कोरा कागज़

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** इस धरती पर जब भी, कोई आता है। उसका मन कोरा कागज सा होता है। कोरे कागज पर, हर वर्ण व शब्द बिंदु मौजूद होते हैं। हर भाषा के, अवयव बिंदु मौजूद होते हैं। हर चित्र व आकृति के दृश्य बिंदु विद्यमान होते हैं। हर रंग व छठा की, ग्रहण … Read more

शपथ

अर्चना पाठक निरंतर अम्बिकापुर(छत्तीसगढ़) ***************************************************************************** सदा सच बोलूँ,ये शपथ लेता हूँ। झूठ की पोल खोलूँ,ये शपथ लेता हूँ। भ्रष्ट कदम डगमगाने लगे अगर कभी तो- उन कदमों में शूल चुभाऊँ,ये शपथ लेता हूँ। निष्ठापूर्वक कार्य करूँ,ये शपथ लेता हूँ। मुश्किल राह से ना डरुं,ये शपथ लेता हूँ। फिर भी असफल हो जाऊँँ अगर कभी तो- पुन: … Read more

जीवन-दर्शन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** दुनिया में होता बड़ा,शील धीर विवेक। परहित मृदुभाषी सदा,मौन प्रकृति हो नेक॥ तौल शील गुण त्याग सच,अपना नित आचार। अगर सफल गुरुता हुई, हुआ बड़ा आधार॥ ज्ञानवान अभिमान नर, कोप रौब आचार। दुराचार हो कटुवचन,लघुतर नर संसार॥ नहीं दोष दें अन्य को,याद करें निज कर्म। तौले तुला विवेक … Read more

माँ की पूजा

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’ पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़  ************************************************** मंदिर में तू पूजा करके,छप्पन भोग लगाये। घर की माँ भूखी बैठी है,उसको कौन खिलाये। कैसा तू नालायक है रे,बात समझ ना पाये। माँ को भूखा छोड़ यहाँ पर,दर्शन करने जाये॥ भूखी-प्यासी बैठी है माँ,दिनभर कुछ ना खाये। मांगे जब वह पानी तो फिर,क्यों उस पर झल्लाये॥ करे … Read more

रोजी-रोटी-मकान

आशुतोष कुमार झा’आशुतोष’  पटना(बिहार) **************************************************************************** खुद पे ऐतबार का, चंद सवालों का झमेला यहाँ, वक्त-वक्त का मेला रे। रोजी-रोटी-मकान, का यहाँ झमेला रे। भूख की जात नहीं, रोजी-रोटी की बात नहीं नंगे पांव चलते-चलते, छाले का झमेला रे। तन ढका नहीं, मन पढ़ा नहीं कह दिया नंगा रे, बात-बात का झमेला रे। सर्दी-गर्मी-बरसात, छत की … Read more

लम्हें

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** वो बीते लम्हें बहुत याद आते हैंl भूलना चाहते पर भूल न पाते हैं। उन बातों का दिल पर आज इतना असर- उन लम्हों को गीत-ग़ज़ल में गाते हैंl परिचय–मोहित जागेटिया का जन्म ६ अक्तूबर १९९१ में ,सिदडियास में हुआ हैl वर्तमान में आपका बसेरा गांव सिडियास (जिला भीलवाड़ा, राजस्थान) हैl … Read more

गर्मी में…

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- झुलस रहे हैं पौधे सारे झुलस रही हैं सभी लताएँ, सारे तन को जला रही हैं दक्षिण की ये गर्म हवाएँ, जल से अपनी प्यास बुझा ले… आ राही थोड़ा सुस्ता लेl जेष्ठ महीना तपती धूप सूख गये हैं सारे कूप, बालू रेत में चला ना जाए कैसे अपनी … Read more

लायल रहे

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** जाति मज़हब देखकर पागल रहे। सद्गुणों के जो नहीं कायल रहे। जो हमें भूला रहा हर दौर में, हम उसी के प्यार में पागल रहे। बूँद बरसी इक न मेरे खेत में, आसमां पेे गो बहुत बादल रहे। जो बुज़ुर्गों ने दिये थे कल मुझे, ज़िन्दगी भर … Read more

बबूल

मनोरमा जैन ‘पाखी’ भिंड(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* मन के मरुथल में हैं बो दिये बबूल, करते तन छलनी पर हैं मुझे कबूल। सौगात मिली है जो मुझको कैसे करूँ इंकार, सारे गम हैं करते हम पर अब अपना अधिकार। चुभते हैं दिल में हरपल बनकर जैसे शूल, करते तन छलनी पर हैं मुझे कबूल…॥ मैंने एक ख्वाब … Read more

उत्कर्ष

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* आत्मदृष्टि पाना ही दु:ख हरण का मार्ग है, करम ताे जीवन फिर क्याें पीड़ा की आग है ? क्यों सोचता है मानव हर पल बस हर्ष हाे, जीवन में आते-जाते कितने ही संघर्ष हैं..। सदा चलना लय ताल पे, यही ताे उत्कर्ष है॥ परिचय- डॉ.आशा गुप्ता का लेखन में … Read more