तपती धरती
डॉ.शैल चन्द्रा धमतरी(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** तपती धरती,जल रहा आसमान, घटता जल,सब हैं हैरान। लुप्त होती हरियाली, नहीं दिखती प्रकृति की लाली। नीम-पीपल की छाँव तले, अब न कोई झूला झूले। बाग-बगीचे में न कोई मिले, पेड़-पौधों को सब भूले। शीतल न होती अब सिंदूरी साँझ, धरती हो रही अब बाँझ। सूरज अब डराने लगा है, मन … Read more