मेरा देश…मेरी पूजा…मेरा देव

डॉ.दिलीप गुप्ता घरघोड़ा(छत्तीसगढ़) ******************************************************** देश मेरा देव मेरा,साँस मेरी जान है…, नभ में लहराता तिरंगा,हिन्द का सम्मान है फहरता जब तक रहे,आज़ाद हिंदुस्तान है। तिरंगा हर भारतीय की जान है-अभिमान है, नभ में लहराता तिरंगा,हिन्द का सम्मान हैll हाथ में लेकर ध्वजा सीमा पे तन कर हैं खड़े, जां हथेली पर लिए,आंधी-तूफानों में…अड़े सम्मान माटी … Read more

भरा यदि है खून..

रणदीप याज्ञिक ‘रण’  उरई(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************** भरा है यदि खून तो, खौलना भी सीख लो खून को क्रोध में नहीं, पसीने में बहाना सीख लो। यदि गर्म हवा भी चलेगी, ठंडक का सुकून मलेगी तबियत से किताब तो खोलो यात्री, जीवन का सबक तुम्हें सिखला देगी। मान लिया अटूट भीड़ है, तुम्हारी लक्ष्य यात्रा में लेकिन … Read more

धुंध की चादर

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* छायी धुंध की चादर, शहरों में घुटन ऐसी जन-जीवन का अभिशाप, उफ्फ कर रहा हर जंतु-जीवl प्रगति कहे मानव दोषी, मानव कहे प्रगति कारण कल कारखाने मोटर-कार, दो पहिया ट्रक ए.सी. अनेकl किसानों ने जलाई पिराली, तापमान हुआ असंतुलित घनत्व वायु का जो बढ़ा, उलझन ऐसी नमी के … Read more

जीवन,जीवन ना रहा

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे मंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** दुनिया कैसी हो गई,कैसे हैं अब लोग। पूजा से सब दूर हैं,चाहें केवल भोग॥ सेवक बनकर घूमते,पर करते हैं राज। सेवा का कोई नहीं,करता है अब काज॥ सत्ता पाना हो गया,अब कितना आसान। पर ऑफिस में,भृत्य का,पद मुश्किल,यह जान॥ जो सच्चे,वो रो रहे,झूठों पर मुस्कान। नम्बर दो से ही … Read more

रोटी और मकान नहीं है

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** रोटी और मकान नहीं है, जीवन यह आसान नहीं है। खुद की बदहाली पर सोचो, रोता कौन किसान नहीं है। फुटपाथों पर सोने वाला, बोलो क्या इंसान नहीं है ? रोजी-रोटी ढूँढ रहा जो, वह कोई नादान नहीं है। चूल्हे में है आग भले पर, चावल और पिसान नहीं … Read more

जिंदगी इक संघर्ष

तृप्ति तोमर `तृष्णा` भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* जिंदगी का उपनाम है संघर्ष, इशारों पर नचाती जैसे सर्कस। जिंदगी का हर रुप है चुनौती, हर पहलू में नया रंग दिखलाती। कभी टूटती है जीवन की हर एक आस, तो अगले पल होता समर्पण का एहसास। है कभी खुशियों और मुश्किलों का शोर, न जाने ले जाएगी जिंदगी किस … Read more

‘हिंदी’ है देश-प्रेम की भाषा

शंकर शरण  ************************************************************************ यह बात बार-बार साबित हो रही है कि जिन भारतीयों को पूरे देश से जुड़ाव-लगाव है वे तो हिंदी का महत्व समझते हैं,लेकिन जो राष्ट्रीय एकता के प्रति लापरवाह हैं,प्राय: वही हिंदी पर हीला-हवाला करते हैं। हमारे जो बुद्धिजीवी माओवादियों,अलगाववादियों, जिहादियों आदि से सहानुभूति रखते हैं,वे हिंदी का विरोध भी करते हैं। … Read more

प्रकृति

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** चलते-चलते, दूर निकल गई इन वादियों में, खो गई… कितनी खूबसूरत है ये ज़मीं,ये आसमां, ये सारी प्रकृति…l   जाऊंगी कहां, पता नहीं आसमां झुक रहा है, शायद वहां तक मन में सवाल है, हजारों ख्याल है ये प्रकृति…l   रंग-बिरंगे फूल, हरी-भरी वादियां लम्बे ऊंचे पेड़, बतियाती ये डालियां ये … Read more

आओ हास करें..

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** जीवन कितने दिन का ?,आओ हास करें। छोड़ उरों से रिपुता,मिलकर रास करेंll यमशाला है भू पर,भू पर इन्द्रपुरी। क्या मिलता है किसको,उर में छिपी धुरीll विपदा में हो कोई,उसके घर जाकर। छांटें उसके शूल व,बांटे कुसुमाकरll उपजे कटुता कोई,उसका नास करें। जीवन कितने दिन का ?,आओ हास करेंll राघव … Read more

गुरु नानकदेव

सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’ कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** थे गुरु नानकदेव जी,युग के पुरुष महान। की जिनने संसार को,संस्कृति नई प्रदानll कहते नानकदेव जी,परम पुरुष है एक। उसकी इच्छा में चलें,छोड़ सभी उद्रेकll एकमात्र कवि संत हैं,नानकदेव महान। निन्दा तज जिनने किया नारी का गुणगानll सब जीवों को आत्मवत,देते आदर प्यार। अहं-शून्य होकर रहे,नानक इस संसारll किसी जाति … Read more