प्यारा बेटा

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ हम ३ बहनें और १ भाई थे। माँ-बाप ने हमें बड़े प्यार और दुलार से पाला-पोसा और बड़ा किया। ये १९८० के दशक की बातें हैं। मुझे इतनी समझ तो ,(जब मैं छठी कक्षा में थी) आ चुकी थी कि माँ मेरे भाई को हम सब बहनों से ज़्यादा प्यार करती है।हम सरकारी … Read more

काश! वो बचपन वापिस आ जाए

डाॅ. पूनम अरोराऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)************************************* ‘पिता का प्रेम, पसीना और हम’ स्पर्धा विशेष….. गरिमामय,प्रभावशाली,अति शानदार व्यक्तित्व के धनी मेरे पिता राम प्रकाश भल्ला-समाजसेवी, स्पष्टवादी,स्वावलम्बी,अथक परिश्रमी,सत्यवादी, निर्भीक,अनुशासन प्रिय,शालीन,दार्शनिक,विनम्रता, परोपकार आदि गुणों से सदैव सभी के प्रिय रहे।छोटा हो या बड़ा,निर्धन हो या धनवान,सभी से समभाव स्नेह करते व सम्मान करते थे। पिता जी, किशोरावस्था से ही … Read more

गंभीर मामलों में भी धैर्य नहीं खोते थे पिताजी

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** ‘पिता का प्रेम, पसीना और हम’ स्पर्धा विशेष….. आज वाले कोलकात्ता के व्यस्तम इलाके में स्थित एक मकान के तीसरे माले में मेरा बचपन बीता। पिताजी के आँगन में पाँव रखने के साथ हम भाई- बहन सम्भल जाते थे। मेरे अपने बड़े ‘माँ जाये भाई’ व मेरे बीच २० साल का … Read more

सुखद अनुभव

उमेशचन्द यादवबलिया (उत्तरप्रदेश) ***************************************** ‘कोरोना’ महामारी की वजह से पूरी दुनिया में तबाही मची हुई है। अधिकांश लोग बेरोजगार हो गए हैं,मैं भी इसी श्रेणी में हूँ। मैं अपने गाँव में परिवार और मित्रों के साथ जीवन व्यतीत कर रहा हूँ। एक दिन की बात है। घर बैठे-बैठे ऊब रहा था तो सोचा कि चलो खेतों … Read more

माँ की बातें…सीख

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** माँ के बारे में जितना लिखूँ,कम है। मुझे अपनी माँ की बहुत सी बातें याद हैं। प्यार,हुनर,अक्लमंदी और सीख बहुत याद आती है। आज उन्हीं की शिक्षा के कारण हम ससुराल में अपने दायित्व को पूरी तरह से निभा पा रहे हैं। हमारी माँ को अपने सास-ससुर का प्यार कभी नहीं मिला। … Read more

बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद…!

रोहित मिश्रप्रयागराज(उत्तरप्रदेश)*********************************** बात लगभग २०१० की है,जब मैंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में परास्नातक करने के लिए प्रवेश लिया। उस समय मैं बकायदा ढीली शर्ट और सामान्य पेंट पहनता था। ढीली-ढाली शर्ट पैंट पहनकर बकायदा गले में सफेद अंगौछा डालकर महाविद्यालय जाया करता था। मैंने शहर के ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संबंधित महावीर प्रसाद … Read more

‘मैं तो राम बनूँगा…’

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** यादों का झरोखा….. कितना प्यारा लगता है ना अपना बचपन याद करना। वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी…धागे से बाँधकर कागज़ की नाव को तैराना…पहलदूज खेलना,रस्सी कूदना, गिट्टे और स्टापू खेलना,छुपम-छुपाई,लंगड़ी टांग…।जिस दिन इकन्नी मिल जाती थी,उस दिन तो हम अपने-आपको शहंशाह समझते थे। उस इकन्नी में एक सप्ताह तक … Read more

काश! वो दिन फिर लौट आते

डॉ.शैल चन्द्राधमतरी(छत्तीसगढ़)**************************************** मेरे पिता जी की साईकल स्पर्धा विशेष….. जब मैं कक्षा छठवीं में पढ़ती थी,तब मेरे पिता जी के पास एक एटलस की डंडी वाली साईकिल थी। वे उसी से दफ्तर जाते-आते थे। उन दिनों लोग साईकिल ज्यादा इस्तेमाल किया करते थे।हम बच्चे पिताजी की छुट्टी वाले दिन का इंतजार करते थे,क्योंकि रविवार के … Read more

साइकिल लेकर छोड़ने चल दिए…

रोहित मिश्रप्रयागराज(उत्तरप्रदेश)*********************************** मेरे पिता जी की साईकल स्पर्धा विशेष….. बचपन में सभी लोग अपने पिता जी की साइकिल पर अवश्य बैठे होंगे,उसी प्रकार मैं भी साइकिल पर बैठता था। आज के जमाने में बच्चे अपने पापा की मोटरसाइकिल और कार में ही बैठ कर पार्क जातेहैं। उस समय पापा मुझे अपनी पतली टायर वाली साइकिल … Read more

उनका मान-सम्मान,स्वाभिमान थी साइकिल

सुरेन्द्र सिंह राजपूत हमसफ़रदेवास (मध्यप्रदेश)****************************************** मेरे पिता जी की साईकल स्पर्धा विशेष….. दोस्तों,आधुनिक युग में बहुत बड़े-बड़े परिवर्तन हुए हैं,आज से तीस- चालीस साल पहले की हम बात करें तो उस समय की जीवनशैली और आज की जीवनशैली में बहुत बड़ा परिवर्तन आया है। यह नहीं कहता कि समाज और देश तरक़्क़ी न करे, ख़ूब तरक़्क़ी … Read more