एक नाव में सवार हमारी भाषाएँ
निर्मलकुमार पाटोदी इन्दौर(मध्यप्रदेश) ************************************************** इस विचार से सहमत नहीं हूँ-“हिंदी का दुर्भाग्य है,हिंदी के लोग भारत की अन्य प्रांतीय भाषाएँ सीखते नहीं,इसलिए हिंदी का विकास नहीं हुआ है।” हिंदी भाषा है,उसका दुर्भाग्य कहना ठीक नहीं है। भाषा का दुर्भाग्य कहना अनुचित है। दुनियाभर में लोग स्वेच्छा से अपनी-अपनी भाषाएँ सीखते हैं। हिंदी को स्वाधीनता के … Read more