स्त्री

प्रज्ञा गौतम ‘वर्तिका’ कोटा(राजस्थान) ********************************************* स्त्री… स्त्री-गर्भ से प्रस्फुटित वह अंकुर, जो पुष्पित-पल्लवित हो उठता है बिना सींचे भी, गमक उठता है घर-भर पोसती है वह आँचल की छांव तले पीढ़ियों को, बिना जमाए अपनी जड़ें किसी धरती पर। स्त्री… स्नेह की रेशमी डोर, रेशा-रेशा बिखर कर तिरती रहती है, जाने कितने रिश्तों में जाने … Read more

गंगा की दुर्दशा

दीपक शर्मा जौनपुर(उत्तर प्रदेश) ************************************************* हे हिमतरंगिणी भगवती गंगे निर्मल नवल तरंगें, मैंने देखा था तुम्हें निकलते हुए हिमालय की गोद से अति चंचल, मधुर शीतल, धँवल चाँदनी-सी सुंदर। भगीरथ के दुर्गम पथ पर लहराती चली जा रही थी, पर क्या पता था कि मंजिल तक पहुँचते-पहुँचते, तू इतनी शिथिल और मलिन हो जाएगी। हे … Read more

बाल विवाह अभिशाप

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** बाल विवाह है अपराध, लड़की के लिए अभिशाप। बोझ न समझो बेटी को, पढ़ने दो,आगे बढ़ने दो। कम उम्र में करनी शादी, उसके जीवन की बर्बादी। बाल विवाह कुप्रथा है, इसे नहीं अपनाओ तुम। होने दो विकास उसका, जीने की आजादी दो। न दो बिटिया को सजा, उसका जीवन सँवारो … Read more

वृतिका

कपिल कुमार जैन  भीलवाड़ा(राजस्थान) ***************************************************************** आज शाम को द्वार पे विदा कर के, ज्यों ही रात्रि के आरम्भ में मैं चांद के आगोश में समाया, थकान से बोझिल पलकों ने मुझे मेरी ‘वृतिका’ से मिलवाया, ख़्वाब में आई एक मूरत कुछ जानी कुछ अनजानी-सी, कुछ सकुचाई फिर धीरे से मुस्कुराई, आप कौन ? इस सवाल … Read more

अपनी धुन

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** कोई मैं तो अपनी ही धुन करना दुनिया से क्या ? भक्ति रस लागी लगन करना दुनिया से क्या ? मेरी भक्ति का एतबार कर लो, तुम भी संगीत से प्यार कर लो बढ़ा सरगम में है दम, करना दुनिया से है क्या ? मेरी भक्ति का एतबार कर … Read more

क्यों करता हूँ कागज काले…

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’ बूंदी (राजस्थान) ****************************************************************** क्यों करता हूँ कागज काले ? बैठा एक दिन सोच कर यूँ ही, शब्दों को बस पकड़े और उछाले। आसमान यह कितना विस्तृत, क्या इस पर लिख पाऊंगा! जर्रा हूँ मैं इस माटी का, माटी में मिल जाऊंगा। फिर भी जाने कहां-कहां से, कौंध उतर-सी आती है। … Read more

दिल से जो प्यार करते हैं…

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ दिल के झरोखों से, सब कुछ दिखता है। तभी तो दिल हमारा, एकदम साफ रहता है। तभी तो प्यार के लिए, दिल मेरा उमड़ता हैll दूर होकर भी आप मेरे, बहुत करीब जो रहते हो। लगती है चोट तुमको, दर्द हमें महसूस होता है। क्या इसे ही दो दिलों का, लोग … Read more

प्रार्थना

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** हमको चरणों में लगा दो, हे माँ तेरी शरण आये। खुशी के तुम दीप जला दो, श्रद्धा के हम फूल लाये। हम बालक तेरे पुजारी, करें हम तन-मन से वन्दन। अम्बर से ज्ञान बरसा दो, सबका महक जाए जीवन। जीवन में रौशनी भर दो, दे दो प्यार का तुम सागर। प्रकाश … Read more

तुम्हें पाने की आस

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* तुम हो मेरा वो क्षितिज, जो दूर होकर भी मुझसे कहता…मेरा है। तुम मानो ठहरे हो, इस उम्मीद में कि यूँ ही रोज चलते-चलते, मैं पहुँच सकूँ किसी रोज तुम तक, और पा सकूँ तुम्हें अपने पास,अपने साथ फिर भर उठूँ मैं तुम्हें अपने दामन में, जैसे भर उठते हैं अंधेरे … Read more

जीवन दर्शन

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* प्रकृति का अदभुत दृश्य, वृक्ष डाल पे लगे दो पत्ते, एक सूखा मुरझाया पत्ता, टूट गया डाली सेl एक ने पाया जीवन स्पंदन, हरा हो गया एक अंत की ओर चला हैl एक तरफ़ आरंभ हो रहा, एक काल के मुख में जाता, एक जीवन संचार हो रहाl समय की … Read more