राह दिखाती सदा
अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** ‘विश्व पुस्तक दिवस’ विशेष… ‘पुस्तकें’,दोस्त हमारीसिखाती है जिंदगी,जीते हमजंग। ‘पुस्तकें’,गुरु-ज्ञानअनगिनत नसीहत देतीलाती रौशनीसफलता। ‘पुस्तकें’,परिवार भीअकेलेपन की साथी,छोड़ती नहींहाथ। ‘पुस्तकें’,चिंतन करातीघर, समाज, देश,बोलते हमसच्चाई। ‘पुस्तकें’,झूठी नहींइंसान की तरह,सच कहतीदुनियादारी। ‘पुस्तकें’,महकाती सदाउदास मन को,राह दिखातीभविष्य। ‘पुस्तकें’,दूरियाँ मिटातीसत्य पर चलाती,आदर्शवाद हैआशीर्वाद। ‘पुस्तकें’,साहित्य समाजतकनीक का समय,जिन्दा हैअस्तित्व। ‘पुस्तकें’,उड़ना सिखातीदेती कल्पना पंख,गहरा प्रभावमन। ‘पुस्तकें’,बचाती बचपनबाँटती संस्कृति-संस्कार।सदा पढ़ो,बढ़ो॥