शरणार्थी

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’  गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************** अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. शरणागत धर्म-सक्षम साहस, कर्मवीर वचन दृढ़प्रतिज्ञ पालक, रक्षक कहलाता है। खुद के दायित्व, कर्तव्यों का सात्विक विशुद्ध अंतर मन से करता है, युग पुरुषार्थ बन जाता। याचक उसकी शरण में जब भी आता, उसकी रक्षा में पराक्रम का, पुरुष युग शरणागत की मान-सम्मान मर्यादा की … Read more

शरणार्थियों का हाल कोई हमसे पूछे

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी दिवस विशेष……….. जो कभी शरणार्थी नहीं रहे, वे हैं शरणार्थी होने के दर्द से नितांत छूछे, शरणार्थियों का क्या हाल होता है… कोई हमसे पूछे। शरणार्थी नाम सुनते ही, याद आ जाता है १९४७ का खौफ़नाक नज़ारा, पल भर में ही क्या हाल हुआ अपना देश ही नहीं रहा, … Read more

श्रृंगार

अर्चना पाठक निरंतर अम्बिकापुर(छत्तीसगढ़) ***************************************************************************** नारी की शोभा बढ़े,लगा बिंदिया माथ, कमर मटकती है कभी,लुभा रही है नाथ। कजरारी आँखें हुई,काजल जैसी रात, सपनों में आकर कहे,मुझसे मन की बात। कानों में है गूँजती,घंटी-झुमकी साथ, गिर के खो जाए कहीं,लगा रही पल हाथ। हार मोतियों का बना,लुभाती गले डाल, इतराती है पहन के,सबसे सुंदर माल। कंगन … Read more

प्रेम-स्नेह खो गया …

निशा गुप्ता  देहरादून (उत्तराखंड) ************************************************************* कैसा प्रेम,किसका प्रेम, कौन करे किस पर विश्वास। प्यार शब्द अब खो गया, हो गया अब ये आभास। हमेशा गद्दारी उसने ही की, जिस पर किया हमने विश्वास। प्रेम-स्नेह से सींच कर बागिया एक बनाई थी, कलियाँ कोई उस उपवन की बेदर्दी से नोंच गया। सो गई नन्हीं परी, घुट … Read more

दीमक बनकर चाट रहा स्वांग

मालती मिश्रा ‘मयंती’ दिल्ली ******************************************************************** बेटियाँ बचाने का नारा, सुनकर माँ हरषायी थी। तब ले के बिटिया की बलाएँ, वह ममता बरसायी थीll नहीं जानती थी वह माता, यहाँ दरिंदे रहते हैं। दरिंदगी की हदें पार कर, खुद को मानव कहते हैंll नन्हीं कलियाँ नहीं सुरक्षित, अपने ही गलियारों में। जीना उनका दुष्कर हो गया, … Read more

कैसे सहन करें

अमल श्रीवास्तव  बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ********************************************************************* मानवता की पीड़ा का,आक्रोश किस तरह सहन करें, अपने हाथों से अपने पौरुष का कब तक,क्षरण करें| लोकतन्त्र के नाम जहाँ पर,रक्त बहाया जाता हो, जहाँ धर्म के आलय में,गोमांस पकाया जाता हो, संविधान के पन्ने जब,ईधन की भांति सुलगते हो, अमृतरस के बदले में,मदिरा के जाम छलकाते हो| ऐसे में … Read more

सीख

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- कर्म कर फल पाएगा, व्यर्थ कुछ ना जाएगाl सार्थक जीवन बिता ले, वर्ना फिर पछताएगाl चार दिन की जिन्दगी, कब समझ में आएगाl कर्म अच्छा या बुरा हो, जस किया तस पाएगाl झूठे हैं रिश्ते ये नाते, टूट ये भ्रम जाएगाl कर्म कर ले पुण्य का तू, साथ वो … Read more

चाँदनी

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* तुम चाँदनी में नहा करके आई हुई हो, ख़ुदा की कसम क्या गज़ब ढा रही हो। गालों को चूमें ये जुल्फें जो तेरी, हौले से इनको हटा क्यों रही हो। दीवाना हूँ मेँ इन आँखों का तेरी, पलकों का पनघट छुपा क्यों रही हो। है चाँदनी-सा शीतल ये रूप … Read more

कैसे कह सकते हो ?

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* कभी देखा है मजदूर को, खाली पेट सिर पर तसला उठाते ? कभी चखा है स्वाद सूखी रोटियों का, कभी गुजारी हैं रातें पानी को पीकर ? कभी गिरे हो भूख से चक्कर खाकर सीढ़ियों से, कभी सुनी है बेवजह मालिकों की गाली ? कभी काम के बाद नहीं पाए हो … Read more

अविश्वास

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** अविश्वास है घात की, घर्म आस्था तथ्य मानव में ईश्वर कहीं, रहता छिपा अवश्य। अविश्वास वह बूंद है, , जो समुद्र से दूर होकर निज अस्तित्व को, करता चकनाचूरl अविश्वास से हो रहा, जग जीवन भयभीत जग जाए विश्वास तो, हो जग स्वर्ण पुनीत। असंतोष दुर्भावना, मन में रहे न … Read more