वसुधा को आह
डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** ऐ सावन क्या कर दिया, ऐसा तूने राड़। बहा रही है जिन्दगी, भू पर चढ़ती बाढ़॥ सावन नित देने लगा, वसुधा को यूँ आह। पानी,पानी हो रहा, नहीं नीर की थाह॥ नीरद अब विनती सुनो, मंद करो कुछ चाल। मनुज कष्ट हैं सह रहे, वसुधा हुई निढाल॥ नीरद तुमने भर … Read more