साँस है हिन्दी

प्रेमशंकर ‘नूरपुरिया’ मोहाली(पंजाब) **************************************************************************** हिन्दी धड़कन है साँस है हिन्दी, हिंदी तड़पन है अहसास है हिंदी। हिंदी माँ है हमारी और संस्कृति, जिसने पाला हमें,वह खास है हिंदी॥ भारतीय संस्कृति का निवास है हिंदी, परिधानों में भारतीयों का लिबास है हिंदी। हिंदुस्तानी भाषाई सुगंध फैल रही चारों ओर, हम सबमें अपनेपन का अहसास है हिंदी॥ … Read more

वादा

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** तुमसे कुछ कहना है… मौसम ने बहारों से, फूलों की वादियों से चाँद ने सितारों से और, सभी ने एक-दूसरे से वादा लिया है…। सुनो मैंने भी तुमसे वादा लिया है… संग तुम्हारे चलने का साथ तुम्हारा देने का, कभी ना दिल दुखाने का चोट ना पहुंचाने का वादा लिया है…। … Read more

ये वहम तुम्हारा अहम है

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** सिर्फ हम ही हम हैं, ये वहम तुम्हारा अहम है। आसमां में उड़ रहे हैं वो, जिनके लिए जमीं कम है। पिता सबसे अनमोल है जग में, बाहर से कठोर,अंदर से नरम है। तुम्हारे भाग्य का भागकर आएगा, मेहनत जी तोड़ करो,बाकी सब भरम है। अपना हर कदम मजबूती से … Read more

यही माँ

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ ‘माँ’ एक शब्द, धरती से धैर्यवान सहनशील उससे भी कहीं अधिक, लाड़-दुलार में किसी से तुलना नहीं, स्वंय कष्ट सहकर भी आँसू का घूंट पीकर भी, गीले बिस्तर पर सोकर भी आह तक करने न देती, माँ,जी हाँ ममता की मूर्ति माँ। उसकी क्षणिक आह पर स्वंय सिहर जाती, उसके … Read more

अहम रहा पैसा कभी नहीं

अवधेश कुमार ‘आशुतोष’ खगड़िया (बिहार) **************************************************************************** जो आदमी शरीफ़ हो,देखा कभी नहीं। मेरे लिए अहम रहा पैसा कभी नहीं। जिसमें निरीह जीव की हत्या करे सभी, तू कर यकीन वह सफल धंधा कभी नहीं। नित धर्म के अलाव पे रोटी जो सेंकता, धंधा उसी का चल पड़े,मन्दा कभी नहीं। बस एक बात जान लें शादी … Read more

विपरीत चल रही कश्तियां

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** अपनों की विकराल स्मृतियां। कष्ट निवारक नहीं आकृतियांl तुम्हें क्या कहें और कैसे कहें, बांटी थी सब लिखित प्रतियां। दण्ड भोग रहा देशभक्ति का, मूक दर्शक बनीं सब शक्तियां। न्याय हेतु प्रयासरत हूँ किंतु, अनुकूल नहीं हैं परिस्थियां। उस पार कहां,कैसे उतरूं मैं, विपरीत चल रही हैं … Read more

अहंकार

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* जब चले जीवन नैया लेकर, हाथों में मैं की पतवार सोचा,कर लेंगें जीवन नैया पार, पकड़ समय की धार। काम न आयी मैं की पतवार, तेज समय की धार अपने छूटे,सपने टूटे, कदर नहीं की अपनों की जब समय था तेरे पास। ऐसे गुजरे तूफ़ानों से, छूट गयीं … Read more

देश विरोधी बदजुबां

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** लघु जीवन संसार में,सज बाज़ार जम़ात। वतन फ़िदा होंगे सभी,राष्ट्रधर्म ज़ज़्बातll सुलग रहा फिर गैंग वह,लौटाने सम्मान। खतरा उनको दिख स्वयं,हिफ़ाजत ए आनll पाये जो सारी खुशी,पूरे सब अरमान। उसी राष्ट्र में आज वे,कहते निज अपमानll झोली भर दे गालियाँ,नित भारत सरकार। पर बाधित उनकी नज़र,अभिभाषण अधिकारll रायसीना … Read more

ऋतुराज

वन्दना पुणताम्बेकर इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************************************************* गीत गुनगुनाये सांझ ढलते-ढलते मंद ध्वनि तरंगें। खिला गुल-गुलशन खुशबू बिखरी मंद मौसम हुआ मलन्द। भीगी यादें कुछ मन तरंगों में भूली-सी बातें। बरखा महकी धरा उन्मुक्त घिरा गगन सुखद पुरवाई हरीतिमा। परिचय: वन्दना पुणतांबेकर का स्थाई निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। इनका जन्म स्थान ग्वालियर(म.प्र.)और जन्म तारीख ५ सितम्बर … Read more

श्रेष्ठ मानव कहलाएगा

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** मानव को मानव से उपकार करेगा, वहीं इंसानों का भगवान कहलाएगा। न्योछावर कर दूसरों के लिए जिएगा, अनूठा प्रेम का संग्रह कर पाएगा॥ हृदय जितना विशाल होगा, वीरता की उतना मिसाल बनेगा। उपकार कर्म से जीवन सजेगा, खुशियों का चमन और महकेगा॥ शोषित पीड़ित वंचित को, मौलिक अधिकार दिलाएगा। … Read more