दार्शनिकता
उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश) *************************************************** दार्शनिक की दार्शनिकता से,दैत्य सारे जल रहे, गले ना उनकी दाल तो वे,इधर-उधर उछल रहे। दार्शनिक के दर्शन का,वे सामना ना कर सके, खड़ा होना तो दूर है,वे कदम ना आगे कर सके। जंगल में भी मंगल करे,दार्शनिक का यही काम है, बाधा चाहे कितनी रहें,वह चलता सदा अविराम है। … Read more