चुनाव

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* चुनो सदा उपयुक्त जन, हित जीवन का देख।मानवता सजती रहे, यह ईश्वर का लेख॥ धन-दौलत के मोह में, सभी निरर्थक भाव।सजी सत्यता ही रहे, मिटा करें दुर्भाव॥ देख रहे गणतंत्र को, ईश्वर नभ से रोज।सुबह-शाम बेला यहाँ, कण-कण रचते ओज॥ मानवता में श्रेष्ठता, गुण का हो सम्मान।सजी रहे धरती सदा, … Read more

महावीर सद्ज्ञान पथ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राजवंश जन्मा तनय, तजा राज संसार।महावीर सद्ज्ञान पथ, सत्यापन सच सार॥ क्षत्रिय कुल जातक वह, कुण्डलपुर शुभ मूल।ज्ञातृवंश श्रेयांस सुत, काश्यपेय अनुकूल॥ थे नंदीवर्धन अनुज, सुदर्शना थी ज्येष्ठ।शिक्षा प्रति अभिरुचि अतुल, धनुष बाण में श्रेष्ठ॥ धन्य बिहार चारु धरा, वैशाली गणराज।पा बसाढ़ त्रिशला तनय, प्रमुदित सन्त समाज॥ शील त्याग … Read more

अन्तर्मन की पुकार

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* लोकतंत्र का पर्व है, अवसर जन अधिकार।अन्तर्मन जनमत समझ, भारत करे पुकार॥ पुकार रही माँ भारती, तरुण वीर सन्तान।शंखनाद अरिघात कर, उठो करो मतदान॥ मानव हित रक्षा कवच, बने मनुज अनिवार्य।उठा शस्त्र ब्रह्मास्त्र का, नीति धर्म हित कार्य॥ उठो साथ पहनो कवच, चलो करो मतदान।संविद निज अधिकार जो, करो … Read more

महागौरी माता

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* महागौरी माँ को नमन्, विनती बारम्बार।अम्बे मैया तू हटा, मेरा सब अँधियार॥ अष्टम दिन शुभ-आगमन, मंगल बाजें ख़ूब।तेरी पूजा जग करे, भक्तिभाव में डूब॥ करती है तू नित दया, करे नेह-बरसात।तू जग को नित दे रही, माँ मीठी सौगात॥ तुझको अर्पित नारियल, सदा झुकाता माथ।नहीं छोड़ना मातु तुम, विपदा में मम् … Read more

पूर्ण हुई मंशा सकल

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************** तिलक किया है सूर्य ने, राम ललाम ललाट,किरणों के अभिषेक से, हँसे भुवन सम्राट। नवमी तिथि शुभ चैत में, मंद- मंद मुस्कान,शोभा अद्भुत पा रहा, सुन्दर रूप विराट। रज रज माणिक स्वर्ण है, अवध अनोखा धाम,जैसे धीरज राम में, सरयू बहे सपाट। भोर भजन किर्तन करें, बजे शंख‌ बृजघंट,लाल भया दशरथ यहाँ, … Read more

माँ कालरात्रि देवी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* कालरात्रि माँ भवानी, महिमा अपरंपार।धूप दीप नैवेद्य से, माता का दरबार॥ कालरात्रि माँ सप्तमी, पावन दिन नवरात्र।महाकाल जगदम्बिके, मुण्डमाल चहुँ गात्र॥ चामुण्डा माँ चण्डिका, दिखती है विकराल।खप्पर धारी कालका, शोभित नेत्र विशाल॥ मातु भवानी तारिणी, धरे रूप घनघोर।कट कट काटे असुर रण, मचे भयानक शोर॥ प्रलयंकारी कालिके, महारूद्र अवतार।रक्तबीज … Read more

स्कंदमाता-हर लेना सब पीर

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* पंचम दिन स्कंद माँ, विनती करता आज।करो अनग्रह मातु तुम, पूरण हों सब काज॥ कमल समर्पित मातु है, केसर वाली खीर।केले का भी भोग है, हर लेना सब पीर॥ शिवा-शक्ति के मेल से, पाया है अस्तित्व।उग्र शेर के साथ में, सोह रहा व्यक्तित्व॥ पूरण करती कामना, माता तेरा ताप।असुर मारकर आपने, … Read more

माँ स्कंदमाता

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* नमन स्कंदमाता चरण, कार्तिक देव स्कन्द।गिरिजा नंदन हिय भजूॅं, खिले भक्ति मकरन्द॥ दुर्गा शक्ति पंचमी, महाशक्ति विकराल।महाप्रलय राक्षस दलन, स्कन्दमातु रण काल॥ पार्वती वृषवाहिनी, कार्तिकेय आधार।महाकाल बलधाम माँ, करे असुर संहार॥ पद्मासन गौरी मुदित, कदली फल नैवेद्य।बने मनुज आरोग्य जग, हो साफल्य अभेद्य॥ अभिलाषा पूरण सकल, स्कन्दमातु सम्पूज।करे आरती … Read more

पावन शुभ नवरात्रि

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* शुक्ला चैत्री प्रतिपदा, सनातनी त्यौहार।नव दुर्गा आराधना, कीर्ति मिले सुख सार॥ अभिनन्दन स्वागत करें, नूतन हिन्दू वर्ष।पावन नित नवरात्रि में, मानवता उत्कर्ष॥ पूजनार्थ नवरात्र में, आवाहन जगदम्ब।मातु शैलपुत्री प्रथम, राष्ट्र शक्ति अवलम्ब॥ ब्रह्मचारिणी सिद्धि दे, नीति प्रीति समदृष्टि।नित विवेक सद्ज्ञान से, ज्योतिर्मय हो सृष्टि॥ मचा रखा आतंक है, महिषासुर … Read more

ऋतुओं का महत्व

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* सुष्मित कुसुमित प्रकृति यह, सुरभित जीवन लोक।सूरज चंदा अहर्निश, हरे तिमिर जग शोक॥ षड् ऋतुओं में प्रकृति सज, विविध रूप श्रृंगार।शीताकुल खग पशु मनुज, दे वसन्त उपहार॥ मधुरिम वन मधु माधवी, मुकुलित चारु रसाल।फागुन के नवरंग से, सरसिज गाल गुलाल॥ कू-कू करती कोकिला, पंचम स्वर मधु गान।नव प्रभात अरुणिम … Read more