गर ज़हीन है तो है

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** आदमी गर ज़हीन है तो है। सबको उस पर यक़ीन है तो है। सोचता वक़्त से बहुत आगे, सोच उसकी नवीन है तो है। तर्क गढ़ता नये-नये हर दम, ज़ह्न उसका महीन है तो है। आदमी कर जमा समाज बना, आदमी पुर यक़ीन है तो है। दूर … Read more

इश्क़ अंज़ाम

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** (रचनाशिल्प:२१२ २१२ २१२ २१२) याद आएं अगर एक पैगाम दो, नाम लेकर मेरा इश्क़ अंजाम दो। प्यार में जब कभी तुम तड़पने लगो, हिचकियों को सदा तुम मेरा नाम दो। छोड़ दो क्या जमाना कहेगा यहाँ, दिल सुकूँ जो मिले वही जाम दो। हम तुम्हें चाहते इस कदर हैं … Read more

बेवफा

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** बेवफा मुझको बता रहे हो, अपनी कहो क्या छुपा रहे हो। मेरी वफाओं को भूल कर के, जहर यह कैसा पिला रहे हो। इंतहा की हद हो गई थी, कह कर गए थे कल आ रहे हो। बेवफा कहना आसा बहुत है, अपनी वफा क्या निभा रहे हो। बेवफा … Read more

कहां है मुंसिफ…

प्रदीपमणि तिवारी ध्रुव भोपाली भोपाल(मध्यप्रदेश) **************************************************************************** वो बेग़ुनाह कहे खुदा तमाम कहां। कहां है मुंसिफ यार तामझाम कहां। फ़क़त इरादों में बसा रखा था जो, हमी हैं साहिब वो मगर ग़ुलाम कहां। उधार मांगी थी ज़रा-सी साँसें बस, किया ज़िबाह मगर खुदा-ए-आम कहां। सहर हुई औ रोज़ शाम शाम हुई, जो पुरखुलूस कराए दीद शाम कहां … Read more

चिराग बुझा दे हमें जरूरत नहीं

मनोज कुमार सामरिया ‘मनु’ जयपुर(राजस्थान) **************************************************** चिराग कब अँधेरों की कमजर्फ़ साजिशों से छला हैl जब तक रहा दम,चीरकर तम शिद्दत से जला हैl फासले मंजिल के दरमियाँ कम ही पड़ते रहे हैं सदा, दिल में बुलंद हौंसलों का जुनून जब भी पला हैl ताकेगी उनको रोशनी की हसीन लड़ियाँ शौक से, आकाश में दल … Read more

क्यूँ देखे तू चंदा

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** (रचनाशिल्प: काफ़िया-रा,रदीफ़-चाँद सा) क्यूँ देखे तू चंदा,खुद चेहरा तेरा चाँद सा, क्यूँ देखूँ मैं चंदा,जब प्यारा मेरा चाँद-सा। चाहत होगा चकोर का,क्या होगा भोर का, क्यूँ इंतजार करना,ये मुखड़ा तेरा चाँद-साl प्यार है संस्कार है,प्रियतम का इंतजार है, करवा चौथ पे,मनुहार कैसा तेरा चाँद-सा। निकल आओ चाँद,मामला है जज़्बात … Read more

मुझे बज़्म में तुम…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** मुझे बज़्म में तुम बुलाते हो साहबl मगर नाम भी भूल जाते हो साहब। जो तोड़ा है रिश्ता मुझे भूल जाओ, मेरा नाम क्यों गुनगुनाते हो साहब ? तुझे चाँद जबसे कहा है तभी से, मुझे दिन में तारे दिखाते हो साहब। सितम ही किया तुमने इतना ज़ियादा, मुझे … Read more

आपको ढूंढता किधर साहब

गोविन्द कान्त झा ‘गोविन्द राकेश’ दलसिंहसराय (बिहार) *************************************************************** मैं उधर से गया ग़ुजर साहब, थी मनाही जहाँ जिधर साहब। आसमाँ में ही हैं उड़े फिरते, आपको ढूंढ़ता किधर साहबl शाम ढलते नहीं निकलता अब, आज भी तो लगे है डर साहबl हमको गुमनाम ही रखा जब तो, आता फिर कैसे मैं नज़र साहबl चौड़ी तो … Read more

मंज़र नहीं देखा…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** भीतर की हलचलों का वो मंज़र नहीं देखाl सबने मुझे देखा,मेरे अंदर नहीं देखाl सब लोग मानते रहे हैं कोयला मुझे, हीरे को जौहरी ने भी छूकर नहीं देखाl हँसते हुए ही तो मुझे देखा है रात-दिन, अश्कों का मेरे तूने समंदर नहीं देखाl घायल जो मैं हुआ हूँ … Read more

जैसे बारिश से बेनूर…

सलिल सरोज नौलागढ़ (बिहार) ******************************************************************* वो इस कदर बरसों से मुतमइन है, जैसे बारिश से बेनूर कोई ज़मीन है। साँसें आती हैं,दिल भी धड़कता है, सीने में आग दबाए जैसे मशीन है। आँखों में आखिरी सफर दिखता है, पसीने से तरबतर उसकी ज़बीन है। अपने बदन का खुद किरायेदार है, खुदा ही बताए वो कैसा … Read more