काव्यभाषा
वृक्ष लगायें
डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** आओ हम सब मिलकर के, इस धरती का श्रृंगार करें। घर-बाहर सब पेड़ लगा कर, तन-मन शुद्ध सुखी पायेंll फूल लगा कर हम सुगंध से, इसकी हवा को महका देंगे। फूल खिलेंगे रंग-बिरंगे, मिल इसका श्रृंगार करेंगे। हर ऋतु में नव फूल खिलेंगे, देख सुमन-सा मन पायें। आओ हम सब … Read more
मन तरंग
पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़) ****************************************************************************** मन तंरग यूँ खोने लगा, क्यों तुम्हें ढूंढने लगा आँखों में ना नींद है, ना नीद में आँखें कुछ नये सपने बुनने लगा। मन तरंग… बिखरी साँसें बिखरी जुल्फें, क्यों मन मेरा उलझने लगा हर पल राहों में तेरा चेहरा, मुझे दिखने लगा। मन तरंग… कह रही है सारी फिजाएं, कहां … Read more
दिल को खुजला रहे हैं
वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** जैसे खुजली में या हम किसी दाद में, दिल को खुजला रहे हैं तेरी याद में, भेज दो प्यार के नीम की तुम दवा- तुम खिलाना मिठाई कभी बाद में। परिचय-वकील कुशवाहा का साहित्यिक उपनाम आकाश महेशपुरी है। इनकी जन्म तारीख २० अप्रैल १९८० एवं जन्म स्थान ग्राम महेशपुर,कुशीनगर(उत्तर … Read more
घूँट
डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात ) **************************************************************** उसने पिए सदियों जितने घूँट अपमान के, समाज के आईने में स्वयं को खो दिया, दु:ख और निराशा के भीतर खोजती रही नये व्यक्ति नयी वस्तु, खुद को जोड़ने के सार्थक प्रयास में निरन्तर टूटती रही भोग हुए अपमान में, वह जो नवीन था वह कितना सहायक था, … Read more
देशभक्ति
इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** आसमान को छूना दूर की बात है। उलझाओ मत बची थोड़ी-सी रात है।। मैं थक चुका हूँं तुम्हें मार डालूँंगा, स्वयं मर गया वह भी तो आघात है। आखरी चरण में खेल रहा हूँं देखो, देशभक्ति काँटों से सजी बारात है। दर-दर की ठोकरें पुरस्कार हैं भाई, … Read more
लौट आ…
बुद्धिप्रकाश महावर मन मलारना (राजस्थान) **************************************************** कहते हैं, जिंदगी जिंदादिली का नाम है। फिर क्यों हार जाते हैं…? फिर क्यों टूट जाते हैं…? फिर क्यों कर लेते हैं खुदखुशी…? अपनी ही खुशियों का, घोंट लेते हैं गला। क्या तुम्हें जीने का हक नहीं…? क्या तुम पर किसी का हक नहीं…? फिर क्यों इंसान…? यूँ सोचता … Read more
सिमटी जिंदगी
एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’ गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************** क्या कहें कि ना कहें जिंदगी बता, रिश्तों के इस जहां में खोजता है एक रिश्ताl दुनिया की भीड़ रिश्तों के इस जहां में, ख्वाबों चाहतों सी दौड़ती है जिंदगी तन्हाll गम-ख़ुशी की जिंदगी, मुश्किल पल दो पल यकीन, याराना क्या करूँ कि ना करूँ जिंदगी, बता जिंदगी को … Read more
वाह री जिन्दगी
नताशा गिरी ‘शिखा’ मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* अब सब अपना पलड़ा झाड़ रहे हैं, अपने अस्तित्व को ही न जाने किस रंग में ढाल रहे हैं। दिलचस्पी रही न अब राधा या श्री राम में, दो जून की रोटी के आगे पिज्जा-बर्गर निहार रहे हैं। सास-बहू के नाटक ने रामायण का पाठ भुलाया है, रूद्राभिषेक किसे कहते … Read more
तेरी याद
मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** जब जब तेरी याद आती है, मन ही नहीं तन भी रोता है। जब भी तू दूर जाती है तो, ये मन भी अकेला होता है॥ तेरी यादों के संग ये दिल, हर पल तेरे साथ चलता है। आज पास नहीं तू मेरे तो, ये मन तेरे संग रहता है॥ जब-जब … Read more