लम्हें

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** वो बीते लम्हें बहुत याद आते हैंl भूलना चाहते पर भूल न पाते हैं। उन बातों का दिल पर आज इतना असर- उन लम्हों को गीत-ग़ज़ल में गाते हैंl परिचय–मोहित जागेटिया का जन्म ६ अक्तूबर १९९१ में ,सिदडियास में हुआ हैl वर्तमान में आपका बसेरा गांव सिडियास (जिला भीलवाड़ा, राजस्थान) हैl … Read more

गर्मी में…

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- झुलस रहे हैं पौधे सारे झुलस रही हैं सभी लताएँ, सारे तन को जला रही हैं दक्षिण की ये गर्म हवाएँ, जल से अपनी प्यास बुझा ले… आ राही थोड़ा सुस्ता लेl जेष्ठ महीना तपती धूप सूख गये हैं सारे कूप, बालू रेत में चला ना जाए कैसे अपनी … Read more

लायल रहे

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** जाति मज़हब देखकर पागल रहे। सद्गुणों के जो नहीं कायल रहे। जो हमें भूला रहा हर दौर में, हम उसी के प्यार में पागल रहे। बूँद बरसी इक न मेरे खेत में, आसमां पेे गो बहुत बादल रहे। जो बुज़ुर्गों ने दिये थे कल मुझे, ज़िन्दगी भर … Read more

बबूल

मनोरमा जैन ‘पाखी’ भिंड(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* मन के मरुथल में हैं बो दिये बबूल, करते तन छलनी पर हैं मुझे कबूल। सौगात मिली है जो मुझको कैसे करूँ इंकार, सारे गम हैं करते हम पर अब अपना अधिकार। चुभते हैं दिल में हरपल बनकर जैसे शूल, करते तन छलनी पर हैं मुझे कबूल…॥ मैंने एक ख्वाब … Read more

उत्कर्ष

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* आत्मदृष्टि पाना ही दु:ख हरण का मार्ग है, करम ताे जीवन फिर क्याें पीड़ा की आग है ? क्यों सोचता है मानव हर पल बस हर्ष हाे, जीवन में आते-जाते कितने ही संघर्ष हैं..। सदा चलना लय ताल पे, यही ताे उत्कर्ष है॥ परिचय- डॉ.आशा गुप्ता का लेखन में … Read more

मन

सुरेन्द्र सिंह राजपूत हमसफ़र देवास (मध्यप्रदेश) ******************************************************************************* मन बड़ा बलवान है ये, मन बड़ा बलवान। कभी तो लगता ईश्वर है, ये कभी लगता शैतान। मन बड़ा बलवान है ये मन… लाख सम्भाला इसको बाँधा, फ़िर भी नहीं पकड़ में आता। जतन किए कि बंधा रहे ये, फ़िर भी फ़िसल-फ़िसल ही जाता। कभी धूप में कभी छाँव … Read more

इश्क का रोग

सौदामिनी खरे दामिनी रायसेन(मध्यप्रदेश) ****************************************************** इश्क का रोग बुरा है,इश्क न करिये कोय। जो इस जग में इश्क करे,खूं के आँसू रोय॥ सवैया- सखी इश्क का रोग मोहे ऐसो लगो है, अपने होश गवां बैठी मैं। जहाँ देखूँ वहाँ छवि पिया की, इश्क का रोग लगा बैठी मैं। मैं गिरधर की प्रेम दीवानी, गिरधर के गुण … Read more

कभी नहीं जान पाओगे

मोनिका गौड़’मोनिका’ बीकानेर (राजस्थान ) ************************************************** मैंने जो जाना लिखा जो पहचाना लिखा, जो ना जाना,ना पहचाना वो महसूस कर लिखाl जानने,लिखने और पहचानने के बीच फिसलते रहे कुछ अनुभव, जो सिर्फ गालों पर उन्हें सूखे अश्कों में लिखाl और अपने ही हाथों से मिटा मुस्कान में लपेट कर पेश कर दिया, चाय के साथ … Read more

कहते पागल हैं

बिनोद कुमार महतो ‘हंसौड़ा’ दरभंगा(बिहार) ********************************************************************* (रचनाशिल्प:बहर २१२२ २२२२ २२) सत्य बोलूँ तो कहते पागल है, झूठ बोलूँ तो कहते पागल है। बात इतनी ही तो अब सब बोले, जो न बोलूँ तो कहते पागल हैll काम करता हूँ मन से तब कहते, काम के पीछे तो वह पागल है। बैठ घर में यूँ ही … Read more

महँगाई डायन

अनंत ज्ञान गिरिडीह (झारखंड) ********************************************************************** महँगाई डायन बिग बाज़ार में, खरीददारी कर रही है हज़ार मेंl क्या ठाट-बाट से बाज़ार आई है, देखो बड़ा-सा पर्स भी साथ लाई हैl लेकर आई है सूची लंबी-चौड़ी, देखते बन रही है उसकी भागा-दौड़ीl कभी इस तल्ले से उस तल्ले पर, कभी कपड़ों पर,तो कभी श्रृंगार परl जी भर … Read more