आज रहने दो
सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** आज रहने दो अपरिचितआज रहने दो अकेले,बरस ले यह घिरा घन भीआर्द्र चितवन के ये मेले। फूटते उर के मृदुल स्वरआज सुधि नर्तन की आई,घुँघरूँओं की खनक सुननानूपुरों के मन को भाई। आवास भू अंचल मिलाराह तुम पाथेय खोलो,वेदना-जल, स्वप्न-शतदलजुगनुओं आ करके बोलो। प्राण हँस कर कह रहा है,अमरता के बीज बोना।बुझे … Read more