प्रशिक्षण खुद से खुद को लेना होगा

कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’ इन्दौर मध्यप्रदेश) ********************************************* दर्जनों प्रशिक्षण, हम-तुम और वे यूँ ही लेते रहेंगे, नई-नई विधाएं नई- नई कलाएं, सीखना है ता-उम्र सीखेंगे। शिक्षण का प्रशिक्षण तो बिल्कुल उचित है, पर इससे परे किसी अन्य का प्रशिक्षण, हमारी समझ से परे है। उद्देश्य तुम्हारा सिर्फ शिक्षा का ही हो, तो भर धूप,बारिश में भी … Read more

मेघों को निमंत्रण है

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** मेघों को मेरा निमंत्रण है… मेघों को कोयल,पपीहा,मोर, झरने,नदियों का निमंत्रणl आ जाओ तुम उमड़-घुमड़ कर, काले घनघोर मेघ तुम बरस जाओl प्यास मिटाकर अमृत बरसा दो, मोर,पपीहा तुम्हारा गान कर रहेll बैठी वो नायिका तुम्हारे इंतजार में, तुम आओगे तो उसका साजन घर आएगा। वो विरह वेदना में तड़प रही, … Read more

आनंद बोध

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* मेरी पीठ पर फैले अँधेरे को, मैं कभी यकायक विस्मय से ज़रा पलट कर देखती हूँ कि, कितनी ही धूप क्षणिकाएं झिलमिल-झिलमिल उतर आयी हों। नव किंजल्क पुंज खिल उठे हों, जिसकी भीनी गन्ध से मेरा पृष्ठ भाग आप्लावित हो उठता है…। आह…! कितनी मधुर है प्रतीति, तुम्हारे नेह निमंत्रण की … Read more

खुद की खोज जारी रखो

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** खुद की खोज जारी रखो, मरने की रोज तैयारी रखोl कब-कौन कहां बदल गया, इसकी पूरी जानकारी रखोl खुद पर यकीन करना सीखो, नीयत सच्ची और जुबां प्यारी रखोl वहम और अहम मत पालो कभी, चुनिंदा लोगों से हरदम यारी रखोl हक के लिए सदा आवाज़ उठाओ, अपनी बातों में … Read more

गाँव मनोरम

कैलाश झा ‘किंकर’ खगड़िया (बिहार) ************************************************************************************ गाँव मनोरम दृश्य लिये नित, स्वच्छ हवा-जल पूरित होता। दूध,दही,मछली नित माखन, गेह अनाज विभूषित होता। खेत-पथार सुशोभित गामक, बात-विचार न दूषित होता। बाग-बगान हँसे निशि-वासर ग्राम-प्रधान सुपूजित होता। पश्चिम में सरिता नद-निर्झर, उत्तर में मधु वृक्ष लगायो। दक्षिण में कृषि योग्य धरा पर, धान,गहूम,चना उपजायो। पोखर एक बड़ा … Read more

सच्चाई झलक जाये

सूरज कुमार साहू ‘नील` भोपाल (मध्यप्रदेश) ****************************************************************** चल मैं कुछ करता हूँ सच्चाई झलक जाये शायदl मेरे लिए तेरे दिल में अच्छाई झलक जाये शायदl झूठों का सहारा लेकर आया होगा यदि शहर मेरे, मेरे अपने को भी छिपी बुराई झलक जाये शायदl हँस-हँस कर गले मेरे पड़ा रहता है हरदम जो तू, आज नहीं … Read more

गरीबी

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- गरीबी ने हाल कुछ ऐसा बनाया, एक वक्त का खाना भी हाथ नहीं आयाl मांगकर के लाया था रोटी के टुकड़े, एक आवारा कुत्ता वो ले गया झपट केl भूखे को रातभर नींद भी न आई, हे ईश्वर ये गरीबी हमारे हिस्से ही क्यों आई ? कचरे से चुन-चुनकर … Read more

पर्यावरण बचाना है

सुरेन्द्र सिंह राजपूत हमसफ़र देवास (मध्यप्रदेश) ******************************************************************************* विश्व पर्यावरण दिवस विशेष……………. सुनो भाइयों नारा ये जन-जन तक पहुँचाना है। पर्यावरण बचाना हमको, पर्यावरण बचाना है॥ आओ लगायें पौधे हम,ख़ूब बढ़ाएं हरियाली। करें वनों की पूर्ण सुरक्षा,वन उपजों की रखवाली। स्वच्छता का ध्यान रखें हम,बात ये सबको बताना है। पर्यावरण बचाना हमको… साफ़-स्वच्छ हो शहर हमारा, निर्मल … Read more

पेड़ और पानी की कहानी

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** पर्यावरण दिवस विशेष………….. पेड़ ने पानी से कहा- एक दिन हमारा अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, न पानी रहेगा पेड़ों में देने को… न पड़े रहेंगे हरियाली देने को। पानी का दुरुपयोग रुकता नहीं है, पेड़ों का कटना थमता नहीं है। सभी पक्के घरों की चाह करते हैं, फिर गर्मी आए तो … Read more

दो जून की रोटी

सौदामिनी खरे दामिनी रायसेन(मध्यप्रदेश) ****************************************************** जिन्दगी में बहुत मेहनत के बाद, कमाई है,दो जून रोटी। अपना स्वेद बहाया और बड़ी, लगन से पाई है,दो जून रोटी। श्रम से झिलमिलाए हैं स्वेद विन्दु, तब खाई है,दो जून रोटी। बेकसूर होकर भी डाँट खाई है, तब थाली में आई है,दो जून रोटी। मजदूरी और मजबूरी में खपाई है, … Read more