न्यायपालिका की अग्नि-परीक्षा

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** हमारे सर्वोच्च न्यायालय की इज्जत दांव पर लग गई है। पहले तो प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन-उत्पीड़न का आरोप लगा और अब एक वकील ने अपने हलफनामे में दावा किया है कि जस्टिस गोगोई को फंसाने के लिए कुछ ताकतवर लोगों ने यह षड़यंत्र रचा है। उस वकील ने … Read more

राष्ट्रीय चेतना कॆ लिए निजी स्वार्थ का बलिदान जरुरी

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** राष्ट्रीय चेतना का अभिप्राय(समाज की उन्नति) राष्ट्र की चेतना-प्राण शक्ति समाज से है। राष्ट्र शब्द समाज के अर्थ में ही प्रयुक्त होता है। जिस क्षण समुदाय में एकता की एक सहज लहर हो,उसे राष्ट्र कहते हैं। समाज और साहित्य का भी विरोध संबंध है। साहित्य सामुदायिक विकास में सहायक होता है, … Read more

प्रधान सेवक का अहं विकास में बाधक

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** एक जमाना था जब कुआँ और तालाब चोरी हो जाते थे,तथा बाँध भी ग़ुम जाते थे और उनकी जाँच होने पर सही होती थी पर वर्तमान में हमारे प्रधान सेवक ने कहा कि गढ्ढे भरने का काम किया है तो इसका अर्थ दो प्रकार का है-जैसे प्रधान सेवक ने इतना काम … Read more

वास्तविक मुद्दों को गुमराह कर `आरोप-प्रत्यारोप` की राजनीति

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहाँ सभी वर्गों,जातियों एवं सम्प्रदायों से जुड़े लोगों को अपनी बात कहने और अपना पक्ष रखने की स्पष्ट रूप से स्वतंत्रता है,लेकिन अगर हम भारत देश की वर्तमान राजनीति की बात करते हैं तो दिलो-दिमाग में बहुत ही नकरात्मक छवि सामने आती … Read more

राजनीति का धर्म या धर्म की राजनीति

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** धर्म का कार्य है लोगों को सदाचारी और प्रेममय बनाना और राजनीति का उद्देश्य है लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उनके हित में काम करनाl जब धर्म और राजनीति साथ-साथ नहीं चलते,तब हमें भ्रष्ट राजनीतिज्ञ और कपटी धार्मिक नेता मिलते हैंl एक धार्मिक व्यक्ति,जो सदाचारी और स्नेही है,अवश्य … Read more

काजल की कोठरी में उम्मीद की किरण

डाॅ.देवेन्द्र जोशी  उज्जैन(मध्यप्रदेश) ******************************************************************** १७वीं लोकसभा के आम चुनाव में जहां नेताओं द्वारा एक-दूसरे के प्रति बदजुबानी,कटु व्यवहार और चरित्र हनन की एक से बढ़कर एक खबरें आए दिन मीडिया की सुर्खी बन रही है जिन्हें लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार के बाद चुनाव आयोग का स्वतः संज्ञान जागा और योगी आदित्यनाथ,मायावती,आजम शेख और … Read more

जरूरत है राजनीतिक परिष्कार की

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* इन आम चुनावों में बड़े विरोधाभास दिख रहे हैं। एक बड़ा विरोधाभास है राजनीतिक घोषणाओं एवं आश्वासनों में,जो तमाम अंधेरों के बीच चांद उगाने की कोशिशें कर रहा है। इन सबके बीच आप और हम उन चार अंधों को मिले हाथी की तरह हैं,जो अपने मापदंडों के साथ अपना-अपना सच परखने … Read more

लोकतंत्र में मतदाता की भूमिका

शम्भूप्रसाद भट्ट `स्नेहिल’ पौड़ी(उत्तराखंड) ************************************************************** कहते हैं कि “लोकतंत्रीय शासन व्यवस्था अंतर्गत मतदाता देश का भाग्य विधाता होता है।” मतदाता के मत की शक्ति का आंकलन तब अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है,जब किसी प्रत्याशी को एक-एक मत की प्राप्ति या अप्राप्ति के कारण जीत या हार का सामना करना पड़ता है। इसलिए,कहा जा सकता है … Read more

चुनाव सुधार हेतु नया `सूरज` आवश्यक

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* लोकसभा चुनाव २०१९ की सरगर्मियां उग्र से उग्र होती जा रही है,राष्ट्र में आज ईमानदारी एवं निष्पक्षता हर क्षेत्र में अपेक्षित हैl चूँकि,अनेक गलत बातों की जड़ चुनाव है इसलिए वहां इसकी शुरूआत इस समय सर्वाधिक अपेक्षित है। बीते कुछ महीनों में चुनाव सुधार को लेकर देशभर में तमाम तरह की … Read more

सबको पालती है धरा

विनोद वर्मा आज़ाद देपालपुर (मध्य प्रदेश)  ************************************************ विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… जो लोग देश की धरा को माता समझे, ऐसे चिंतक,भारत में पाए जाते हैं। जब-जब वसुंधरा का अर्चन आवश्यक, तो फूल नहीं,तब प्राण चढ़ाए जाते हैंll ‘धरा’ को विभिन्न उपनाम दिए गए हैं,जैसे-पृथ्वी, मेदिनी,वसुंधरा,भूमि,और धरती आदि। धरा के विषय में अलग-अलग लिखा जा सकता … Read more