ.प्र.) और पीएचडी भी की है। २२ वर्ष से शिक्षण कार्य करने वाली डॉ. सिंह लेखन कार्य में लगभग १ वर्ष से ही हैं,पर २ पुस्तकें प्रकाशित हो गई हैं। आप ब्लॉग पर भी लिखती हैं। कविता (छन्द मुक्त ),कहानी,संस्मरण लेख आदि विधा में सक्रिय होने से देशभर के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख व कहानियां प्रकाशित होती हैं। काव्य संग्रह (जीवन-पथ),२ सांझा काव्य संग्रह(काव्य-कलश एवं नव काव्यांजलि) आदि प्रकाशित है।महिला गौरव सम्मान,समाज गौरव सम्मान,काव्य सागर सम्मान,नए पल्लव रत्न सम्मान,साहित्य तुलसी सम्मान सहित अनुराधा प्रकाशन(दिल्ली) द्वारा भी आप ‘साहित्य सम्मान’ से सम्मानित की जा चुकी हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-समाज की विसंगतियों को दूर करना है।

Leave a Reply