हिन्दी:जनता और प्रशासक राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकारें

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मागधी अर्द्ध मागधी प्राकृत संस्कृत से निर्मित ग्यारह सौ वर्षों के वृहद काल में नवांकुरित नवपल्लवित, पुष्पित और सुरभित फलित हिन्दी भाषा और साहित्य आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल, आधुनिक काल और अर्वाचीन काल में प्रसूत पालित पोषित सम्वर्द्धित होती हुई राजभाषा हिंदी आज विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाली तृतीय … Read more

भयावह से दिखने वाले चेहरों के पीछे छुपी कोमलता…

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फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन भाग-६ कहते हैं कि कला मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती है। साहित्य और कला न केवल देशों की सीमाओं को पार कर जाते हैं, बल्कि वह हृदय की सीमाएं पार कर भी एक-दूसरे के हृदय में प्रवेश करने की क्षमता रखते हैं। कलाकारों को एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील होना ही चाहिए। … Read more

स्नेहसिक्त आतिथ्य की परम्परा उनके रक्त में

फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन… भाग-५.. फिजी में मुक्त समय में हमारे लिए सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र होते थे वहां के परंपरागत जनजातिय वेशभूषा वाले स्थानीय मूलनिवासी। उन लोगों का अत्यधिक स्नेहिल व्यवहार हम सबका हृदय जीतने में सक्षम था। विश्व के सर्वाधिक आनंददायक देश के रूप में चिन्हित इस देश में सचमुच यदि कहीं आनंद … Read more

मानसिक संतुलन के लिए शिक्षा में परिवर्तन आवश्यक

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** इंसान अपना मानसिक संतुलन इस कदर क्यों खो रहा है कि, छोटी-छोटी बात पर हत्या तक को अंजाम दे देता है। इसका सबसे पहला कारण कि, आजकल संयुक्त परिवारों का चलन खत्म हो रहा है। एकल परिवारों का चलन बढ़ गया है। दादा- दादी के संरक्षण में खून-खराबे जैसी घटनाएं नहीं होती … Read more

यूक्रेन:भारत की भूमिका हो सकती है बेजोड़

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की यूक्रेन-यात्रा ने सारी दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया है। वैसे पहले भी कई अमेरिकी राष्ट्रपति ईराक और अफगानिस्तान में गए हैं, लेकिन उस समय तक इन देशों में अमेरिकी फौजों का वर्चस्व कायम हो चुका था, पर यूक्रेन में न तो अमेरिकी फौजें हैं और न ही … Read more

वह भ्रम पहली बार टूटा

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फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन… भाग-४.. इस पूरी यात्रा में एक बात सबसे अधिक प्रभावित कर गई कि, जिन राजनेताओं को हम अत्यधिक अहंकारी मान लेने का भ्रम पाल लेते हैं, वह भ्रम पहली बार हमारे पूरे प्रतिनिधिमंडल का टूटा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर जी, विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन जी, गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा … Read more

विश्वगुरु बनने का सुन्दर प्रयास !

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** वैसे हमारा देश लापरवाहियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कोई भी काम नियमानुसार होना, करना कठिन और असंभव है। हमारे यहाँ भाषण में बहुत-कुछ नैतिकता की बातें बोली और बताई जाती हैं, पर वास्तविक धरातल में सच्चाई अलग होती है। अमृत काल के समय यानी ७५ वर्ष स्वतंत्र हुए देश में और नैतिक … Read more

मुफ्त की बजाय गरीबों का आर्थिक स्वावलम्बन जरूरी

ललित गर्गदिल्ली************************************** आजादी के अमृत काल में सशक्त भारत एवं विकसित भारत को निर्मित करते हुए गरीबमुक्त भारत के संकल्प को भी आकार देना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं उनकी सरकार ने वर्ष २०४७ के आजादी के शताब्दी समारोह के लिए जो योजनाएं एवं लक्ष्य तय किए हैं, उनमें गरीबी उन्मूलन के लिए भी व्यापक … Read more

वैश्विक शान्ति के लिए हिन्दी बने विश्वभाषा

डॉ. मनोहर भण्डारीइंदौर (मध्यप्रदेश)*********************************** फिजी यात्रा-विश्व हिंदी सम्मेलन… फिजी के नांदी शहर में आयोजित बारहवें ‘विश्व हिन्दी सम्मेलन’ को सार रूप में देखें तो ऐसा ध्वनित और स्पष्ट प्रतीत होता है कि फिजी सरकार और भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिन्दी को विश्वभाषा बनाना रहा है। फिजी के नागरिकों … Read more

इच्छा को दबा नहीं पाया

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फिजी यात्रा:विश्व हिंदी सम्मेलन.. भाग-३ जिस वाद्य की चर्चा मैंने पिछली जानकारी में की थी, उसे बजाने की इच्छा को मैं भी दबा नहीं पाया। मैं जानता हूँ मैं कोई भी वाद्य नहीं बजा पाता। न ताल का ज्ञान है, ना सुर का, लेकिन कभी-कभी कुछ चीजें बच्चों की तरह मस्तीखोरी में हो जाती है। … Read more