कैसे कह सकते हो ?

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* कभी देखा है मजदूर को, खाली पेट सिर पर तसला उठाते ? कभी चखा है स्वाद सूखी रोटियों का, कभी गुजारी हैं रातें पानी को पीकर ? कभी गिरे हो भूख से चक्कर खाकर सीढ़ियों से, कभी सुनी है बेवजह मालिकों की गाली ? कभी काम के बाद नहीं पाए हो … Read more

अविश्वास

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** अविश्वास है घात की, घर्म आस्था तथ्य मानव में ईश्वर कहीं, रहता छिपा अवश्य। अविश्वास वह बूंद है, , जो समुद्र से दूर होकर निज अस्तित्व को, करता चकनाचूरl अविश्वास से हो रहा, जग जीवन भयभीत जग जाए विश्वास तो, हो जग स्वर्ण पुनीत। असंतोष दुर्भावना, मन में रहे न … Read more

हिन्दी तो भारत की मिट्टी,पहल ऊपर से हो

महेश रौतेला **************************************************** शिक्षा नीति २०१९ के प्रारुप पर भाषा को लेकर बवाल……….. ये नाटक बाजी लग रही है। हिन्दी क्यों पढ़ें! क्या सरकारों ने हिन्दी(जहाँ हिन्दी प्रथम भाषा है) को रोजगार,शिक्षा,न्याय, प्रशासन में पूर्णतः(अंग्रेजी रहित) लागू कर दिया है! नहीं। वहाँ अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त कर दी है ?नहीं। केन्द्र सरकार की नौकरियों में … Read more

बेटी की आह सुनो

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** चाहे जो कानून हो,कोई भी सरकार। सोच न बदले स्वयं का,अंत नहीं व्यभिचारll शर्मनाक अमानवीय,निंदनीय आचार। मर चुकी इन्सानियत,निर्भय वह लाचारll मौत मिले कुछ इस तरह,काँपे उसकी रूह। सजा मिले शैतान को,निकल न पाए ऊह॥ कैसी बर्बादी सनक,घृणित काम की सोच। सीमा लांघी क्रूरता,नहीं दया दिल लोच॥ शर्महीन … Read more

नजराना

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** कायनात के मालिक से,नजराना धरा ने पाया, देखो सूरज फिर अम्बर दीप बनकर धरा पे आया। साथ वो अपने रौशन किरणों का नया सबेरा लाया, इसके आने से कायनात ने फिर इक नया आज पाया। शबनम सूख गई दृख्तों के पात पे, चहचहाहट चिड़ियों की होने लगी हर … Read more

मैं नील गगन का वासी

देवेन्द्र कुमार राय भोजपुर (बिहार)  ************************************************************* मैं नील गगन का वासी, मैं सदा अभय हूँ बिन बाधा निर्भय हूँ, नहीं चाहिए कृपा किसी की नहीं दया का भाव, गुलामी से अच्छा है रहे सदा अभाव, नहीं बनना है मुझे किसी का दास या दासी। मैं नील गगन का वासी। अपने श्रम से नीड़ बनाता तिनके … Read more

डॉ.रिखबचन्द राँका ‘कल्पेश’ को आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान

नई दिल्ली। साहित्य संगम संस्थान की व्याकरणशाला में ९ जून को ‘मुहावरे बने बावरे’ कार्यक्रम में डॉ.रिखब चन्द राँका ‘कल्पेश’ ने प्रतिभाग कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस उपलक्ष्य में आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यातिथि वरिष्ठ साहित्यकार राजेश कुमार तिवारी के कर कमलों द्वारा डॉ.राँका ‘कल्पेश’ (जयपुर) को ‘आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी’ सम्मान से सम्मानित किया … Read more

रोचक और ज्ञानवर्धक कृति `पेड़ लगाओ`

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** कविता लिखना जितना आसान समझा जाता है,उतना होता नहीं है। कवि को तात्कालिक परिस्थितियों का गहन अध्ययन करना पड़ता है,उन स्थितियों से जूझना पड़ता है। तब जाकर किसी रचना का निर्माण होता है,और फिर बाल साहित्य,बाल कविताओं का सृजन करना तो और भी कठिन कार्य है। जहां आजकल बड़े अखबारों … Read more

पत्थर की चाह

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’ रोहतक (हरियाणा) ******************************************************* बैठा था मैं नदी किनारे, पीठ लगा पत्थर के सहारे एक विचार मेरे मन आया, प्रभु तेरे विधान हैं न्यारे। नदी किनारे प्यासा पत्थर, कैसे पड़ा हताशा पत्थर कहा अनुभूति की भाषा में, तू क्या लगाये आशा पत्थर। क्या है तेरी चाह बता दे, निज हृदय की थाह बता … Read more

दिल का हाल किसे बतलाएं

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ किस-किसको बतलाएं, हाल ये दिल का। कहते हुए भी शर्माएं हाल ये दिल का, जिससे हमें हुआ है प्यार, कैसे बतलाएं उनको। कहीं सुनकर वो मेरी बात, रूठ न जाएंll वैसे भी इस दिल में गम का भंडार पड़ा है, इसमें से कुछ को कम किया जाए इजहार करके। या फिर … Read more