पायल की पीड़ा

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* मेरे पाँव की पायल भी, बेबस और मजबूर हो गयी… मुस्कुराने की चाहत थी, मगर उदास हो गयी। तुम्हारे इंतज़ार में यह, इस जहां से बेजार हो गयी है… खनकती इसकी सदा भी, दर्द के साज में बदल गई है। मचलती है बेपरवाह-सी, मगर एक आह भी संग आती है… आज … Read more

क्या कहें…

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ पल-पल तरसते थे, उस पल के लिए। वो पल ही रुका, कुछ पल के लिए। सोचा था उसे जिंदगी का, हसीन सपना बना लेंगे। पर क्या करें वो पल ही, रुका कुछ पल के लिएll प्यार तो हर कोई करता है, क्या प्यार को कोई समझता है। तीन अक्षर का शब्द … Read more

सलामत रहे ये आँचल

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** आँचल एक मखमली अहसास, बालक हेतु जागीर दुनिया की। माँ का आँचल मिले, तो गम उसके पास नहीं फटकते और मुस्कुरा उठता है बालक, माँ के आँचल तले। प्रेमिका के आँचल पर तो, कई प्रेमियों ने गीत लिख डाले दे डाली सलाह उड़ते आँचल को संभालने की। नायिका भी … Read more

तू दोस्त हमारा पुराना है…

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** तू दोस्त हमारा तो सबसे ही पुराना है, तेरे दिल में रहता हूँ,एक ही ठिकाना है। मुझसे न खफा हो मेरे दोस्त मेरे हमदम, रूठा यदि मैं तुझसे,तुझे ही मनाना है। आनन्द तुम्हारा हो या दोस्त मुझे मिले, रूठे फिर तो रूठे,ऐसा ही जमाना है। नाराज होकर कह देता है,मुझे … Read more

मन तरंग

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** मन तंरग यूँ खोने लगा, क्यों तुम्हें ढूंढने लगा आँखों में ना नींद है, ना नीद में आँखें कुछ नये सपने बुनने लगा। मन तरंग… बिखरी साँसें बिखरी जुल्फें, क्यों मन मेरा उलझने लगा हर पल राहों में तेरा चेहरा, मुझे दिखने लगा। मन तरंग… कह रही है सारी फिजाएं, कहां … Read more

घूँट

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** उसने पिए सदियों जितने घूँट अपमान के, समाज के आईने में स्वयं को खो दिया, दु:ख और निराशा के भीतर खोजती रही नये व्यक्ति नयी वस्तु, खुद को जोड़ने के सार्थक प्रयास में निरन्तर टूटती रही भोग हुए अपमान में, वह जो नवीन था वह कितना सहायक था, … Read more

लौट आ…

बुद्धिप्रकाश महावर मन मलारना (राजस्थान) **************************************************** कहते हैं, जिंदगी जिंदादिली का नाम है। फिर क्यों हार जाते हैं…? फिर क्यों टूट जाते हैं…? फिर क्यों कर लेते हैं खुदखुशी…? अपनी ही खुशियों का, घोंट लेते हैं गला। क्या तुम्हें जीने का हक नहीं…? क्या तुम पर किसी का हक नहीं…? फिर क्यों इंसान…? यूँ सोचता … Read more

सिमटी जिंदगी

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’  गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************** क्या कहें कि ना कहें जिंदगी बता, रिश्तों के इस जहां में खोजता है एक रिश्ताl दुनिया की भीड़ रिश्तों के इस जहां में, ख्वाबों चाहतों सी दौड़ती है जिंदगी तन्हाll गम-ख़ुशी की जिंदगी, मुश्किल पल दो पल यकीन, याराना क्या करूँ कि ना करूँ जिंदगी, बता जिंदगी को … Read more

वाह री जिन्दगी

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* अब सब अपना पलड़ा झाड़ रहे हैं, अपने अस्तित्व को ही न जाने किस रंग में ढाल रहे हैं। दिलचस्पी रही न अब राधा या श्री राम में, दो जून की रोटी के आगे पिज्जा-बर्गर निहार रहे हैं। सास-बहू के नाटक ने रामायण का पाठ भुलाया है, रूद्राभिषेक किसे कहते … Read more

तेरी याद

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** जब जब तेरी याद आती है, मन ही नहीं तन भी रोता है। जब भी तू दूर जाती है तो, ये मन भी अकेला होता है॥ तेरी यादों के संग ये दिल, हर पल तेरे साथ चलता है। आज पास नहीं तू मेरे तो, ये मन तेरे संग रहता है॥ जब-जब … Read more