चातुर्मास है आत्मावलोकन पर्व

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** बिना कारण के कोई कार्य उत्पन्न नहीं होता,कोई भी कार्य निरर्थक नहीं होताl बहुत पहले समाज विखरित थाl उस समय आवागमन के साधन शून्य,कच्चे मार्ग,बैलगाड़ी,घोड़ों की सवारी ही मुख्य साधन होते थेl अधिकतर निवास गांव में होते थेl व्यापार शून्य,खेती- किसानी से निवृत्ति और आवागमन का साधन न होने से जीवन … Read more

पोंगापंथी हिंदुत्व और पोंगापंथी इस्लाम

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** आज हमारे विचार के लिए दो विषय सामने आए हैं। एक तो कानपुर के युवा मुहम्मद ताज का,जिसे कुछ हिंदू नौजवानों ने बेरहमी से पीटा और उससे ‘जय श्रीराम’ बुलवाने की कोशिश की,तो दूसरा प. बंगाल से चुनी गई सांसद तृणमूल कांग्रेस की नुसरत जहां का,जिनके खिलाफ देवबंद के किसी … Read more

कीर्तिशेषःयुग निर्माता स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरिजी

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** अध्यात्म,चेतना के प्रतीक भारतमाता मन्दिर के प्रतिष्ठापक ब्रम्हानिष्ठ स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज वर्तमान युग के विवेकानन्द थे। २६ वर्ष की अल्प आयु में ही शंकराचार्य पद पर सुशोभित हुए और दीन-दुखी,गिरिवासी, वनवासी,हरिजनों की सेवा और साम्प्रदायिक मतभेदों को दूर कर समन्वय,भावना का विश्व में प्रसार करने के लिए सनातन … Read more

स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि को अलविदा नहीं कहा जा सकता

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* विश्व प्रसिद्ध भारत माता मंदिर के संस्थापक,भारतीय अध्यात्म क्षितिज के उज्ज्वल नक्षत्र,निवृत्त शंकराचार्य,पद्मभूषण स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि मंगलवार सुबह हरिद्वार में उनके निवास स्थान राघव कुटीर में ब्रह्मलीन हो गए। उनके देवलोकगमन से भारत के आध्यात्मिक जगत में गहरी रिक्तता बनी है,एवं संत-समुदाय के साथ-साथ असंख्य श्रद्धालुजन शोक मग्न हो गये हैं। … Read more

आस्था का केन्द्र गुरुग्राम का शीतला माता मंदिर

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’ रोहतक (हरियाणा) ******************************************************* हमारे देश भारत में धर्म और आस्था का सदा ही वर्चस्व रहा है। यहां कण-कण में ईश्वर की अनुभूति की जाती है। यहां पर जब भी मानव जाति को महासंकट ने घेरा,तो कोई न कोई देवात्मा अवतरित हुई और धर्म की स्थापना की। देवताओं की पावन भूमि भारत में … Read more

मंगल मूरत शुभ देव गणेश

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’  गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************** जै जै जै गणपति गणनायक, शुभ कर्मों के देव विनायक! जै जै जै गणपति गणनायक!! मातृभक्ति की शक्ति प्रथम पूज्यते देव गज़ानन, जै जै जै गणपति गणनायक! शुभ कर्मों के देव विनायक, जै जै जै गणपति गण नायक!! महादेव शिव शंकर के सत्य प्रकाश, महाकाल रूद्राअँश भय भव,भंजक बाधा … Read more

जीवन जीने की कला है `आध्यात्म `

अमल श्रीवास्तव  बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ********************************************************************* एक अंध विद्यालय में एक दिन शिक्षक ने ‘हाथी पृथ्वी पर सबसे विशाल जानवर है’ यह बताया। यह सुनकर उन अंधे विद्यार्थियों ने अपने शिक्षक से हाथी को जानने की जिज्ञासा प्रकट की। संयोगवश एक महावत अपने हाथी के साथ उसी समय विद्यालय के सामने से जा रहा था। शिक्षक के … Read more

माँ दरश दिखा जाना…

केवरा यदु ‘मीरा’  राजिम(छत्तीसगढ़) ******************************************************************* नवरात में आकर के माँ दरश दिखा जाना। नवरात चले जाये,माँ तुम न कभी जानाll पलकों से तेरी मैंया मैं डगर बुहारुँगी, गंगाजल से अंबे मैं चरण पखारूँगी। माँ नव नव रुपों में तुम झलक दिखा जाना, नवरात में आकर के माँ दरश दिखा जाना…ll मैंने द्वार सजाई है माँ … Read more

महावीर बनने की तैयारी में जुटें

ललित गर्ग दिल्ली ************************************************************** (महावीर जयंती १७ अप्रैल विशेष) महावीर जयंती का महत्व सिर्फ जैनियों के लिए ही नहीं,बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज के लिये है। जो जैन मत को मानने वाले हैं,वे यह पवित्र दिन बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। महावीर की शिक्षाओं की उपादेयता सार्वकालिक,सार्वभौमिक एवं सार्वदेशिक है,दुनिया के तमाम लोगों ने … Read more

महावीर युग फिर से आए

आचार्य डाॅ. लोकेशमुनि नई दिल्ली(भारत) ************************************************************************* महावीर जयन्ती १७ अप्रैल विशेष महावीर जयन्ती सत्संकल्पों को जागृत करने का पर्व है और सबसे बड़ा संकल्प है मनुष्य स्वयं को बदलने के लिये तत्पर हो। सरल नहीं है मनुष्य को बदलना। बहुत कठिन है नैतिक मूल्यों का विकास। बहुत-बहुत कठिन है आध्यात्मिक चेतना का रूपांतरण,और भी कठिन … Read more