खेल का खुमार

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** वर्ल्ड कप क्रिकेट का, छाया हुआ खुमार है हर क्रिकेट प्रेमी राष्ट्र हेतु, करे जीत की मनुहार है। प्रशंसकों की तालियाँ, बढ़ा रहीं उत्साह। खिलाड़ियों के हौंसले हैं, दर्शकों की चाह। सब अपनी-अपनी टीम हेतु, दुआ करते नज़र आते लगते हैं छक्के तो, खुशी से झूम जाते। क्रिकेट की … Read more

सनम तेरी याद आती है…

डोमन निषाद बेमेतरा(छत्तीसगढ़) ************************************************************* जब भी तुम, मेरे नजरों के सामने दिखाई नहीं देती हो, तो दिल मेरा उदास हो जाता है। चाहत है तू मेरी, जिंदगी बन जाओ सनम तेरी याद आती है…। हर पल तुम्हें, देखकर जीना चाहता हूँ बस यही मेरी ख्वाहिश हैl जब तक तू बात करेगी, तब तक मेरी साँस … Read more

विश्वास

प्रेक्षा डॉन गोधा ‘परी’ दुर्ग (छत्तीसगढ़) ************************************************************* नहीं पकड़ूंगी पापा, मैं आपका हाथ। डरती हूँ छोड़ न दूँ, मैं आपका साथ। थामना आप ही मुझे सदा, फिर हम न बिछड़ेंगे कदा। आप पर अटल है विश्वास, साथ रहेंगे जब तक है श्वांस। सब कहते मैं माँ जैसी हूँ, नहीं जानती मैं कैसी हुँ। बढ़ाती रहूँ … Read more

कबहु नशा मत कीजिए

सौदामिनी खरे दामिनी रायसेन(मध्यप्रदेश) ****************************************************** कबहु नशा मत कीजिए,यह अवगुण की खानl जो नशा कछु है करा,आज ही दीजे निकालll जो साजन मदिरा पिये,नाही सजनी के जोग। रोज नशा में रत रहे,हजार सता रहे रोगll नशा रोग हद से बढ़े,मिट जाये घर-द्वार। छूट गये रिश्ते सगे,घर में मचाये रारll सब मेहनत की पूँजी,नशा-पत्ता में जाये। सुत … Read more

मेघराज चल गगन में

हेमलता पालीवाल ‘हेमा’ उदयपुर (राजस्थान ) *************************************************** काले-काले मेघ कहाँ तुम चले, बिन बरसे मेरे गाँव,किधर चले नभ में किया तुमने घना अँधेरा, उमड़-घुमड़ कर तुम तो चले…l शोर मचाया गरज-बरस कर ऐसे, बारात आई हो दूल्हे की जैसे। ढोल,नगाड़े-सा शोर खूब मचाया, नभ में छा गया उत्सव यह ऐसे। नभ में दामिनी अगन बरसाए, … Read more

अपना घर

राजबाला शर्मा ‘दीप’ अजमेर(राजस्थान) ******************************************************************************************** बहुधा हिंदू समाज में लड़कियों को यह बात घुट्टी में पिला दी जाती है,- “ससुराल ही उनका असली घर है।” मंजरी भी यही घुट्टी पीकर अपने ससुराल आई थी। थोड़े दिन बाद उसने अपने पति से पूछा,-“मेरा घर कहां है ?” कौशल ने उसे समझाते हुए कहा,-“मेरा नहीं,हमारा घर। यह … Read more

बरखा ऋतु

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** हरित तृणिका भेदनी पर, मोर मनहर दिखते हैं। शरद के पग चिन्ह आली, हर दिशा में दिखते हैं। छंट गए बादल बरसते, विहग पुलकित मोर नाचतेl आज ये जलकुंड देखो, झिलमिलाते दिखते हैं। सघन कुंजों के किनारे, कृषक धरती के सितारे। झुन्ड के अब झुन्ड देखो, हल चलाते दिखते हैं। … Read more

रखना ध्यान…

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ करना मान- बुज़ुर्ग माँ-बाप का, रखना ध्यान। करोगे सेवा- निःस्वार्थ भावना से, मिलेगा मेवा। रखना ख़ुश- भूल कर मत दो, कोई भी दुःख। करो प्रयास- माँ-बाप कभी न हो, यारों उदास। खुशी या गम- उनकी आँखें कभी, नहीं हों नम। परिचय-निर्मल कुमार जैन का साहित्यिक उपनाम ‘नीर’ है। … Read more

खो गया समय

डॉ.शैल चन्द्रा धमतरी(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** “हैलो,हाँ यार अनिल,मैं शहर पहुँच चुका हूँ। तुम कहाँ हो ?” राजेश अपने मित्र को फोन पर पूछ रहा था। कई वर्षों बाद वह किसी काम से भिलाई आया था। इसी शहर में उसने उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। यहां वह हॉस्टल में रहा, पर उसके बहुत सारे मित्र इसी शहर … Read more

शर्म करो

केवरा यदु ‘मीरा’  राजिम(छत्तीसगढ़) ******************************************************************* राम-रहीम की धरती पर यूँ न अधर्म करो, बहन-बेटियों को मत नोंचो,कुछ तो शर्म करो। वह भी किसी की बेटी है, जिस कोख से तूने जन्म लिया। अरे नराधम तुमने तो उस, कोख को लज्जित आज किया। बेटी है देवी की मूरत यूँ न कुकर्म करो॥ बहन-बेटियों को मत नोंचो… … Read more