कहाँ से लाऊँ वो शब्द ?

ऋतुराज धतरावदा इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* नहीं जानती है तू कहाँ तक फैला है तेरा वजूद, फूलों की खुशबूओं दिल तक छूते हर इक स्पर्श, गोधूली से नहाती साँझ चौके से उठती भीनी-सी लहर, धुँध में डूबी सुबह मस्ज़िद की पहली अज़ान, मंदिरों की संध्या आरती पहाड़ी नद के नाद, चीड़ के जंगल में झाँकती किरण बूँदों … Read more

नींद को वह उड़ाती रही

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** याद मीठी सताती रही, नींद को वह उड़ाती रहीl माघ लेकर सुमन आ गया, गंध खुद को लुटाती रहीl सो गए बाँह में मीत के, प्रीत मुझको जगाती रहीl आग को कुछ खबर भी नहीं, आशियाँ वो जलाती रहीl खो गयी चाँदनी भोर में, रातभर जो हँसाती रहीll परिचय-अवधेश … Read more

दे दूँ वतन के वास्ते

डॉ.अमर ‘पंकज’ दिल्ली ******************************************************************************* (रचनाशिल्प:२२१ २१२१ १२२१ २१२) दे दूँ वतन के नाम कलेजा निकाल कर, थाती शहादतों की रखी है संभाल करl आबाद हो गया है तू जुल्फों की छाँव में, गुज़रे हुए पलों पे कभी मत मलाल करl धरती वही,हवाएँ वही,चाँद भी वही, माज़ी को याद करके तू रिश्ता बहाल करl क्यों ज़हर … Read more

ज़िंदगी का सफर

अंतुलता वर्मा ‘अन्नू’  भोपाल (मध्यप्रदेश) ************************************************************ कुछ इस तरह मैंने… ज़िंदगी के सफर को, खुशनुमा बना लिया….। मुश्किल था यूँ चलना, इसे आसां बना लिया…। हर कदम पर थी ठोंकरें, इन्हें पार करने का इरादा बना लिया…। ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव में, खुद को पका लिया…। कई मौसम बदले, सभी मैं खुद को ढाल लिया…। गम … Read more

मोहर

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** अजीब-सी रीत है, हर काम करने के पहले लगवानी पड़ती है, तुम्हारी स्वीकृति की मोहर। तुम हाँ कहो, तभी कदम आगे बढ़े मेरे वरना कदम रुके ही, रह जाते हैं मेरे। ऐसा क्यों ? मैं नारी हूँ… बस इसलिए ! मुझे भी उड़ने का हक है खुले उन्मुक्त गगन में, … Read more

मै भी एक पेड़ हूँ

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** गली-गली में मैं हूँ,छाया तुम्हें देता हूँ। खेतों के पार मैं हूँ,वर्षा भी कराता हूँ। शीतल हवा देता हूँ,चुपचाप मैं रहता हूँ। देखो भाई मत काटो,मैं भी एक पेड़ हूँ। मीठा फल देता हूँ,खट्टा फल देता हूँ। कार्बोहाइड्रेट देता हूँ,विटामिन भी देता हूँ। मैं कुछ नहीं लेता,सिर्फ तुम्हें मैं … Read more

भोर

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* धरती के आँगन पर, देखो भोर ने फिर से डेरा डालाl आकाश की गोदी से, उतर कर सूरज ने, अंगड़ाई लीl अलसायी-सी रात ने देखो, समेट लिया है अपना बिस्तरl पंछियों ने, पर फैलाकर आशाओं की, भरी उड़ान असीम, आकाश की ओर। चटक के कलियां, बन गयी फूल भोर का … Read more

आ गया पानी बाबा

ममता बैरागी धार(मध्यप्रदेश) ****************************************************************** आज बहुत खुशी से सारी दुनिया झूम ऊठी, हर्षित तन-मन हुआ,फव्वारों के साथ मीठी। कितना प्यारा मौसम हुआ,छाने लगी रौनक है, हरियाली की चादर ओढ़ आज धरा भी नाच रहीl जागे या सोए हम,या घूमने ही जाएं हम, बड़े-बड़े झरनों को देखे,या सिमट आए हम। समझ में कुछ ना आता,अब तो … Read more

कँटीले अल्फ़ाज़ ए नूर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** भौतिक मायाजाल फँस,रिश्ते होते दूर। धन-वैभव छल झूठ में,कहाँ मिलेगी नूरll लुब्ध श्वान खल सर्प का,क्या उसूल ज़ज़्बात। रिश्ते हैं बस स्वार्थ के,वरन लगाए घातll बदचलन नित बदजुबां,नाशक घर परिवार। विवेकहीन असंयमित,बिखराता संसारll मृदुल प्रकृति नित संयमित,विनयशील व्यवहार। मधुरिम हो वाणी श्रवण,अपनापन जग सारll सोच सदा अनुकूल हो,नियति … Read more

नज़र

प्रेमा नड़ुविनमनी धारवाड़(कर्नाटक) ******************************************************************* मेरे सपनों के महलों में, रखना तुम कदम एक बार। तेरे होंठ से होंठ मिलाकर मैं चूम लूँ जरा, मेरे सपनों की दुकान से मैं कौन-सा तोहफा ले आऊँ,दूँ तुम्हें ? सपनों को तो तुमने ही बेचा, तेरे सामने है सब फीका। सजन सपनों से दूर होकर, मेरे दिल में बसना … Read more