खुद को जीत जाना ही आत्मसंयम

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)*************************************************** ‘आत्मसंयम’ का सहज और सरल अर्थ है अपने-आप पर,मन पर नियंत्रण। इसका शाब्दिक अर्थ जितना सरल प्रतीत होता है, वास्तविक जीवन में इसको प्रयोग में लाना और आत्मसात करना उतना ही कठिन है। इसकी महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण को गीता में इसके बारे … Read more

समानता,स्वतंत्रता और स्वछंदता में अंतर समझना अति आवश्यक

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** कुदरत ने यह सृष्टि नर और मादा से निर्मित की है,दोनों के अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक और बराबर हैं। नर-नारी दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। सबसे प्राचीन और विकसित सनातन संस्कृति तो इससे भी एक कदम आगे बढ़कर ‘यत्र नार्यास्तु पूज्यंते,रमंते तत्र देवता’ के सिद्धांत का प्रतिपादन करती है। … Read more

श्रेष्ठ अभिनेता रजनीकांत और फाल्के पुरस्कार की घोषणा का ‘संयोग’…!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** सवाल भारतीय फिल्म उद्योग और खासकर दक्षिण फिल्म उद्योग के चेहरे रजनीकांत को वर्ष २०१९ का प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार देने की घोषणा पर नहीं है,लेकिन उस ‘संयोग’पर जरूर है,जो आजकल राजनीति में बहुत ज्यादा ‘घटित’ हो रहा है। महानायक-कामयाब अभिनेता रजनीकांत की अपार लोकप्रियता,उनकी खास तरह की संवाद अदायगी और … Read more

भारत कुछ करके दिखाए

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पत्र के जवाब में पत्र लिखा,यह अपने-आपमें उल्लेखनीय बात है,लेकिन जवाब देने में उन्हें एक हफ्ता लग गया,यह भी विचारणीय तथ्य है। बड़ी बात यह कि पाकिस्तान के स्थापना दिवस पर श्री मोदी ने इमरान खान को बधाई दी। मोदी को … Read more

होली की यादें

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) **************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) विशेष… होली को त्यौहार मनाने का हर प्रदेश-शहर और गाँव का अपना तरीका है। आज अपने शहर की होली याद कर रहा हूँ।मध्यप्रदेश के बीना शहर में होली का त्यौहार मनाने का अपना ही तरीका है। यहाँ पर वैसे तो पांचों दिन होली खेली जाती है,परंतु रंग पंचमी … Read more

हौंसला रखिए,हँसने वाले तालियां भी बजाएंगे

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ********************************************** यह समाज है,जो अंधा-बहरा और लंगड़ा होने के साथ-साथ मनोरोगी भी है। इसकी विशेषता है कि यह जिन पर पहले हँसता है,बाद में उनकी सफलता प्राप्ति पर तालियां भी बजाता है। इसलिए आत्मनिर्भर कर्मठ व्यक्ति कभी हौंसला नहीं गंवाते और साहसी बन कर अपनी मंजिल की ओर यात्रा … Read more

प्रेम,सद्भावना और भाईचारे का त्यौहार

सुरेन्द्र सिंह राजपूत हमसफ़रदेवास (मध्यप्रदेश)****************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… बचपन में जबसे होश संभाला था,तबसे लगाकर आज तक होली के त्यौहार पर इस प्रचलित जुमले को सुनते आ रहे हैं-‘बुरा न मानो होली है,हम मस्तों की टोली है।’इसका आशय यह है कि,’आज होली का त्यौहार है,हम तुमको रंग लगाएंगे,तुमको इसका बुरा नहीं मानना है।’ … Read more

होली खुशियों को बांटने का अपूर्व अवसर

ललित गर्गदिल्ली ************************************** फागुन संग-जीवन रंग (होली)  विशेष… होली प्रेम,आपसी सद्भाव और मस्ती के रंगों में सराबोर हो जाने का अनूठा त्यौहार है। ‘कोरोना’ महामारी के कारण इस त्यौहार के रंग भले ही फीके पड़े हैं या मेरेे-तेरे की भावना,भागदौड़,स्वार्थ एवं संकीर्णता से होली की परम्परा में बदलाव आया है। परिस्थितियों के थपेड़ों ने होली … Read more

सामाजिक समरसता का पर्याय होली

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* फागुन संग-जीवन रंग (होली) विशेष… होली सामाजिक समरसता का त्यौहार है। इसमें कोई किसी से भेदभाव नहीं करता। रंगों के इस त्यौहार में अमीर-गरीब एक जगह इकठ्ठे होकर रंग-गुलाल खेलते हैं, पर समय के साथ इसमें बहुत परिवर्तन हो गया है। पर्यावरण के बचाव के कारण लकड़ियों का जलाना कम होता जा रहा … Read more

रूह का रंगरेज़

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************************* फागुन संग-जीवन रंग (होली) स्पर्धा विशेष… कविता,जो प्रीत के साथ ही बी.ए. फाइनल ईयर में थी,ने कहा-‘प्रीत! कौन सी किताब पढ़ रही है ? आज तू संस्कृत की कक्षा में भी नहीं आई। अब जल्दी चल,आज गृहविज्ञान की प्रयोगात्मक लैब में जाना है।’तभी प्रीत को अहसास हुआ कि अरे! इतना … Read more