पाॅलिथीन की थैलियाँ

सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’ कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** पाॅलिथीन की थैलियाँ,खाकर मरती गाय। अब इन पर प्रतिबंध का,जल्दी करें उपाय॥ पाॅलिथीन की थैलियाँ,करती नाली जाम। मच्छर जिससे पनपकर,जीना करें हराम॥ पाॅलिथीन की थैलियाँ,जले तो वायु भ्रष्ट। भू के उर्वर तत्व भी,गड़कर करती नष्ट॥ * पाॅलिथीन की थैलियाँ,पैदा करती रोग। हो सब खाद्य पदार्थ में,इनका बन्द प्रयोग॥ * पाॅलिथीन … Read more

देश से बढ़कर कुछ नहीं

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** राजनीति प्रतिकूलता,देशविमुख फरमान। चाहे जितना यतन कर,सफल न हो अरमान॥ देश से बढ़ कर कुछ नहीं,समझो रे गद्दार। छोड़ो दंगा गुंडई,बनो वतन खु़द्दार॥ लोकतंत्र मतलब नहीं,तोड़ोगे तुम देश। गाओगे नापाक को,नहीं बचोगे शेष॥ कोसो तुम सरकार को,ये तेरा अधिकार। पर तोड़ो मत देश को,वरना हो धिक्कार॥ आज़ादी अभिव्यक्ति … Read more

ओस की बूँदें

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** धरती पर है ओस की,बूँदें देख हजार। मोती आभा हैं लिए,किरणों की बौछार॥ रात चाँदनी में दिखे,सुन्दरतम् मनुहार। दुग्ध धवल-सी ज्योत्सना,छाई छटा बहार॥ रातों में ठंडी हवा,बहती है पुरजोर। परिणित होते बर्फ में,देख ओस चहुँओर॥ देख चमकती है धरा,चन्द्र किरण के साथ। शीतलता अहसास भी,जब छूते हैं हाथ॥ … Read more

फूल और शूल

हरीश बिष्ट अल्मोड़ा (उत्तराखण्ड) ******************************************************************************** फूल बन खिले रहो कांटों संग मिले रहो, खूशबू से मिल सारा जग महकाइये। काँटों का न छोड़े साथ फूलों की है अच्छी बात, अपनों के साथ मिल खुशियां मनाइये। दु:ख-सुख मिल बांटो खुशी-खुशी दिन काटो, राह भूले-भटकों को , राह भी दिखाइये। अपनों के संग प्यारे दुनियां के रंग … Read more

प्रेमआँसू सप्तक

  अनुपम आलोक उन्नाव(उत्तरप्रदेश) ****************************************************************** कुछ आँसू पीड़ा जनित,कुछ में हर्ष अपार। कुछ में राधा की विरह,कुछ कान्हा का प्यारll कुछ आँसू में दिख रहा,मीरा का विश्वास। कुछ आँसू कातर दिखे,द्रपुद सुता के पासll स्वारथ वश बहते दिखे,कुछ छलिया दृगकोष। कुछ नयनों से छलक कर,देते हैं संतोषll कुछ आँसू बहते मिले,जिनमें था संताप। कुछ! दोषी … Read more

रहे चतुर्दिक् चौकसी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** करते सब दकियानुसी,छिपा मनसि है चोर। छल कपटी नेता प्रजा,दे फ़साद झकझोर॥ जले शान्ति धन सम्पदा,उजड़े वतन सुजान। देशद्रोह ज्वालामुखी,महाज्वाल शैतान॥ लोभी लुच्चा देश में,फैलाता अफवाह। खाने के लाले पड़े,बन फ़साद गुमराह॥ निर्भय वे कानून से,मरने को तैयार। फँस सिक्कों के जाल में,नाबालिग मँझधार॥ खाक राष्ट्र की अस्मिता,प्रगति … Read more

सूरज आया इक नया

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे मंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** सूरज आया इक नया,गाने मंगल गीतl प्रियवर अब दिल में सजे,केवल नूतन जीतll उसकी ही बस हार है,जो माना है हारl साहस वाले का सदा,विजय करे श्रंगारll बीते के सँग छोड़ दो,मायूसी-अवसादl नवल बनेगा अब धवल,देगा मधुरिम यादll खट्टी-मीठी लोरियां,देकर गया अतीतl वह भी था अपना कभी,था प्यारा-सा मीतll … Read more

सहारा

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** इष्ट कृपा सबको मिले,मन में रख विश्वास। जीवन में श्री नाथ ही,बनें सहारा खासll मात-पिता ही जन्म दे,पकड़े हाथ चलाय। बने सहारा पुत्र का,सारे फर्ज निभायll हर संकट में मात-पितु,अपने हाथ बढ़ाय। बने सहारा पुत्र का,जीवन सफल बनायll बनो सहारा देश का,अपनाओ तुम फर्ज। मातृभूमि का है चढ़ा,तुझ पर कोई कर्जll … Read more

लानत है नेतागिरी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** आहत है मेरी कलम,गद्दारों को देख। खंडन को नेता तुले,देश दुखी क्या लेखll आज बहुत तारक वतन,हैं कहँ तारकनाथ। तोड़ रहे अपने वतन,कहाँ विश्व का साथll निगरानी निज देश का,राष्ट्रसंघ आह्वान। लानत है नेतागिरी,किया राष्ट्र अपमानll हंगामा बरपा वतन,रिफ्यूजी उपवेश। वोटबैंक के आड़ में,लूट रहा है देशll गतिविधियाँँ … Read more

कैसा मानव अधिकार

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** पुलिस सिपाही चुप रहें, कैसा भारत यार। पत्थरबाजी हो गया, मानव का अधिकार॥ अरे सिपाही की यहां, सुनता कौन‌ पुकार। पत्थरबाजों के लिये, बने सभी अधिकार॥ मेरे भारत देश का, कैसे हो श्रृंगार। पत्थरबाजों को मिले , यहाँ अलौकिक प्यार॥ घायल सैनिक हो रहे, नजर न आते यार। नेता पत्थरबाज … Read more