धीरज रखो

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* चंद्र ग्रहण को देखकर, मन में उठे विचार। कोई अछूता न बचा, समय चक्र की मार॥ चंदा,सूरज को ग्रहण, देता प्राकृत चक्र। इसी भाँति इंसान को, समय सताता वक्र॥ धीरज से कटता ग्रहण, होय समय बदलाव। मानुष मन धीरज रखो, ईश्वर संग लगाव॥ सृष्टि सौर संयोग में, मत बन बाधा वीर। … Read more

वर्षा रानी चारुतम

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** वर्षा रानी चारुतम,सज सोलह श्रृंगार। पीर गमन व्याकुल हृदय,मेघ नैन जलधार॥ विद्युत नभ क्रन्दन करे,सुता विदाई शोक। नील गगन दुहिता विरह,अश्क नैन बिन रोक॥ चमक व्योम नित बिजुरिया,वाद्य यंत्र शुभगान। स्वागतार्थ भू है खड़ी,वृष्टि वधू सम्मान॥ मातु-पिता प्रिय गेह को,तज वर्षा मन घोर। मन मयूर होता मुदित,मिलन प्रीत … Read more

प्यार

विरेन्द्र कुमार साहू गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ****************************************************** बक-बक करते रात-दिन,वह है मूढ़ महान। प्यार शब्द जो बाँच ले,वही खरा विद्वान॥ ढाई अक्षर से बना,शब्द अनोखा प्यार। मन का मन से जोड़ का,एक यही आधार॥ कभी किसी के सामने,नहीं झुकेगा शीश। प्यार करो माँ-बाप से,मिल जाएगा ईश॥ दिखते हैं संसार में,भाँत-भाँति के प्यार। कुछ का निश्छल प्रीत … Read more

आओ हे गुरुवर

ममता बनर्जी मंजरी दुर्गापुर(पश्चिम बंगाल) ****************************************************************************** दोहा- आओ हे गुरुवर बसो,मन मंदिर में आज। बिन तेरे संसार में,बिगड़े सारे काज॥ रोला- बिगड़ै सारे काज,समझ में कछु नहिं आवै। मन में दु:ख संताप,सदा ही बढ़ता जावै॥ कहती ‘ममता’ नाथ,दया के हाथ बढ़ाओ। हर लो सब संताप,दया निधि गुरुवर आओ॥ कुंडलिनी- आओ हे गुरुवर बसो,मन मंदिर में आज। … Read more

पैसा बोलता है

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* पैसा ईश्वर तो नहीं,नहीं ईश से न्यून। जग में पैसा बोलता,रिश्ते सनते खूनll ईश्वर भी है वो बड़ा,जिस पर चढ़े करोड़। जग में पैसा बोलता,रिश्ते पीछे छोड़ll पैसे से पद बिक रहे,पैसे से सम्मान। जग में पैसा बोलता,बिकते हैं ईमानll वैवाहिक रिश्ते बिकें,कहते नाम दहेज़। जग में पैसा बोलता,धन से सेज … Read more

बदरी…

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** देखो बादल आ गया, भरकर तन में नीर। भर-भर गागर ढोलता, होकर तनिक अधीर॥ नदिया सागर से कहे, लगा रही थी टोह। हरियाली होकर धरा, मन को लेती मोह॥ बादल दौड़ें गगन में , धरकर नव-नव रूप। भांति-भांति के रंग ले, लगते नवल अनूप॥ ओ काले बादल सुनो, जाओ पिय … Read more

दुश्मन हम ख़ुद प्रकृति के

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** जल प्लावन आधी धरा,शेष शुष्क बदरंग। महाकाल धन जन जमीं,जलज बिखेरे जंग॥ जान माल बेघर प्रजा,बाढ़ त्रस्त निर्दोष। रोग शोक प्रसरित धरा,त्राहि-त्राहि उदघोष॥ दुश्मन हम ख़ुद प्रकृति के,कर्तन तरु पाषान। निजहित में हम भर सरित,आपद खुद हम जान॥ धन कुबेर तो महल में,आपद में बस आम। फेंक रोटियाँ … Read more

शहर

सुरेश चन्द्र सर्वहारा कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** लगी हुई है शहर में,जैसे कोई आग। ले प्रातः से रात तक,रहा आदमी भाग॥ ढूँढ रहा है शहर में,आकर क्यों तू प्यार। सम्बन्धों का है यहाँ,पैसा ही आधार॥ शहर बात उससे करे,हो जिससे कुछ काम। बिना स्वार्थ सम्बन्ध का,यहाँ नहीं है नाम॥ शहरों के ऊँचे भवन,पत्थर दिल के लोग। है … Read more

पैसा बोलता है

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** जग में सबसे है बड़ा,देखो पैसा आज। इसके बिन होता नहीं,बड़े-बड़े से काजll पैसा है तो मान है,पैसा से ही यार। पैसा से परिवार है,पैसा से संसारll बिन पैसा भोजन नहीं,भूखे हैं बेहाल। सज्जन माँगे भीख हैं,होते मालामालll पैसा से यह जान है,पैसा से ईमान। पैसा ही भगवान … Read more

देश विरोधी बदजुबां

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** लघु जीवन संसार में,सज बाज़ार जम़ात। वतन फ़िदा होंगे सभी,राष्ट्रधर्म ज़ज़्बातll सुलग रहा फिर गैंग वह,लौटाने सम्मान। खतरा उनको दिख स्वयं,हिफ़ाजत ए आनll पाये जो सारी खुशी,पूरे सब अरमान। उसी राष्ट्र में आज वे,कहते निज अपमानll झोली भर दे गालियाँ,नित भारत सरकार। पर बाधित उनकी नज़र,अभिभाषण अधिकारll रायसीना … Read more