ग्रीष्मावकाश का बदलता स्वरुप:कल और आज

सुश्री नमिता दुबे इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************** एक समय था जब ग्रीष्म अवकाश में हम अपने नाना-नानी या किसी हिल स्टेशन या कहीं और घूमने का कार्यक्रम बनाकर चले जाते थे, ऐसा लगता था कि छुट्टियां कभी ख़त्म ही ना हो,किन्तु आज समय की रफ़्तार ने माता-पिता की आकांक्षाओं को भी पर लगा दिए हैं।प्रतिस्पर्धा के इस … Read more

हाय रे गरीबी

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** भूख में तरसता यह चोला, कैसे बीतेगा ये जीवन। पहनने के लिए नहीं है वस्त्र, कैसे चलेगा ये जीवन। किसने मुझे जन्म दिया, किसने मुझे पाला है। अनजान हूँ इस दुनिया में, बहुतों ने ठुकराया है। मजबूरी है भीख मांगना, छोटी-सी अभी बच्ची हूँ। सच कहूं बाबू जी, खिला … Read more

मिलना-रूठना…

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* उसने कहा- अगर देवी के दर्शन हो सकते हैं तो मैं मिलना चाहूँगा। मैंने कहा- मैं तो वापिस जा रही हूँ एक साल बीत गया। मैंने कहा- मुझे मिलना है तुमसे। उसने बहाने बना लिए, फिर वो बहाने ही बनाता रहा तीन साल तक। एक दिन मैंने कह दिया- मुझे अब … Read more

मुस्कराना जिन्दगी है..

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ फूल बनकर मुस्कराना जिन्दगी है, मुस्कुरा के गम भुलाना जिन्दगी हैl मिलकर लोग खुश होते हैं तो क्या हुआ, बिना मिले दोस्ती निभाना भी जिन्दगी हैll जिंदगी जिंदा दिलों की आस होती है, मुर्दा दिल क्या खाक जीते हैं जिंदगी। मिलना-बिछुड़ जाना तो लगा रहता है, जीते-जी मिलते रहना ही जिंदगी … Read more

एक बार और…

ऋतुराज धतरावदा इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* सोचता हूँ कुछ देर सुस्ता लूँ, झील किनारे बैठकर कहीं पीलूँ थोड़ा-सा मौन, खुद के अंदर उतरूँ जहाँ बरसों पहले, जाया करता था कभीl हर चीज को फिर सलीके से सजाऊँ, आईने को साफ कर वही पुराने कपड़े पहन, नजरभर खुद को भी देखूँ समय के साथ उग आई सलवटों पर … Read more

चार कुत्ते

राजबाला शर्मा ‘दीप’ अजमेर(राजस्थान) ******************************************************************************************** तीन कुत्ते आपस में बात कर रहे थे,चौथा कुत्ता चुप था। पहला कुत्ता बोला, -“तू चुप क्यों है,तेरा मालिक तो तुझे अपने बच्चे की तरह प्यार करता है। बढ़िया खाना खिलाता है।” दूसरा कुत्ता बोला,-“मेरा मालिक तो कंजूस है,पर मालकिन अच्छी है। मालिक से चुपचाप छिपाकर मुझे अच्छा खाना खिलाती … Read more

मच्छर

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** मच्छर को, कभी कम मत आंको। चूंकि, मच्छर घात लगाकर कभी वार नहीं करता। बल्कि, ललकारते हुए करता है आत्मघाती हमला, और चूस लेता है, मानव का रक्त अपनी जान की बाजी लगाकरl अब बताओ, करके गहन मंथन कि, क्या मच्छर उन तथाकथित अपनों से कहीं अधिक … Read more

भाईचारा

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* हार-जीत का वोट युद्ध था, कोई जीता-कोई हारा। दल दलदल को भूल सखे अब, अपना लो भाईचारा। जीत किसी की नहीं चुनावी, यह तो जनमत जीता है। राष्ट्रप्रेम का भाव जगा है। देख रहा है जग सारा। हार नहीं है यह विपक्ष की, यह तो बस गठबंधन हारा। जाति-धर्म अरु क्षेत्रवाद … Read more

अखबार में लपेटा खाद्य पदार्थ जहर से कम नहीं

अशोक कुमार सेन ‘कुमार’ पाली(राजस्थान) ******************************************************************************** भारत के लोग किसी चीज़ का इतना दुरुपयोग करते हैं कि वास्तव में कई बार वह चीज़ जिस उद्देश्य के लिए बनी,वह तिरोहित हो जाता है। मसलन अखबार पढ़ने के लिए होता है,पर उससे ज्यादा यह खाने-पीने की चीज़ों को परोसने और पैकिंग में काम आता है। फिर चाहे … Read more

कोयल की कुहूक

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** कोयल कुहूक-कुहूक कर बोली मोर पपीहा मेरे भाई, बंदर भालू ने दौड़ लगाई आपस में सब भाई-भाई। शेर-शेरनी ने ब्याह रचाया पंडित जी को घर पे बुलाया, हलुआ पूरी सेंवई बनाई जंगल में वो खूब लुटाया। हिरण मोर संग रास रचाया गजानंद को खूब खिलाया, तोते ने आवाज लगाई पिंजरे खोल,मुक्त … Read more