वट-सावित्री की वेदी पर

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र) पटना (बिहार) ****************************************************************************** मेरे गाँव का यह बरगद पेड़,मुझसे बहुत बड़ा है। मैं अब तेरासी ग्रीष्म को पार करनेवाला ही हूँ। खैर,बात बरगद पेड़ की उठी थी तो जब मैं बच्चा था,वट-सावित्री व्रत-पूजा के दिन मैं भी अपनी माँ के साथ इस पेड़ के पास जाता था और माँ की … Read more

देश की समृद्धि में मील का पत्थर ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** भारत में संस्कारों का सूर्य इसीलिए अस्त नहीं होता,क्योंकि हम अपनी परम्परा को बार-बार दोहराते हैं और अनुसरण में भी लाते हैं। हम सिर्फ अपने लिए काम नहीं करते हैं, अपने परिवार के लिए नहीं कमाते हैं,अपनी जाति या धर्म के लिए दान नहीं देते हैं,हम संसार के सभी प्राणियों … Read more

तात्कालिक ‘तालाबंदी’ को स्थायी नशाबंदी में क्यों नहीं बदला जाए ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** ‘तालाबंदी’ को ढीला करते ही सरकार ने २ उल्लेखनीय काम किए। एक तो प्रवासी मजदूरों की घर वापसी और दूसरा शराब की दुकानों को खोलना। नंगे-भूखे मजदूर यात्रियों से रेल का किराया वसूल करने की इतनी कड़ी आलोचना हुई कि उनकी यात्राएं तुरंत निःशुल्क हो गईं लेकिन जहां तक शराब … Read more

‘कोरोना’,तेरा कितना रोना!

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** भारत वर्ष कृषि प्रधान,श्रमिक प्रधान,भूख प्रधान,झूठ प्रधान इत्यादि कितने प्रधान के साथ आबादी प्रधान देश है।यहाँ जन्म लेने वाला महान होता है,क्योंकि स्वर्ग का दूसरा नाम कश्मीर है और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इसीलिए भारत स्वर्ग है। ऐसा सुना जाता है कि स्वर्ग में कोई भी कष्ट नहीं होता … Read more

`आत्मनिर्भर भारत` के सपने और चुनौतियां

गोपाल मोहन मिश्र दरभंगा (बिहार) ******************************************************************************** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने `कोरोना` प्रकोप से त्रस्त,आर्थिक नजरिए से ध्वस्त और अंतर्मन से जले-भुने भारतवासियों के लिए २० लाख करोड़ रुपए के जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है,वह बदलते वक्त के लिहाज से दूरदर्शितापूर्ण कदम है। साथ ही जितनी चतुराई से उन्होंने स्थानीय को आवाज यानि `लोकल … Read more

श्रम कानूनों में बदलाव:काम देंगे,या उसे छीन लेंगे..?

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** क्या विडंबना है कि,`कोरोना` संकट में जहां प्रवासी मजदूरों की बदहाली और विवशता देख पूरा देश सिहर रहा था,वहीं ६ राज्यों ने ताबड़तोड़ तरीके से श्रमिक हितैषी कानूनों को बदल डाला। `तालाबन्दी` के बीच किए गए इस दूरगामी फैसले से नया राजनीतिक घमासान और आशंका का माहौल बन गया है। कांग्रेस … Read more

परिवार की खुशी में ही अपनी खुशी

प्रो.स्वप्निल व्यास इंदौर(मध्यप्रदेश) **************************************************** ‘विश्व परिवार दिवस’ १५ मई विशेष…….. परिवार मनुष्य के जीवन का बुनियादी पहलू है। व्यक्ति का निर्माण और विकास परिवार में ही होता है। परिवार मनुष्य को मनोवैज्ञानिक सुरक्षा प्रदान करता है। व्यक्तित्व का विकास करता है। प्रेम,स्नेह,सहानुभूति,परानुभुति आदर-सम्मान जैसी भावनाएं सिखाता है।धार्मिक क्रियाकलाप सिखाता है। धर्म स्वयं में नैतिक है। … Read more

संयम व अहिंसा का प्रयोग है कारगर

आचार्य डाॅ. लोकेशमुनि नई दिल्ली(भारत) ************************************************************************* समूह और समुदाय में शांति रहे,सौहार्द रहे, आपसी मेल-मिलाप रहे,यह जरूरी है,लेकिन समाज में अशांति ज्यादा है,तनाव ज्यादा है,संघर्ष ज्यादा है,डर ज्यादा है। दो होकर रहना संघर्ष में जीना है और यह आधुनिक समय की बड़ी समस्या है। इसके कारणों की खोज लगातार होती रही है। रुचि का भेद,विचार … Read more

वक्त का चमत्कार

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** वायु की तरह ही वक्त के भी कोई सिरे-किनारे या छोर नहीं होते। युगों-युगों से अब तक इस पल तक वक्त की गति पर कोई परिवर्तन नहीं हुआ। वक्त न तो कभी थमा,न ही इसकी गति बढ़ी। हाँ,इतना जरूर होता है कि वक्त स्वयं को बदलकर अपने दायरे … Read more

आमजन का विश्वास जीतें सरकारी चिकित्सक

विनोद वर्मा आज़ाद देपालपुर (मध्य प्रदेश)  ************************************************ शासकीय स्तर पर मिलने वाली सुविधाओं को अक्सर लोग नज़र अंदाज़ करते हैं,यथा-सरकारी अस्पतालों में जाने की बजाय ‘नीम हकीम खतरा जान’ के पास जाना ज्यादा पसंद करते हैं,पैसा भी लुटाते हैं,पर चिकित्सकीय परीक्षा पास करने के पश्चात कई वर्षों की पढ़ाई,प्रयोग,चीर-फाड़ के बाद एक बेशकीमती चिकित्सक तैयार होता … Read more