प्रकृति,पृथ्वी और प्रगति में संतुलन आवश्यक

सुश्री नमिता दुबे इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************** मनुष्य विकास के पथ पर बड़ी तेजी से अग्रसर है,उसने समय के साथ स्वयं के लिए सुख के सभी साधन एकत्र कर लिए हैं। बढ़ते विकास तथा समय के साथ आज हमारी असंतोष की प्रवृत्ति भी बढ़ती जा रही है। प्रकृति में ऊर्जा संसाधन सीमित हैं, अतः यह आवश्यक हो … Read more

हिंसक सत्ता की नाकामी

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** महावीर जयंती के अवसर पर हार्वर्ड कैनेडी स्कूल की एक रपट दुनिया के आंदोलनों पर छपी है। यह खोजपूर्ण रपट इस मुद्दे पर छपी है कि पिछले १०० वर्षों में कितने हिंसक आंदोलन सफल हुए हैं और कितने अहिंसक ? इसके मुताबिक ३६ प्रतिशत हिंसक आंदोलन सफल हुए हैं जबकि … Read more

धरती माँ की रक्षा अनिवार्य

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’ गोरखपुर(उत्तरप्रदेश) ***************************************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… आज सारी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग जैसी अंतरराष्ट्रीय समस्या से जूझ रही है,यद्यपि कई देशों की सरकारों द्वारा कई कदम उठाए गए हैं फिर भी आज दिनों-दिन पर्यावरणीय ह्रास, वायु तथा जल प्रदूषण में बढ़ोतरी,ओजोन परत में कमी,औद्योगिकरण,वन कटाई इत्यादि से तेलों का फैल जाना,पावर प्लांट,कीटनाशक … Read more

कांग्रेस पर बांस की बोराई

राकेश सैन जालंधर(पंजाब) ***************************************************************** राजस्थानी में कहावत है-‘केला,बिच्छी,केकड़ा वनस्पतियों में बांस,अपने जन्मे आप मरे या फिर सत्यानाश।’ यानि केला व बांस जिन्दगी में एक ही बार फल-फूल देते हैं और बांस के फूल अकाल या विपत्ति का संकेत हैं। चैत्र और वैशाख में वनस्पति जगत में बोराई यौवन पर है और देश की सबसे पुरानी … Read more

गैर राजनीतिक पकौड़ा

अशोक कुमार सेन ‘कुमार’ पाली(राजस्थान) ******************************************************************************** आज पकौड़े बनाना सीखा है,पर अब आप लोग यह मत बोल देना कि किसी दल विशेष का प्रचार कर रहा है। यह विशुद्ध गैर राजनीतिक पकौड़े हैं,जिनका एक मात्र उद्देश्य पेट की भूख शांत करना है। आजकल सरकार स्वरोजगार के नाम पर राजनीतिक सियासी आँच पर पकौड़े तलना,पंक्चर निकलना,मवेशी … Read more

विरासत संजोने की जरूरत

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… धरोहरें विश्व और देश की ऐसी विरासत हैं,जिनको देखने से हमें पूर्व के स्थापित समाज की जानकारी मिलती हैl इससे तत्समय की जानकारी मिलती हैl विश्व धरोहर दिवस दुनियाभर में हर साल १८ अप्रैल को मनाया जाने वाला एक वार्षिक कार्यक्रम और उत्सव है। इसका उद्देश्य … Read more

आओ,मिलकर `पृथ्वी दिवस` को सार्थक बनाएं

प्रभावती श.शाखापुरे दांडेली(कर्नाटक) ************************************************ विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… सुन मनुज धरा की पुकार, नित सहती है वेदना हजार। आज सुनाऊँ व्यथा निराली, छीनी मुझसे मेरी हरियालीll आज वर्तमान समय में धरा की यह पुकार न जाने कितनों को सुनाई दे रही है। धरा,मनुष्य को रोज पुकार कर कहती है,-“हे मनुज,तू खुद अपना भविष्य खतरे … Read more

धरती को बुखार से बचाएं

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई इंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… कितना अजीब लगता है ये शीर्षक पढ़कर-‘धरती का बुखार’ ? जब हमारे शरीर का तापमान बढ़ता है तो हम उसे बुखार कहते हैं,उसी प्रकार धरती का तापमान बढ़ता है तो उसे धरती का बुखार कह सकते हैं। पृथ्वी के इस बढ़े हुए तापमान को विश्व तपन … Read more

महावीर युग फिर से आए

आचार्य डाॅ. लोकेशमुनि नई दिल्ली(भारत) ************************************************************************* महावीर जयन्ती १७ अप्रैल विशेष महावीर जयन्ती सत्संकल्पों को जागृत करने का पर्व है और सबसे बड़ा संकल्प है मनुष्य स्वयं को बदलने के लिये तत्पर हो। सरल नहीं है मनुष्य को बदलना। बहुत कठिन है नैतिक मूल्यों का विकास। बहुत-बहुत कठिन है आध्यात्मिक चेतना का रूपांतरण,और भी कठिन … Read more

आधुनिकता की चकाचौंध में संस्कारों का `अन्तिम संस्कार`

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** विश्व में भारत एकमात्र ऐसा देश है,जहाँ सभी धर्मों को मानने वाले लोगों का बसेरा है एवं सभी जातियों व संप्रदायों के अनुयायी यहाँ निवासरत हैं। भारत देश प्राचीनकाल में ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था,क्योंकि यहाँ पर निवासरत समस्त लोगों में एकता और एकजुटता के प्रमुख गुण सहजता से … Read more