दार्शनिकता

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** दार्शनिक की दार्शनिकता से,दैत्य सारे जल रहे, गले ना उनकी दाल तो वे,इधर-उधर उछल रहे। दार्शनिक के दर्शन का,वे सामना ना कर सके, खड़ा होना तो दूर है,वे कदम ना आगे कर सके। जंगल में भी मंगल करे,दार्शनिक का यही काम है, बाधा चाहे कितनी रहें,वह चलता सदा अविराम है। … Read more

जब ज़मीर शरमाया मेरा

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ********************************************************************* कोई दो कदम तो साथ रहे मेरे भी, इस उम्मीद में खोजता रहा वह चेहरा। संग चलने को मेरे जो तैयार हुआ, वह फकत साथ था साया ही मेरा। रात को दस्तक दी,सपने में जिसने, दिन में वही शख्स था भुलाया मेरा। छोड़ के दामन मेरा,दूर हुआ मुझसे, वह था … Read more

सरस्वती वंदना

दीपेश पालीवाल ‘गूगल’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************** जय हो माँ शारदे माँ मेरी शारदे, हर ले मन के तिमिर को,मुझे ज्ञान दे…। कामना मेरी इतनी सी है मेरी माँ, सत्य को लिखकर सत्य पर चलता रहूँ। न मैं धन चाहूँ न और चाह भी नाम की, लेखनी हो मेरी राष्ट्र सम्मान की। जय हो माँ…॥ बन्ध … Read more

आँचल

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** रिपुता का चलता नहीं, उस पर कोई दाँव। माँ जिसके सिर पर करे, नित आँचल की छाँव॥ हो आँचल की रोशनी, बिन बाती बिन तेल। कवि के उर से फूटती, नव रचना की बेल॥ माँ देना आँचल सदा, मिले सदा ही जीत। नई कलम से मैं लिखूं, नये-नवेले गीत॥ माँ … Read more

अर्थहीन पुरुषत्व धरा पर

कैलाश भावसार  बड़ौद (मध्यप्रदेश) ************************************************* ‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ स्पर्धा विशेष………………… अर्थहीन पुरुषत्व धरा पर,यदि साथ नहीं नारी है, नहीं अर्थ जग की माया का,भले संपदा सारी है। अर्धनारी ईश्वर बन शिव में,माँ गौरा ही समाई है, विष्णु प्रिया लक्ष्मी माता,समृद्धि लेकर आई है। शक्ति स्वरूपा ने जगदीश्वर,की सत्ता ही संवारी है, अर्थहीन पुरुषत्व…॥ धन्य तुम्हारा … Read more

नारी-भारत माँ की मूरत

शिवम् सिंह सिसौदियाअश्रु ग्वालियर(मध्यप्रदेश) ******************************************************** ‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ स्पर्धा विशेष………………… नारी मैंने तो तुझमें भारत माँ की मूरत देखी थी, सरस्वती लक्ष्मी दुर्गा सीता की सूरत देखी थी। मैंने था तुझको प्रेम किया,था मैंने तुझको माँ माना, तुझको ही लक्ष्मीबाई,पद्मावती,धाय पन्ना जाना। तूने ही दाँत किये थे खट्टे,दुश्मन के-अँग्रेजों के, आज बनी मखमली फूल,बिस्तर युवकों … Read more

औरत

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* ‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ स्पर्धा विशेष………………… आसमां से जो उतर आई धरा पर, सूर्य की पहली किरण का तेज हो तुम। बादलों की गोद से जो बून्द सागर में गिरी, सीप से निकला हुआ मोती हो तुम॥ और जब बहारें झूम के आईं चमन में, गुल भी हो काँटा भी … Read more

नारी गाथा…

दृष्टि भानुशाली नवी मुंबई(महाराष्ट्र)  **************************************************************** मैं हूँ तो ये संसार है, स्त्री कहो,कांता या भामिनी। दर्प है मुझे इस बात का, कि हूँ मैं इस विश्व की नारी॥ आसान नहीं है रिश्ते निभाना, बीवी,बहू और बेटी के। ईश्वर का दर्जा मिला है मुझे, जननी के स्वरूप में॥ नीर की भाँति निर्मल हूँ, तो समझो न … Read more

मेरा सपना

सुश्री नमिता दुबे इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************** वंश चलाने की लालसा ने, मुझको ही दासता में जकड़ा। चूल्हे-चौके में उलझी मैं, सदा किया नर को बलवान। मैं भी जीना चाहती थी, भाई संग स्कूल भी जाना चाहती थी। बहुत सहा है अब ना सहूंगी, तोड़ दूंगी बेड़ियाँ बेटियों की। दिलाऊँगी उनको अपनी पहचान, मिला नहीं जिसे कभी … Read more

नारी उदघोष

क्षितिज जैन जयपुर(राजस्थान) ********************************************************** ‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ स्पर्धा विशेष………………… मैं प्रतीक विश्व सृजन शक्ति की, मैं निर्माण का मधुर राग हूँ त्याग और स्नेह से बनी हुई, प्रकृति की करुणा का मैं भाग हूँ। घृणा के रौद्र परिवेश में भी, मैं प्रेम का मुक्त हस्तदान हूँ होकर रहित भेदभाव से सदा ही, मानव मात्र का … Read more